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भारत में क्यों बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले? जानें इसके कारण, लक्षण, जांच और वैक्सीन के बारे में
Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) महिलाओं में होने वाले आम लेकिन गंभीर कैंसरों में से एक है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के अनुसार, भारत में हर 8 मिनट में एक महिला की सर्वाइकल कैंसर से मौत हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है। यह वह हिस्सा होता है, जो गर्भाशय को योनि से जोड़ता है। इसे आम भाषा में बच्चेदानी के मुंह का कैंसर भी कहते हैं। सर्वाइकल कैंसर तब होता है, जब सर्विक्स में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाती हैं। समय पर जांच व इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि, समय पर निदान और इलाज से सर्वाइकल कैंसर से जान बचाई जा सकती है। इसलिए सर्वाइकल कैंसर का समय पर जांच बहुत जरूरी है। सर्वाइकल कैंसर होने पर महिलाओं में कुछ लक्षण नजर आते हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो इलाज संभव हो सकता है। आपको बता दें कि साल 2022 में विश्व स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के 6 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे। वहीं, 3 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत हो गई। लोगों में सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल जनवरी माह को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ (Cervical Cancer Awareness Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। आज इस लेख में हम आपको सर्वाइकल कैंसर के लक्षण, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए टेस्ट और वैक्सीन के बारे में बताने जा रहे हैं। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम की सीनियर कंसल्टेंट - प्रसूति एवं स्त्री रोग, डॉ शैल्ली कपूर से बातचीत की -

सर्वाइकल कैंसर क्या है?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है। सर्वाइकल कैंसर का सबसे मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण है, जो यौन संपर्क के जरिए फैलता है। HPV के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह संक्रमण गुदा, जननांग क्षेत्र और त्वचा से एक-दूसरे को प्रभावित करता है। हालांकि, समय पर निदान और इलाज से सर्वाइकल कैंसर से जान बचाई जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण
सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी वजह से इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ लक्षण सामने आ सकते हैं, जैसे -
पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग
संभोग के दौरान या बाद में ब्लीडिंग या दर्द
असामान्य, बदबूदार या खून मिला योनि स्राव
पेट के निचले हिस्से या कमर में लगातार दर्द
बिना वजह वजन कम होना
अत्यधिक थकान
सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
स्क्रीनिंग का मतलब है बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही उसकी पहचान कर लेना। सर्वाइकल कैंसर में स्क्रीनिंग बेहद प्रभावी होती है क्योंकि यह कैंसर बनने से पहले होने वाले बदलावों को पकड़ लेती है। सर्वाइकल कैंसर के लिए सबसे आम स्क्रीनिंग टेस्ट हैं:
1. पैप स्मीयर टेस्ट
सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पैप स्मीयर टेस्ट एक बेहद आसान और दर्दरहित प्रक्रिया है। इसमें गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं का एक छोटा-सा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप की मदद से इसकी जांच की जाती है। इस टेस्ट की मदद से असामान्य तरीके से होने वाले पूर्व-कैंसर कोशिकाओं की पहचान की जाती है। पैप स्मीयर टेस्ट करवाने से सर्वाइकल कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है।
2. एचपीवी टेस्ट
एचपीवी टेस्ट के जरिए भी सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट में वायरस के हाई रिस्क वाले स्ट्रेन की जांच की जाती है, जो ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार होता है। नियमित रूप से एचपीवी टेस्ट करवाने से सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स भी महिलाओं को 30 की उम्र के बाद एचपीवी और पैप स्मीयर टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस टेस्ट की मदद से एचपीवी संक्रमण की जल्दी पहचान हो पाती है और रोगी को गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है।
कब करानी चाहिए स्क्रीनिंग?
21 साल की उम्र से महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट शुरू कर देना चाहिए।
21 से 29 साल की उम्र में हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है।
30 से 65 साल की महिलाओं के लिए हर 5 साल में HPV टेस्ट या हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट उपयुक्त माना जाता है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं को कोई लक्षण नहीं हैं, उनके लिए भी स्क्रीनिंग उतनी ही जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन क्यों जरूरी है?
HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारण HPV संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है। यह वैक्सीन शरीर में ऐसे एंटीबॉडी बनाती, है जो वायरस को कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने से रोकती हैं।
किसे लगवानी चाहिए वैक्सीन?
9 से 14 साल की लड़कियों के लिए HPV वैक्सीन सबसे प्रभावी होती है, क्योंकि इस उम्र में वायरस के संपर्क में आने की संभावना कम होती है। हालांकि, 15 से 45 साल तक की महिलाएं भी डॉक्टर की सलाह से यह वैक्सीन लगवा सकती हैं। शादीशुदा महिलाओं के लिए भी वैक्सीन फायदेमंद हो सकती है।
डोज कितनी होती हैं?
9 से 14 साल की उम्र में 2 डोज दी जाती हैं, जबकि 15 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए 3 डोज़ की आवश्यकता होती है। यह समझना जरूरी है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी नियमित स्क्रीनिंग बंद नहीं करनी चाहिए।
निष्कर्ष
सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे डरने की नहीं, बल्कि समझदारी से निपटने की जरूरत है। समय पर स्क्रीनिंग, HPV वैक्सीन और जागरूकता के जरिए इस कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, नियमित जांच कराएं और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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