Brain-Eating Amoeba से केरल में बच्‍चे की मौत, 2 महीने में 3 मामला, एक बार इंफेक्‍शन होने पर 97% पक्‍की है मौत

brain eating amoeba kerala case: केरल के कोझिकोड में एक 14 साल के लड़के की मौत के बाद ब्रेन ईटिंग अमीबा फ‍िर से चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक यह बच्‍चा एक छोटे तालाब में नहाने गया था, जिसकी वजह से उसे यह खतरनाक इंफेक्शन हो गया है।

घबराने वाली बात यह है क‍ि दो महीने में इस तरह का ये तीसरा मामला है। पहला मामला 21 मई को मलप्पुरम की पांच साल की लड़की की मौत का था। दूसरा 25 जून को कन्नूर की 13 साल की लड़की की मौत का था। 3 मामले सामने आने बाद केरल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों को ब्रेन ईटिंग अमीबा (अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस) को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

brain eating amoeba kerala case

आइए जानते हैं क‍ि आखिर ये ब्रेन ईटिंग अमीबा क्‍या है और यह दिमाग में घुसने के बाद क‍ितना खतरनाक साबित हो सकता है।

ब्रेन ईटिंग अमीबा क्‍या है ?

अमीबा का नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है। इसे बोलचाल की भाषा में 'ब्रेन ईटिंग अमीबा' यानी दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है। मेडिकल टर्म में इस इंफेक्‍शन को प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस' यानी PAM कहा जाता है, जो गंदे पानी में पाए जाने वाले प्री-लिविंग अमीबा के वजह से होता है। वैसे तो यह बैक्‍टीरिया खाकर जिंदा रहा है, लेक‍िन एक बार यह इंसान के शरीर में घुस गए तो दिमाग को भोजन बनाकर खाने लगते है। यह जीव तालाब में नहाने के दौरान नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करते है ।

PAM इंफेक्शन के लक्षण

अमीबा के इंफेक्‍शन के बाद संक्रम‍ितों में 24 घंटे से लेकर 14 दिन के भीतर लक्षण नजर आते हैं-

- बुखार
- भयानक सिर दर्द
- गर्दन में अकड़न
- लगातर उल्टियां
- उलझन
- आंखों में रोशनी बर्दाश्‍न न होना
- चक्‍कर आना

क‍ितना खतरनाक है दिमाग खाने वाला अमीबा

अमीबा कोई आम बैक्‍टीरिया या जीव नहीं हैं, जिसके संक्रमण को एंटीबायोटिक दवाओं के इलाज से खत्म किया जा सके। ये इतना घातक है कि समय रहते लक्षणों की पहचान कर संक्रमण को रोका न जाए तो 5 से 10 दिन में संक्रम‍ित की मौत हो सकती है।
इसकी डेथ रेट 97% से अधिक है यानी अगर एक बार यह अमीबा शरीर में घुस जाए तो 97% संभावना है क‍ि व्‍यक्ति की मौत हो जाएगी

तालाब में नहाते हुए इन बातों का ध्‍यान रखें

- बिना नोजप्‍लग के क‍िसी भी नेचुरल वॉटर स्‍पोर्ट में न जाएं।
- जहा ताजा गर्म पानी हो, उस जगह पानी में जाने से बचें।
- जलनेति प्रक्र‍िया के जरिए नाक को साफ करें।

- इसके अलावा पानी को ड‍िस्‍इंफेक्‍टेड करने के ल‍िए क्‍लोरिन टैबलेट का इस्‍तेमाल करें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Friday, July 5, 2024, 11:35 [IST]
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