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डेस्क जॉब, ज्यादा कसरत और नींद की कमी से बढ़ रही पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या, डॉक्टर्स ने दी यह खास सलाह
आजकल पुरुषों में इनफर्टिलिटी यानी बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, तनाव, लंबे समय तक काम करना और प्रदूषण है। जहां पहले इनफर्टिलिटी को महिलाओं की समस्या माना जाता था, वहीं अब डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या पुरुषों में तेजी से बढ़ रही है। करीब 30% मामलों में तो बांझपन सिर्फ पुरुष कारणों से होता है। पिछले 6 वर्षां में इसमें 20-25% की वृद्धी हुई हैं। 31-35 साल के पुरुषों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। इसमें आईटी सेक्टर के लोग और बिजनेसमैन आगे हैं, क्योंकि उन पर काम का तनाव ज्यादा होता है, उनकी नींद खराब रहती है, वे लंबे समय तक लैपटॉप के सामने बैठे रहते हैं, जिससे कमर और गुप्तांग के पास गर्मी बढ़ जाती है और हार्मोन बिगड़ते हैं।

लाइफस्टाइल, जिम कल्चर और सप्लीमेंट्स भी कारण
फास्ट फूड, मोटापा, नींद की कमी, प्रदूषण और बिना ट्रेनर के किए जाने वाले जिम वर्कआउट भी पुरुषों में बांझपन का कारण बन सकते हैं। लगभग 10-15 % पुरुषों में पता चलता है कि वे ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाउडर, स्टेरॉयड या एनर्जी ड्रिंक लेते हैं, जो हार्मोन गड़बड़ा देते हैं और स्पर्म की संख्या कम कर देते हैं।
कई जगहों पर बांझपन का एक बड़ा कारण बार-बार होने वाले प्राइवेट पार्ट के संक्रमण हैं। यह अक्सर हाइजीन की कमी, जानकारी का अभाव और समय पर डॉक्टर के पास न जाने की वजह से होते हैं। महिलाओं में होने वाले आम संक्रमण जैसे, बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यीस्ट इंफेक्शन, ट्राइकोमोनियासिस (यौन संबंध से फैलने वाला संक्रमण), और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, अगर इनका इलाज समय पर न हो, तो ये गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब तक फैल जाते हैं और गर्भ ठहरने में दिक्कत हो सकती हैं। अगर पति-पत्नी संक्रमण के दौरान भी संबंध बनाते हैं, तो यह संक्रमण पुरुषों तक पहुंच जाता है। इससे पुरुषों में दर्द, स्पर्म की संख्या और गति कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए समय पर इलाज न करवाना और संक्रमण के दौरान संबंध बनाना यह दोनों बांझपन के बडे कारण हैं।
वर्तमान समय में करीब 25-30% पुरुषों में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां जैसे मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी और वैरिकोसील देखी जा रही हैं। इनमें से डायबिटीज और मोटापा सबसे आम हैं, जो सीधे स्पर्म की गुणवत्ता, गति और आकार को प्रभावित करते हैं। एक और समस्या यह है कि केवल 10-15 % पुरुष ही खुद पहल कर के फर्टिलिटी चेकअप के लिए आते हैं। नाइट शिफ्ट, खराब नींद, और बिगड़ा हुआ बायोलॉजिकल क्लॉक हार्मोनल संतुलन बिगाड़ते हैं और फर्टिलिटी पर असर डालते हैं। स्पर्म फ्रीजिंग की प्रैक्टिस अभी बहुत कम है और अधिकतर कैंसर के इलाज या कीमोथेरेपी से पहले ही की जाती है। देर से शादी या करियर प्लानिंग की वजह से स्पर्म फ्रीजिंग करने वाले पुरुष बहुत कम हैं। आने वाले 5 वर्षों में बढ़ता तनाव, इनएक्टिव लाइफस्टाइल, डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा इन सबके कारण पुरुषों की फर्टिलिटी के पैरामीटर और खराब होने की संभावना होती है।
