Latest Updates
-
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा -
Bank Holidays October 2026: अक्टूबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
Pitru Paksha 2026 Food Rules: पितृपक्ष में क्या खाएं और क्या न खाएं? जानें खानपान से जुड़े जरूरी नियम -
Tanya Mishra: कौन हैं तान्या मिश्रा? अचानक कैसे बनीं देश की नई 'नेशनल क्रश', इंटरनेट पर तस्वीरें हो रहीं वायरल
Color Blindness: क्या होता है कलर ब्लाइंडनेस, जानिए इसके लक्षण, कारण और बचाव
कलर ब्लाइंडनेस किसी व्यक्ति में तब होता है जब वह रंगों को सामान्य तरीके से देखने में असमर्थ होता है। इसे कलर डेफिशिएंसी के रूप में भी जाना जाता है। कलर ब्लाइंडनेस आमतौर पर किसी को तब होता है जब उसे कुछ रंगों के बीच अंतर पहचानने में समस्या होती है। कलर ब्लाइंडनेस भी कई तरह के होते हैं कुछ लोगों में जहां कुछ रंगों को पहचानने में परेशानी होती है तो वहीं कुछ लोग पूरी तरह से कलर ब्लाइंड होते हैं, उन्हें सिर्फ काला और सफेद रंग ही नजर आता है।
कलर ब्लाइंडनेस की खोज जॉन डाल्टन नाम के एक अंग्रेज ने साल 1798 में की थी। खोज के दौरान वे कलर ब्लाइंडनेस से भी पीड़ित थे। उन्होंने कलर ब्लाइंडनेस के बारे में अपना पहला लेख लिखा, जो उनके अपने अनुभव पर आधारित था। ऐसे में आइए जानते हैं कलर ब्लाइंडनेस के कारण, लक्षण और इसके इलाज के बारे में...

कलर ब्लाइंडनेस के कारण
हेल्दी व्यक्ति के आंखों के रेटिना में दो लाइट - सेंसिटिव सेल्स होते हैं - रोड सेल्स और कोण सेल्स। रोड सेल्स कम रोशनी के लिए होती हैं और कोण सेल्स सामान्य और चमकदार रोशनी के लिए होती हैं और कलर विजन के लिए जिम्मेदार होती हैं। कलर ब्लाइंडनेस तब प्रभावित होता है जब ये दो लाइट-सेंसिटिव सेल्स अपना काम करने में नाकामयाब रहते हैं। ऐसे कई कारक हैं जो किसी भी व्यक्ति में कलर ब्लाइंडनेस की समस्या का कारण बनते हैं।
1. दिमाग, आंख या नर्व सेल्स को होने वाला नुकसान
2. जेनेटिक डिसऑर्डर
3. दवाओं का साइड इफेक्ट
4. तंबाकू और शराब का सेवन
कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण
1. लाल और हरे रंग के बीच अंतर करने में समस्या
यह कलर ब्लाइंडनेस का सबसे आम रूप है और इस प्रकार के कलर ब्लाइंडनेस वाले लोगों को लाल को हरे रंग से अलग करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
2. नीले और हरे रंग के बीच अंतर करने में मुश्किल
कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण में लोगों को नीले रंग को हरे रंग से अलग करने में परेशानी होती है। वो अक्सर नीले रंग को भी हरा ही देखते हैं।
3. रंगों के बीच अंतर करने में कठिनाई
कलर ब्लाइंडनेस वाले लोग कुछ रंगों के बीच के अंतर को पहचानने में अंतर होता है।
4. चमकीले रंगों के बीच अंतर न करना
कलर ब्लाइंडनेस वाले कुछ लोगों को चमकीले रंगों को एक-दूसरे से अलग बताने में परेशानी हो सकती है।
कलर ब्लाइंडनेस का इलाज
कलर ब्लाइंडनेस के इलाज में पेशेंट में कलर विजन की कमी को मापने के लिए कुछ टेस्ट होते हैं। इशिहारा प्लेट टेस्ट का उपयोग करके डॉक्टर कलर ब्लाइंडनेस का आसानी से इलाज कर सकते हैं।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
