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चेन्नई में खतरनाक केमिकल से पके चार टन आम हुए जब्त, सही आम की होती है ये पहचान
अभी हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग ने चेन्नई के कोयम्बेडु फल बाजार में आम विक्रेताओं के गोदामों पर छापेमारी के दौरान चार टन आम और चार टन केले जब्त किए जिन्हें आर्टिफिशियल केमिकल्स की मदद से पकाया गया था।
जांच में सामने आया कि आम और केला को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड, आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे केमिकल्स का प्रयोग किया जा रहा था, जिनका सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि आम के इस सीजन में आप केमिकल से पके आम खाने से बचने के तरीके।

मुनाफे के लिए करते हैं केमिकल का इस्तेमाल
दरअसल आम का सीजन आते ही मुनाफा कमाने के लिए फलो को पकने से पहले ही तोड़ दिया जाता है। फलों को प्राकृतिक तरीके से पेड़ों में पकने में तकरीबन डेढ़ से तीन हफ्ते का समय लग जाता हैं। यह समय बचाने के लिए कारोबारी कच्चे फल ही तुड़वाकर खरीद लेते हैं और उन्हें केमिकल की मदद से आठ-दस घंटे से लेकर ज्यादात्तर दो दिन में पकाकर बाजार में बेचने के लिए निकाल देते हैं।
जहरीले मसाले से पकाते हैं आम
FSSAI के अनुसार आम को आर्टिफिशियल तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (CaC2) का इस्तेमाल करते हें। यह एक हानिकारक केमिकल है इस वजह से खान पान में इसके इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया है। कार्बन कार्बाइड को 'मसाला' भी कहा जाता है। आम के अलावा पपीता और केला पकाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
जहरीला और खतरनाक होता है कार्बाइड
FSSAI के मुताबिक, कैल्शियम कार्बाइड में कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं और अक्सर इसका उपयोग वेल्डिंग जैसे कामों के लिए किया जाता है। इस केमिकल में आर्सेनिक और फॉस्फोरस हाइड्राइड भी पाया जाता है। जिससे पाचन तंत्र में गड़बड़ी, उल्टी, दस्त, कमजोरी, त्वचा पर अल्सर, लीवर की बीमारी, आंखों की स्थाई क्षति और सांस की तकलीफ हो सकती है। यह तंत्रिका तंत्र ( न्यूरोलॉजिकल सिस्टम ) पर असर डालता है जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, नींद आना, मानसिक भ्रम, मेमोरी लॉस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कैसे पहचाने असली और नकली आम
FSSAI के अनुसार हमेशा काले धब्बे वाले आम को खरीदने से बचें। यह कैल्शियम कार्बाइड केमिकल से पके होते हैं। इसलिए कोई भी फल खाने से पहले अच्छी तरह बहते पानी में धो लेना चाहिए।
रंग से पहचानें
कार्बाइड से पके आमों के सतह पर पीले और हरे रंग का असमान सा पैच देखेंगे। यहां हरा और पीला पैच अलग-अलग दिखता है। वहीं प्राकृतिक रूप से पके हुए आमों में यह हरे और पीले रंग का पैच एक समान होगा।
पानी में डुबाकर देखे
आमों को एक पानी से भरी बाल्टी डुबाकर देखे। अगर आम पानी पर तैरते हैं तो उन्हें पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। वहीं अगर आम डूब जाए तो वे प्राकृतिक रूप से पके हुए हैं।
रस से मालूम करें
केमिकल से पके आम रसदार नहीं होते हैं वहीं प्राकृतिक रुप से पके आम बहुत रसीले होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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