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HPV Testing Kits : एम्स ने लॉन्च की एचपीवी टेस्ट किट, सात तरह के कैंसर की होगी आसानी पहचान
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की ओर से स्वदेशी रूप से विकसित की गई एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टेस्ट किट अब सात से आठ प्रकार के सर्विकल कैंसर की पहचान करने में सक्षम होगी। यह किट न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रभावी है, बल्कि लागत के लिहाज़ से भी किफायती है, जो इसे भारत जैसे विकासशील देश के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाता है।
इस किट को एम्स के समन्वय में, नोएडा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR), नैशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (NIRRCH), मुंबई, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अंतर्गत इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के सहयोग से तैयार किया गया है। किट का आरटी-पीसीआर (RT-PCR) आधारित परीक्षण ट्रायल में 97.7% से 98.9% तक सटीक पाया गया है।

25% मौतें भारत में, स्क्रीनिंग पर ज़ोर
इस टेस्ट किट का औपचारिक शुभारंभ बुधवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली के सीडी देशमुख ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी (भारत) की उपाध्यक्ष और एम्स की पूर्व गायनेकोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. नीरजा भाटला ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में सर्विकल कैंसर से पीड़ित हर पांच महिलाओं में से एक भारतीय है और इस रोग से होने वाली कुल मौतों में 25% अकेले भारत में होती हैं।
पारंपरिक स्क्रीनिंग तकनीकों की सीमाएं
डा. भाटला ने आगे बताया कि वर्तमान में सर्विकल कैंसर की जांच के लिए विजुअल इंस्पेक्शन विद एसेटिक एसिड (VIA), पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी डीएनए टेस्टिंग जैसे तरीके प्रचलित हैं। लेकिन ये सभी या तो महंगे हैं या विशेषज्ञ प्रशिक्षण की आवश्यकता रखते हैं, जिससे आमजन तक इनकी पहुंच सीमित हो जाती है।
2030 तक 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि यदि 35 और 45 वर्ष की आयु में महिलाओं की दो बार हाई-क्वालिटी एचपीवी टेस्टिंग की जाए, तो यह सर्विकल कैंसर की रोकथाम में पर्याप्त साबित हो सकती है। इसी दिशा में काम करते हुए भारत ने 2030 तक 70% पात्र महिलाओं की स्क्रीनिंग करने का संकल्प लिया है।
कोविड-19 के बाद RT-PCR लैब्स का सशक्त नेटवर्क
कोविड-19 महामारी के दौरान देश भर में RT-PCR आधारित लैब्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब इन्हीं लैब्स के नेटवर्क का लाभ उठाकर इस एचपीवी टेस्ट किट को राष्ट्रीय कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में शामिल करना अधिक व्यावहारिक और प्रभावी हो गया है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग का सहयोग
इस परियोजना को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के ग्रैंड चैलेंजेज इंडिया (GCI) कार्यक्रम के तहत समर्थन प्राप्त है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र की जटिल समस्याओं के लिए नवीन समाधान प्रदान करना है। यह किट सर्विकल कैंसर की जांच के क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आई है और इससे लाखों महिलाओं को समय पर निदान और उपचार मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि इस बीमारी की स्क्रीनिंग के लिए विजुअल इंस्पेक्शन विद एसेटिक एसिड (वीआइए), पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीए डीएनए टेस्टिंग जैसे तरीके प्रचलित है, लेकिन ये सभी तरीके या तो महंगे हैं या फिर प्रशिक्षण की उच्च आवश्यकता रखते हैं।
आरटीपीसीआर आधारित है इसकी जांच
डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार, केवल दो बार 35 और 45 वर्ष की आयु में हाई क्वालिटी एचपीवी टेस्ट पर्याप्त होंगे। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030 तक 70 प्रतिशत पात्र महिलाओं की स्क्रीनिंग करने का संकल्प लिया गया है। इसकी जांच आरटीपीसीआर आधारित है।
कोविड-19 के बाद देश भर में आरटीपीसीआर आधारित प्रयोगशालाएं सशक्त हुई हैं, जिससे इन टेस्ट किट्स को राष्ट्रीय कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में शामिल करना और अधिक व्यावहारिक व प्रभावी बनता है। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआइआरएसी) के ग्रैंड चैलेंजेज इंडिया (जीसीआइ) कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में किट को तैयार किया गया है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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