89 साल की उम्र में धर्मेंद्र को करानी पड़ी Eye Grafting सर्जरी, जानें क्‍या है प्रोसेस और क‍िसे पड़ती है जरुरत

Actor Dharmendra Undergoes Eye Grafting Surgery : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र हाल ही में अपनी एक आंख पर बैंडेज लगाए मीडिया के सामने आए। एक पैपराजो द्वारा साझा किए गए वीडियो में वे अपनी आंख की सर्जरी के बारे में बता रहे थे। इस वीडियो में 89 वर्षीय अभिनेता ने कहा, "अभी भी बहुत दम है, बहुत जान रखता हूं। मेरी आंख में ग्राफ्ट हुआ है।

आप दर्शकों से प्यार करता हूं, मेरे दोस्तों, मेरे प्रशंसकों से प्यार करता हूं। मैं मजबूत हूं।" सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया है, जिससे आई ग्राफ्टिंग (Corneal Grafting) को लेकर लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है। आइए जानते हैं कि आई ग्राफ्टिंग क्या होती है, यह कब जरूरी होती है और इसका खर्च कितना आता है।

Actor Dharmendra Undergoes Eye Grafting Surgery

क्या है आई ग्राफ्टिंग?

आई ग्राफ्टिंग, जिसे मेडिकल टर्म में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट (Corneal Transplant) या केराटोप्लास्टी (Keratoplasty) कहा जाता है, एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें डैमेज हुई कॉर्निया के सभी या कुछ भाग को हेल्दी डोनर टिश्यू से रिप्लेस किया जाता है। यह ऑपरेशन तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो जाती है और उसकी दृष्टि पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नजर में सुधार लाना, दर्द से राहत देना और किसी गंभीर संक्रमण या चोट का इलाज करना होता है।

आई ग्राफ्टिंग की जरूरत कब पड़ती है?

आई ग्राफ्टिंग उन मरीजों के लिए की जाती है जिनकी कॉर्निया गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी होती है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

कॉर्नियल स्कारिंग (Corneal Scarring) - किसी चोट, संक्रमण या अन्य कारणों से कॉर्निया पर दाग आ जाना।

केराटोकॉनस (Keratoconus) - जब कॉर्निया पतली होकर शंकु के आकार की हो जाती है।

इंफेक्शन के कारण डैमेज - गंभीर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण कॉर्निया खराब हो सकती है।

आंख की चोट - किसी दुर्घटना में आंख पर चोट लगने से कॉर्निया डैमेज हो सकती है।

कॉर्नियल डिस्ट्रोफी (Corneal Dystrophy) - जेनेटिक रूप से होने वाली एक समस्या जिससे कॉर्निया खराब हो जाती है।

आई ग्राफ्टिंग कैसे की जाती है?

आई ग्राफ्टिंग एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसे विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा किया जाता है। इसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

डैमेज कॉर्निया निकालना - सर्जन सबसे पहले प्रभावित कॉर्निया के टिश्यू को एक सटीक गोलाकार टुकड़े के रूप में निकालते हैं।

डोनर कॉर्निया लगाना - फिर उसी आकार का एक हेल्दी डोनर कॉर्निया का टुकड़ा लिया जाता है और इसे मरीज की आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है।

सिलाई की जाती है - नए टिश्यू को बहुत ही बारीक टांकों (Stitches) से सिल दिया जाता है।

रिकवरी प्रक्रिया शुरू होती है - यह सुनिश्चित करने के लिए कि शरीर नए टिश्यू को स्वीकार कर रहा है, मरीज को कुछ दवाएं और आई ड्रॉप्स दी जाती हैं। टांके आमतौर पर 1-2 साल बाद हटाए जाते हैं।

रिकवरी और देखभाल

आई ग्राफ्टिंग के बाद पूरी तरह से ठीक होने और दृष्टि को स्थिर होने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। डॉक्टर इस दौरान कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं:

- धूल और धुएं से बचें, जिससे संक्रमण का खतरा न हो।
- नियमित रूप से डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाएं।
- डॉक्टर द्वारा दी गई आई ड्रॉप्स को समय पर लगाएं।
- आंखों पर अधिक दबाव न डालें और भारी काम करने से बचें।
- धूप में निकलते समय सनग्लासेज का उपयोग करें।

आई ग्राफ्टिंग का खर्च कितना होता है?

आई ग्राफ्टिंग की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि शहर, अस्पताल और डॉक्टर की विशेषज्ञता। भारत में इस सर्जरी की औसत लागत 90,000 रुपये से 1,00,000 रुपये प्रति आंख के बीच हो सकती है। हालांकि, बड़े शहरों और प्राइवेट अस्पतालों में यह खर्च अधिक भी हो सकता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Thursday, April 3, 2025, 12:14 [IST]
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