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Kamika Ekadashi Vrat Katha: कामिका एकादशी पर जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, भगवान विष्णु करेंगे हर इच्छा पूरी
Kamika Ekadashi 2026 Vrat Katha: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन मास की कामिका एकादशी का अपना धार्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी पड़ती है। साल 2026 में कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत के साथ कामिका एकादशी की कथा का श्रवण या पाठ करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में, आइए जानते हैं कामिका एकादशी से की व्रत कथा -

कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadashi Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक गांव में एक शक्तिशाली क्षत्रिय रहता था। उसका स्वभाव थोड़ा गुस्सैल था। एक दिन किसी बात को लेकर उसका एक ब्राह्मण से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच झगड़ा हुआ और इस दौरान ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।
इस घटना से क्षत्रिय बहुत दुखी हुआ। उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा और उसे ब्रह्महत्या के पाप का डर सताने लगा। वह ब्राह्मण के अंतिम संस्कार में शामिल होकर अपने अपराध का प्रायश्चित करना चाहता था, लेकिन वहां मौजूद ब्राह्मणों ने उसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने पाप का प्रायश्चित नहीं करेगा, तब तक उसे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना चाहिए।
क्षत्रिय ने ब्राह्मणों से पूछा कि वह इस पाप से कैसे मुक्त हो सकता है। तब उन्होंने उसे बताया कि सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने और जरूरतमंदों व ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने से पुण्य मिलता है। उन्होंने उसे सच्चे मन से भगवान विष्णु की शरण लेने और अपने किए पर पश्चाताप करने की सलाह दी।
क्षत्रिय ने ब्राह्मणों की बात मानकर कामिका एकादशी का व्रत रखा। उसने विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की और पूजा में तुलसी दल अर्पित किया। साथ ही, उसने अपने अपराध के लिए भगवान से सच्चे मन से क्षमा मांगी। उसकी सच्ची भक्ति और पश्चाताप से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। भगवान ने उसे उसके पाप से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। इसके बाद क्षत्रिय के जीवन में बदलाव आया और वह धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलने लगा। इसी मान्यता के कारण कामिका एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना जाता है।



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