हरतालिका तीज 2026: क्या गर्भवती महिलाएं रख सकती हैं निर्जला व्रत, जान लें सावधानियां

हरतालिका तीज को हिंदू धर्म में सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें सामान्यतः महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन अगर कोई महिला गर्भवती है और श्रद्धावश यह व्रत रखना चाहती है, तो उसे अपने और गर्भस्थ शिशु दोनों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कुछ खास सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।

Teej Vrat Rules
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आइए समझते हैं कि गर्भावस्था में यह व्रत किस तरह सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।

सबसे पहला और जरूरी कदम: डॉक्टर से सलाह लें
गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का उपवास शुरू करने से पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण है। हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है: किसी को शुगर, बीपी या एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है, इसलिए डॉक्टर ही यह तय कर सकते हैं कि व्रत रखना सुरक्षित है या नहीं। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों और लाइफस्टाइल पोर्टल्स की सलाह के अनुसार, डॉक्टर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ही व्रत रखने की अनुमति देते हैं, ताकि किसी को कोई खतरा न हो।

निर्जला व्रत बिल्कुल न रखें
सामान्य तीज व्रत में पानी तक नहीं पिया जाता, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह नियम पूरी तरह बदल जाता है। आमतौर पर तीज का व्रत निर्जला यानी बिना अन्न-जल के रखा जाता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को यह तरीका बिल्कुल नहीं अपनाना चाहिए, शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के लिए बीच-बीच में पानी और अन्य पेय लेते रहना जरूरी माना जाता है। नारियल पानी, ताजा जूस या दूध जैसे पेय गर्भावस्था में फायदेमंद माने जाते हैं।

हल्का और पौष्टिक फलाहार लें
पूरी तरह भूखा रहना गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए नुकसानदेह हो सकता है। स्वास्थ्य सलाहकारों के अनुसार, समय-समय पर पर्याप्त पानी के साथ-साथ डॉक्टर की अनुमति से हल्का फलाहार या पौष्टिक भोजन लिया जा सकता है। फल, ड्राई फ्रूट्स, दूध से बनी चीजें और साबूदाना जैसी हल्की चीजें बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।

इन बातों का रखें खास ध्यान
- लंबे समय तक भूखा-प्यासा न रहें, गर्भावस्था में शरीर को नियमित पोषण और पानी की जरूरत होती है।
- झूला झूलने से बचें, पारंपरिक रूप से तीज पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है, खासकर संतुलन बिगड़ने या गिरने के खतरे के कारण।
- लंबे समय तक खड़े न रहें, पूजा के दौरान बार-बार बैठने-उठने या घंटों खड़े रहने से बचें।
- थकान या चक्कर महसूस हो तो तुरंत आराम करें, शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।
- रात्रि जागरण की परंपरा में ढील दें, सामान्यतः इस व्रत में रातभर जागरण किया जाता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त नींद लेना ज्यादा जरूरी है।

अगर व्रत संभव न हो तो क्या करें?
अगर स्वास्थ्य कारणों से व्रत रखना संभव न हो, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। जो महिला स्वास्थ्य कारणों से व्रत नहीं रख पाती, वह पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सकती है। धार्मिक मान्यता में भावना और श्रद्धा को सबसे ऊपर रखा गया है, न कि शारीरिक कष्ट को। भगवान भक्त की नीयत देखते हैं, उपवास की कठोरता नहीं।

हरतालिका तीज आस्था और समर्पण का पर्व है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु की सेहत सर्वोपरि होनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह लेकर, पानी और हल्के फलाहार के साथ यह व्रत सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है। अगर व्रत संभव न हो, तो सिर्फ पूजा-अर्चना करके भी पूरी श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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