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मानसून में बढ़ जाता है इन 6 बीमारियों का खतरा, जानिए बचाव के उपाय
Monsoon Health Tips: मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी तो लेकर आता है, लेकिन यह कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह भी बन सकता है। बारिश के दौरान जगह-जगह जलभराव, बढ़ी हुई नमी और दूषित पानी के कारण संक्रमण फैलाने वाले मच्छर, बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपने लगते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और कई अन्य संक्रामक बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे में, जरूरी है कि समय रहते सावधानी बरती जाए ताकि लक्षणों को जल्दी पहचानने, समय पर चिकित्सा सहायता लेने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सके। तो आइए, जानते हैं कि ऐसी 6 बीमारियों के बारे में, जिनका मानसून में खतरा बढ़ जाता है -

डेंगू
मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। यह बीमारी एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलती है, जो आमतौर परसाफ और जमा हुए पानी में पनपता है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स कम होने और रक्तस्राव का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं।
मलेरिया
बारिश के मौसम में मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलिस (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी और सिरदर्द शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
चिकनगुनिया
चिकनगुनिया भी मानसून में फैलने वाली प्रमुख बीमारियों में से एक है। यह भी एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इस बीमारी की सबसे खास पहचान तेज बुखार के साथ जोड़ों में होने वाला गंभीर दर्द है, जो कई दिनों या हफ्तों तक बना रह सकता है। इसके अलावा सिरदर्द, थकान और त्वचा पर रैशेज की समस्या भी हो सकती है। चिकनगुनिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के प्रजनन को रोकना और उनके काटने से बचना है।
लेप्टोस्पायरोसिस
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसका खतरा बरसात के मौसम में बढ़ जाता है। यह बीमारी संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में किडनी, लिवर या अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। इससे बचाव के लिए जलभराव वाले क्षेत्रों में नंगे पैर चलने से बचें और खुले घावों को ढककर रखें।
टाइफाइड
मानसून में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण टाइफाइड के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जाती है। यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) बैक्टीरिया से होती है। इसके सामान्य लक्षणों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और भूख कम लगना शामिल हैं। टाइफाइड से बचने के लिए साफ पानी पिएं, ताजा और स्वच्छ भोजन करें तथा बाहर का कटा हुआ या खुला खाना खाने से बचें।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस
मानसून के मौसम में गैस्ट्रोएंटेराइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसे अक्सर पेट का फ्लू भी कहा जाता है। दरअसल, मानसून में वातावरण में नमी के कारण भोजन जल्दी खराब हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में, कच्चा स्ट्रीट फूड, पहले से कटे फल या दूषित पेय पदार्थों के सेवन के बाद अक्सर पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। हालांकि, ज्यादातर मामले अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा खतरा रहता है।
मानसून में बीमारियों से बचने के लिए क्या करें?
मानसून में डेंगू, मलेरिया और टायफाइड से जैसी बीमारियों से बचने के लिए घर के आसपास किसी तरह का पानी जमा होने न दें।
स्ट्रीट फूड, पहले से कटे फल या कच्चे भोजन का सेवन करने से बचें।
बारिश में भीगने के बाद साफ पानी और साबुन से शरीर और बालों को अच्छे से धोएं। इससे इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए खाने में विटामिन-सी, कैल्शियम युक्त फूड आइटम को शामिल करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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