Latest Updates
-
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ के बाद निमिषा सजयन ने ऐसे घटाया 14 किलो वजन, एक्ट्रेस ने शेयर की वेट लॉस जर्नी -
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व
डेंगू में हल्की सी चूक से बढ़ सकता है मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा, डॉक्टर से जानें इलाज और बचाव
देशभर में फिर से डेंगू का प्रकोप बढ़ गया है। बुखार के हर 100 में से 40 मामले डेंगू संक्रमण के निकल रहे हैं। डेंगू को लेकर एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आप बुखार आने के चार पांच दिन तक डेंगू का टेस्ट नहीं कराते हैं और रिपोर्ट निगेटिव आती है लेकिन फिर भी संक्रमण के लक्षण दिखाए दें, तो ऐसे में खतरा और बढ़ जाता है।
इसके अलावा डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स चढ़ाना ही सिर्फ इसका इलाज नहीं हैं। डेंगू के इलाज में लापरवाही करने पर मरीज मल्टी ऑर्गन फेलियर की ओर बढ़ने लगता है। ऐसे में सही जानकारी से डेंगू के खतरे को टाला जा सकता है।
रांची के ऑर्किड हॉस्पिटल के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉक्टर अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने बढ़ते डेंगू के मामलों को देखते हुए बताया हैं कि संक्रमण के बीच हमें डेंगू से जुड़े मिथकों को दरकिनार करते हुए किन बातों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और कैसे इसके परिणाम गंभीर होने से रोक सकते हैं।

प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन ही डेंगू का एकमात्र इलाज है?
कई लोगों का मानना हैं कि डेंगू होने पर इसका फर्स्ट लाइन ऑफ ट्रीटमेंट सिर्फ प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन ही होता है। जबकि यह सही नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय दिशा निर्देशों के अनुसार जब तक प्लेटलेट काउंट दस हज़ार के नीचे नहीं गिर जाता या फिर स्वतः/सक्रिय रक्तस्राव न हो तब तक प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता ही नहीं होती है। बेवजह अनावश्यक प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन से भी मरीज की तबीयत बिगड़ सकती हैं।
डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स ही गिरती हैं?
डेंगू को केवल प्लेटलेट्स की कमी से जोड़कर देखते हैं।
जबकि ऐसा नहीं हैं। इलाज में लापरवाही के चलते मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी स्थिति भी बन सकती है। अंदरुनी कोशिकाओं में ब्लीडिंग की वजह से मरीज मल्टी ऑर्गन फेलियर की स्थिति में पहुंच जाता है। इस अवस्था में दिल, लीवर, किडनी और लंग्स पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
डॉक्टर अभिषेक श्रीवास्तव की मानें तो इस समय वायरल बुखार के साथ डेंगू के मरीज भी मिल रहे हैं। ऐसे में समय पर जांच कराना जरूरी है, ताकि बीमारी स्पष्ट हो सके। साधारण डेंगू के अलावा बुखार में भी प्लेटलेट्स कम होती हैं, जो कि थोड़े वक्त बाद बढऩे भी लगती हैं। गंभीर स्थिति होने पर मरीज का बीपी लो हो जाता है। मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के लिए कौनसा टेस्ट करवाना चाहिए?
डेंगू का पता लगाने के लिए NS1 एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए, यह 3 से 4 दिन के फीवर को ही पकड़ पाता है। इस टेस्ट का रिजल्ट एक्यूरेट आता है। अगर इस टेस्ट को कराने के बाद रिजल्ट नेगेटिव आता है, तो सावधानी के तौर पर दोबारा इस टेस्ट को करना चाहिए।

डेंगू का लक्षण सामान्य बुखार की तरह होते हैं?
डेंगू बुखार एक दर्दनाक वायरल बुख़ार है जो कि संक्रमित मादा एडीस एजिप्टी मच्छर के काटने से फ़ैलता है। यह चार प्रकार के डेंगू वायरस में से किसी एक के कारण होता है। डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, त्वचा पर हल्के लाल चकत्ते, खांसी होना माथे और आंखों के पीछे एवं जोड़ों में दर्द शामिल हैं। हालांकि, कुछ लोगों को त्वचा पर लाल और सफेद धब्बेदार चकत्ते हो सकते हैं, जिसके बाद भूख में कमी, मिचली, उल्टी आदि हो सकती है। गंभीर स्थिति होने पर ब्लडप्रेशर लो हो जाता है।
डेंगू का घरेलू इलाज
डेंगू से पीड़ित मरीजों को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, आराम करना चाहिए और खूब सारे तरल पदार्थ पीने चाहिए। बुखार कम करने और जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामोल लिया जा सकता है। लेकिन एस्पिरिन, आईबुप्रोफेन, निमेसुलाइ जैसी दवाईयों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि वे ब्लीडिंग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डेंगू के घरेलू उपचार में मरीज को खूब सारा पानी और तरल पदार्थ का सेवन कराना चाहिए।
डेंगू से बचाव
डॉक्टर के मुताबिक डेंगू के मच्छर केवल दिन के वक़्त ही काटते हैं। डेंगू के 1% से भी कम मामलों में जटिलताओं का जोखिम होता है और इसके लक्षणों के बारे में पहले से ही मालूम हो, तो डेंगू से होने वाली सभी मौतों को टाला जा सकता है। डेंगू का लार्वा जमे हुए साफ़ पानी में पनपता है अतः अपने घर के आसपास पानी जमा न होने दें या जमे हुए पानी के ऊपर कम से कम मिट्टी तेल डाल दें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
