अनिल कपूर का ऑक्‍सीजन थेरेपी लेते हुए वीडियो हुआ वायरल, कैसे काम करता है HBOT

बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने एक्‍टर अनिल कपूर का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें वो ऑक्‍सीजन थेरेपी लेते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में अनिल कपूर एक ऑक्‍सीजन चैंबर में लेटे हुए नजर आ रहे हैं और उन्‍होंने ऑक्‍सीजन मास्‍क भी लगा रखा है। इस वीडियो के शेयर होने के बाद कई यूजर्स ने इस थेरेपी को लेकर कमेंट क‍िए हैं। कई लोग इसे अब अनिल कपूर के फिटनेस से जोड़कर देख रहे हैं।

वीडियो में नजर आ रहे इस चैंबर में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी दी जाती है। एंटी-एज‍िंग के ल‍िए इस थेरेपी को कारगर माना जाती है। इससे स्‍क‍िन में नए सेल्‍स बनते हैं ज‍िससे त्‍वचा टोन होती है। डॉक्‍टरों के मुताब‍िक कई बॉलीवुड हस्‍त‍ियां भी ये थेरेपी लेती हैं। आइए जानते हैं इस थेरेपी के बारे में और ये मशीन कैसे काम करती है? इसके फायदे क्या हैं?

Anil Kapoor Adds Hyperbaric Oxygen Therapy To His Wellness Routine; Know how its work?

कैसे काम करता है HBOT?
HBOT थेरेपी के दौरान चेंबर के अंदर एटमॉस्फेरिक प्रेशर बढ़ जाता है जिससे मरीज के खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जाती है। जिससे शरीर के अंदर की डैमेज टिश्‍यूज की मरम्‍मत होने के साथ ही ये फिर से नई जैसी बन जाती है। इस थेरेपी से न केवल शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है बल्कि सूजन भी ठीक होती है। कि‍सी भी तरह का दर्द और चोटों को ठीक होने में कम समय लगता है।

HBOT से क्या फायदे हैं?
* एंटी-एज‍िंग के ल‍िए इस थेरेपी को कारगर मानी जाती है। इससे स्‍क‍िन में नए सेल्‍स बनते हैं ज‍िससे त्‍वचा टोन होती है। डॉक्‍टरों के मुताब‍िक कई बॉलीवुड हस्‍त‍ियां भी ये थेरेपी लेती हैं।
* नई रक्त नलिकाएं बनने में मदद मिलती है जिससे, रक्त संचार पहले से कई गुना बेहतर हो जाता है।
* स्टेम सेल की संख्‍या और कार्यकुशलता में बढ़ोतरी।
* कोलेजन प्रोटीन की क्‍वॉल‍िटी में सुधार।
* सूजन कम होने में मदद मिलती है।
* सर्जरी या रेडिएशन के बाद टिशूज में फाइब्रोसिस यानी टिशूज का डैमेज होना नियंत्रित होता है।
* इस्किमिया यानी खून में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली बीमारी का उपचार.
* शरीर को इंफेक्‍शन के बचाव में आने से बचाता है।
* रक्त नलिकाओं तक ऑक्‍सीजन की बेहतर सप्‍लाई।

Anil Kapoor Adds Hyperbaric Oxygen Therapy To His Wellness Routine; Know how its work?

कैसे दी जाती है हाइपरबेर‍िक ऑक्‍सीजन थेरेपी?
हाइपरबेर‍िक चेंबर की मशीन में हर द‍िन 60 से 90 म‍िनट तक बिताकर इस थेरेपी का लाभ ल‍िया जा सकता है। इस चेंबर को 100 प्रत‍िशत ऑक्‍सीजन प्रेशर से भर दिया जाता है। ज‍िससे रक्‍त कोशिकाओं में 10 से 20 गुना ज्‍यादा ऑक्‍सीजन सप्‍लाई होती है। जि‍स हवा में खुली हवा में हम सांस लेते हैं उसमें 21 प्रत‍िशत ऑक्‍सीजन होती है, जबक‍ि हाइपरबेर‍िक चेंबर में 200 से 240 प्रत‍िशत ऑक्‍सीजन होती है। सुरक्षा नियमों की वजह से इस थेरेपी को क‍िसी प्रशिक्षित डॉक्‍टर की न‍िगरानी में ही लेना चाह‍िए। चेंबर में जब ऑक्‍सीजन का स्‍तर उच्‍च होता है, तो बहुत सावधानी बरतनी होती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Wednesday, April 26, 2023, 9:43 [IST]
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