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जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर: जहां मेहंदी का प्रसाद जोड़ता है शादी की डोर, उमड़ी सिंगल लड़कों की भीड़
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर हर साल गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले एक अनोखे नजारे का गवाह बनता है, यहां देशभर से हजारों कुंवारे युवक-युवतियां सिर्फ एक चीज के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं: भगवान गणेश को चढ़ाई गई मेहंदी। इस साल भी मंदिर परिसर में यह नजारा देखने को मिला, जब सिंधारा (सिंजारा) रस्म के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।


क्या है सिंधारा रस्म?
सिंधारा जयपुर की एक पुरानी परंपरा है, जिसमें घर में जन्म या विवाह जैसे शुभ अवसर पर नए वस्त्र और मेहंदी चढ़ाई जाती है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, गणेश चतुर्थी से एक शाम पहले भगवान गणेश को नई पोशाक और मुकुट धारण कराया जाता है, और इसके बाद प्रसाद के रूप में मेहंदी वितरित की जाती है। भगवान को चढ़ाई गई यह मेहंदी भक्तों में बांटी जाती है, जिसे लेने के लिए दूर-दूर से लोग जयपुर पहुंचते हैं।
3500 किलो मेहंदी, सिर्फ चंद घंटों में बंटा प्रसाद
इस बार मंदिर में करीब 3500 किलो मेहंदी मंगवाई गई, जो राजस्थान के सोजत से आई। इतनी बड़ी मात्रा में मेहंदी को पहले भगवान गणेश को अर्पित किया गया, भगवान को पंचामृत से स्नान भी कराया गया, और इसके बाद मंदिर परिसर में 8 अलग-अलग जगहों पर एक साथ यह प्रसाद बांटा गया, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक यह पहुंच सके। भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तेज धूप और उमस के बावजूद श्रद्धालु 6 से 7 घंटे तक कतार में डटे रहे, कई तो रातभर पहले से ही लाइन में लग गए थे, फिर भी बड़ी संख्या को मेहंदी नहीं मिल पाई।
किन-किन राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु?
इस मेहंदी प्रसाद को पाने की चाहत सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है। इस साल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों से लोग खासतौर पर यह मेहंदी लेने जयपुर पहुंचे। हाल के समय में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रील ने भी इस परंपरा को नई पहचान दी है, जिसके बाद देशभर के कुंवारे युवक-युवतियों में इस मेहंदी को पाने की उत्सुकता और बढ़ गई।
मेहंदी और शादी की मन्नत के पीछे की मान्यता
श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था है कि भगवान गणेश को अर्पित की गई इस मेहंदी को प्रसाद के रूप में हाथों पर लगाने से विवाह की मनोकामना पूरी होती है। खासतौर पर अविवाहित युवक-युवतियों में यह मान्यता बेहद लोकप्रिय है, वे मानते हैं कि इस पवित्र मेहंदी के प्रभाव से उनके जीवन में जल्द ही विवाह का योग बनता है। यही वजह है कि मोती डूंगरी की मेहंदी को लेकर हर साल कुंवारों के बीच खास उत्साह देखने को मिलता है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का निर्माण सन् 1761 में जयपुर के सेठ जय राम पल्लीवाल और महंत शिव नारायण द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर जयपुर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और स्थानीय परंपरा के अनुसार, शहर में किसी भी शुभ कार्य, चाहे वह विवाह हो या गृह प्रवेश से पहले सबसे पहला निमंत्रण भगवान गणेश को दिया जाता है। कई नवविवाहित जोड़े विवाह के बाद सबसे पहले इसी मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का यह मेहंदी प्रसाद सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और उम्मीद का प्रतीक बन चुका है। हर साल हजारों लोगों की भीड़, घंटों का इंतजार और दूर-दराज राज्यों से आने वाले श्रद्धालु इस बात के गवाह हैं कि जयपुर की यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी पहले हुआ करती थी।



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