मदरहुड फर्टिलिटी और आईवीएफ केंद्र के फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. मंदावी राय ने कहा, "पिछले कुछ सालों में, खासकर 30-35 साल के युवाओं में, पुरुषों में बांझपन बहुत बढ़ रहा है। तनाव वाला काम, देर तक बैठकर काम करना, नाइट शिफ्ट और अनियमित खाना ये सभी चीजें स्पर्म की संख्या, उसकी गति और उसके आकार को खराब करती हैं। स्पर्म कम होना, स्पर्म की गति धीमी होना, स्पर्म का गलत आकार, हार्मोन का बिगड़ना और यौन इच्छा कम होना यह पुरुषों में फर्टिलिटी की आम समस्या हैं। अनियमित काम के घंटे, थकान और तनाव से पुरुषों की यौन इच्छा कम हो जाती है, जिससे सही समय पर संबंध नहीं बन पाते। कई पुरुष इस बात को समझ नहीं पाते कि शराब, सिगरेट, टाइट कपड़े, लैपटॉप की गर्मी और कम नींद स्पर्म को काफी कमजोर कर देते हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि बहुत कम पुरुष खुद से फर्टिलिटी चेकअप करवाने आते हैं। अगर समय पर वीर्य जांच, हार्मोन जांच और लाइफस्टाइल सलाह ले ली जाए, तो ज्यादातर समस्याएं जल्दी पकड़ में आ जाती हैं और उनका इलाज भी आसानी से हो सकता है।"
आजकल लोग करियर और पैसे को महत्व देने की वजह से शादी और बच्चे होने में देर कर रहे हैं। लेकिन अभी भी बहुत कम लोगों को स्पर्म या एग फ्रीजिंग के बारे में जानकारी है, जबकि यह भविष्य की प्लानिंग में मदद कर सकता है। पुरुषों में बांझपन का एक बड़ा कारण तनाव, थकान और अनियमित काम के घंटे हैं। इससे पुरुषों की यौन इच्छा कम हो जाती है और सही समय पर संबंध नहीं बन पाते। ऐसे कारण लगभग 30-40% बांझपन मामलों में दिखाई दे रहे हैं, खराब स्पर्म क्वालिटी के साथ। अगर दंपतियों को सही सलाह दी जाए जैसे तनाव कम करना, सही समय पर संबंध बनाना, और रिश्ता बेहतर बनाना तो उनके प्रेग्नेंसी के चांस बढ़ जाते हैं। शहरों में लोग पुरुष बांझपन को समझने लगे हैं, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में अभी भी शर्म, डर और मानने से इनकार देखने को मिलता है। परिवार के बड़े लोग भी कई बार पुरुष कारण को स्वीकारने नहीं देते, जिससे इलाज देर से होता है।
दिल्ली स्थिती नोवा आईवीएफ केंद्र के डॉ. पारुल गुप्ता खन्ना ने कहा, "आज की लाइफस्टाइल का पुरुषों की फर्टिलिटी पर सीधा असर पड़ रहा है। 35 साल से कम उम्र के कई पुरुषों में हम देखते हैं कि उनका स्पर्म कमजोर है। तनाव, देर रात मोबाइल का उपयोग करना, लैपटॉप की गर्मी और शराब और सिगरेट का सेवन करना इसका कारण हैं। लेकिन अच्छी नींद, रोज़ थोड़ा व्यायाम, हेल्दी खाना और सही सप्लीमेंट का सेवन करे तो सेहत में सुधार आ सकता है। अगर पुरुष जल्दी टेस्ट करवा लें, जैसे वीर्य जांच (semen analysis), तो समस्या जल्द पकड़ में आ जाती है और आसानी से ठीक हो सकती है। कई पुरुष सोचते हैं कि फर्टिलिटी की समस्या सिर्फ महिलाओं में होती है। लेकिन यह गलत है। लगभग 40% मामलों में समस्या पुरुष की होती है। जब पुरुष अपनी डाइट सुधारते हैं, शरीर को गर्मी से बचाते हैं और तनाव कम करते हैं, तो स्पर्म कुछ ही महीनों में बेहतर हो जाता है। जिंक, CoQ10 और एंटीऑक्सीडेंट जैसे सप्लीमेंट तभी असर दिखाते हैं जब लाइफस्टाइल भी अच्छी हो। समय पर जांच और सही आदतें अपनाकर ज्यादातर पुरुष अपनी फर्टिलिटी काफी बढ़ा सकते हैं।"
डॉ. मंदावी ने आगे कहा, "शहरों में बांझपन का मुख्य कारण तनाव, बैठे-बैठे रहने की आदत, मोटापा और प्रदूषण है। लेकिन सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर बांझपन का कारण ऐसे संक्रमण हैं जिन्हें आसानी से रोका जा सकता है। महिलाओं में होने वाले बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यीस्ट इंफेक्शन, ट्राइकोमोनियासिस या PID अगर इलाज न हो, तो यह पुरुषों को संबंध के दौरान लग सकता है। इससे यूरेथ्राइटिस, एपिडिडीमाइटिस और स्पर्म की कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। एक और बढ़ती समस्या है बिना नियंत्रण वाले जिम सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का इस्तेमाल। ऐसे आर्टिफिशियल बूस्टर शरीर के प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन को बिगाड़ देते हैं और स्पर्म बनना बंद भी हो सकता है। हल्का और नियमित व्यायाम अच्छा है, लेकिन सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के कभी नहीं लेने चाहिए। इसके लिए नियमित संतुलित आहार का सेवन करें, तनाव कम करें, अच्छी नींद ले, शराब और सिगरेट से दूर रहें और सबसे जरूरी सालों तक इंतजार न करें नियमित जांच करवाएं।"
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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