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अलर्ट: केरल में मंडराया 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' का खतरा, जानें कितनी खतरनाक है यह बीमारी
पिछले कुछ वर्षों में भारत में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कभी ब्रेन-ईटिंग अमीबा, कभी H3N2 फ्लू वायरस और अब अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में केरल के त्रिशूर जिले में इस बीमारी के मामले सामने आए हैं। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश में भी इस महीने की शुरुआत में कुछ मामलों की पुष्टि हुई थी।

केरल में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के ताजा मामले
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिशूर जिले के मुलनकुन्नाथुकावु पंचायत क्षेत्र में सूअरों में संक्रमण पाया गया है। भोपाल की एक सरकारी प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में इस वायरस की पुष्टि हुई। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने प्रभावित इलाके में एक विशेष टीम तैनात की है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) सूअरों में फैलने वाला एक घातक वायरल रोग है। इसकी चपेट में आने वाले सूअरों की अचानक और तेज़ी से मौत हो सकती है। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका कोई टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। संक्रमित क्षेत्र में केवल सूअरों को मारना और उनके संपर्क से अन्य पशुओं को बचाना ही इसका मुख्य उपाय है।
यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता। यानी इससे मनुष्य सीधे तौर पर बीमार नहीं होते। लेकिन यह बीमारी पशुधन को भारी नुकसान पहुंचाकर किसानों और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालती है।
यह बीमारी कैसे फैलती है?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर कई माध्यमों से फैल सकता है
- संक्रमित सूअरों के सीधे संपर्क से
- दूषित भोजन और पानी से
- संक्रमित उपकरणों और कपड़ों से
- मांस या मांस उत्पादों के जरिए
- जंगली सूअरों और घरेलू सूअरों के बीच संपर्क से
- इसी कारण से इस बीमारी को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कहां से फैला यह वायरस?
जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, अफ्रीकी स्वाइन फीवर की शुरुआत अफ्रीका में हुई थी। धीरे-धीरे यह वायरस यूरोप, एशिया और अन्य देशों में भी फैल गया। भारत में यह बीमारी पिछले कुछ वर्षों में उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और असम में कई बार सामने आ चुकी है।
मिजोरम के मामले में स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ASF का प्रकोप म्यांमार और बांग्लादेश से आयातित सूअरों या सूअर के मांस की वजह से हुआ। यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में यह बीमारी ज्यादा तेजी से फैलती है।
कितना खतरनाक है ASF?
सूअरों के लिए: यह बीमारी लगभग हमेशा घातक साबित होती है। संक्रमित सूअरों की मृत्यु दर 100% तक हो सकती है।
मनुष्यों के लिए: यह वायरस इंसानों के लिए हानिकारक नहीं है। यानी ASF से मनुष्य संक्रमित नहीं होते।
आर्थिक असर: सूअरों की अचानक मौत और बड़े पैमाने पर पशुधन के खत्म होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही मांस उद्योग पर भी इसका गहरा असर पड़ता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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