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घंटों ब्लूटूथ ईयरफोन लगाकर रखने वाले सावधान! दिमाग में पनप सकता है ट्यूमर, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Brain Tumor Symptoms Or Reason: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लूटूथ ईयरफोन, ईयरबड्स और स्मार्टफोन हमारी लाइफ का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस की मीटिंग्स से लेकर रील्स देखने और गाने सुनने तक, हमारे कान घंटों वायरलेस गैजेट्स से ढके रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कान में लगातार रहने वाले ये गैजेट्स आपके दिमाग के लिए कितने सुरक्षित हैं? 8 जून यानी 'वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे' के मौके पर हर तरफ यह बहस छिड़ी हुई है कि क्या ब्लूटूथ और मोबाइल का हद से ज्यादा इस्तेमाल वाकई दिमाग में ट्यूमर जैसी घातक बीमारी को जन्म दे सकता है। आइए जानते हैं इस दावे के पीछे का वैज्ञानिक सच, डॉक्टरों की राय और वो शुरुआती लक्षण जिन्हें आपको भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या ब्लूटूथ और मोबाइल रेडिएशन से वाकई ब्रेन ट्यूमर होता है? जानें वैज्ञानिक सच
अक्सर सोशल मीडिया पर दावे किए जाते हैं कि ब्लूटूथ ईयरफोन से निकलने वाला रेडिएशन सीधे दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। लेकिन विज्ञान और हालिया मेडिकल रिसर्च इस पर थोड़ी अलग राय रखते हैं जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन
मोबाइल फोन और ब्लूटूथ डिवाइस से निकलने वाला रेडिएशन 'नॉन-आयोनाइजिंग' श्रेणी में आता है। यह एक्स-रे या यूवी किरणों (UV Rays) की तरह इतना शक्तिशाली नहीं होता कि आपके डीएनए (DNA) को नुकसान पहुंचा सके या सीधे ट्यूमर पैदा कर दे।
WHO की रिपोर्ट क्या कहती है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने मोबाइल रेडिएशन को 'Possible Carcinogen' जो संभावित रूप से कैंसरकारी श्रेणी में रखा है। इसका मतलब यह है कि अभी तक इसके और कैंसर के बीच कोई सीधा और पुख्ता वैज्ञानिक संबंध नहीं मिला है, लेकिन इसकी संभावना को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। इसलिए वैज्ञानिक इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
रेडिएशन से ज्यादा लगातार इस्तेमाल है खतरनाक
फोर्टिस और मैक्स जैसे बड़े अस्पतालों के न्यूरोलॉजिस्ट्स और ईएनटी (ENT) विशेषज्ञों के मुताबिक, रेडिएशन से कहीं ज्यादा बड़ा खतरा इन गैजेट्स के लंबे समय तक और गलत तरीके से इस्तेमाल करने से है। आप इनके बारे में नीचे विस्तार से जान लें।
हवा का रास्ता रुकना:
जब आप घंटों कान में ईयरबड्स ठूंसकर रखते हैं, तो कान के अंदर हवा का वेंटिलेशन बंद हो जाता है। इससे कान के पर्दे के पास नमी और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो गंभीर इन्फेक्शन का कारण बनते हैं।
अत्यधिक ध्वनि का दबाव:
सीधे कान के पर्दे के पास तेज आवाज बजने से सुनने की नसें (Auditory Nerves) कमजोर होने लगती हैं। यह कमजोरी आगे चलकर सिरदर्द और मानसिक तनाव का रूप ले लेती है, जिसे लोग अक्सर ट्यूमर का डर समझ बैठते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के 5 साइलेंट लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
अगर आप गैजेट्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ भी महसूस होता है, तो इसे सामान्य थकान समझकर टालने की भूल न करें:
सुबह के वक्त तेज सिरदर्द: अगर उठते ही सिर में भारीपन या असहनीय दर्द होता है, और समय के साथ यह बढ़ता जाता है, तो यह ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
कान में लगातार सीटी जैसी आवाज आना: ईयरफोन हटाने के बाद भी अगर कान में लगातार घंटी या सां-सां की आवाज सुनाई देती है।
चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना: चलते-फिरते अचानक चक्कर आ जाना या शरीर का बैलेंस खो देना।
उल्टी या जी मिचलाना: सिरदर्द के साथ अचानक उल्टी होना या लगातार मतली जैसा महसूस होना।
धुंधला दिखना या याददाश्त कमजोर होना: आंखों की रोशनी ठीक होने के बावजूद अचानक चीजें धुंधली दिखना या छोटी-छोटी बातें भूल जाना।
कानों और दिमाग की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये 3 सेफ्टी टिप्स
60/60 का जादुई फॉर्मूला: ईयरफोन का इस्तेमाल करते समय वॉल्यूम कभी भी 60% से ऊपर न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा ईयरफोन न लगाएं। हर एक घंटे बाद कानों को कम से कम 10 मिनट का आराम दें।
सोते समय फोन को रखें दूर: रात को सोते समय स्मार्टफोन को अपने सिरहाने या तकिए के नीचे रखने की आदत आज ही बदलें। इसे खुद से कम से कम 3 से 4 फीट की दूरी पर रखें।
वायर्ड ईयरफोन और स्पीकर को प्राथमिकता दें: लंबी कॉल्स या ऑफिस मीटिंग्स के दौरान ब्लूटूथ की जगह तार वाले (वायर्ड) ईयरफोन का इस्तेमाल करें या फोन को स्पीकर पर डालकर बात करें। इससे आपके सिर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) का दबाव बेहद कम हो जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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