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जानिये मधुमेह से जुडे तथ्य व मिथक

मधुमेह एक संक्रामक रोग है। मीठे का अधिक सेवन मधुमेह के रोग का कारण बन सकता है। मधुमेह के मरीज़ कभी मीठा नहीं खा सकते। अगर आपके वंश में कोई मधुमेह से पीडित नहीं था फिर आपको भी यह रोग नहीं होगा। इंसुलिन से मधुमेह का इलाज हो सकता है। अतः, इस तरह इन मिथकों की सूची बढ़ती जाएगी। टाइप टू मधुमेह क्या है और इससे कैसे बचें?
क्या आप मधुमेह से जुडे तथ्य एवं मिथक कथाओं के बीच के अंतर को जानते हैं ? अगर नहीं, तो आप भी उन मधुमेह रोगियों में से एक हैं जो इन मिथकों की विशाल सूची में खो गए हैं। अतः, स्वयं को मधुमेह के तथ्यों से परिचित कराएं ताकि अगली बार आप स्वास्थ्य संबंधित विषयों में सही निर्णय ले सकें।

1 मिथक: मीठे का अधिक सेवन मधुमेह का कारण बन सकता है
तथ्य: टाइप 1 मधुमेह, अग्न्याशय में इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं के विनाश के कारण होता है तथा मीठे का अधिक सेवन मधुमेह के रोग का कारण नहीं है। जब इंसुलिन में सामान्य रुप से प्रतिक्रिया देनी की क्षमता नहीं रहती तो यह टाइप 2 मधुमेह का कारण बनता है। ज्यादातर मामलों में टाइप 2 मधुमेह आनुवंशिक कारणों से होता है। परंतु नियमित व्यायाम एवं प्लैंड डाइट की मदद से मधुमेह के रोगी सीमित मात्रा में मिठाई खा सकते हैं।

2 मिथक: मधुमेह एक संक्रामक रोग है
तथ्य: मधुमेह एक संक्रामक रोग नहीं है। मधुमेह एक अंतःस्रावी ग्रंथि से जुडी बीमारी है जोकि अग्न्याशय में बीटा कोशिकाओं द्वारा निर्मित अधिक इंसुलिन के कारण जन्म लेती है। मधुमेह पीढ़ी दर पीढ़ी फैलने वाली एक बीमारी है।

3 मिथक: मधुमेह के रोगी कभी मीठा नहीं खा सकते
तथ्य: मधुमेह के रोगियों को कार्बोहाइड्रेट को पचाने में बड़ी मुश्किल होती है, जिसका प्रभाव उनके पूरे शरीर पर पड़ता है। मधुमेह के रोगियों को मीठे का सेवन बहुत नियमित रुप से करना चाहिए तथा उन्हें सही समय पर दवा लेने की एवं कसरत करने की आवश्यकता है। ऐसे आपका स्वस्थ व शर्करा का स्तर भी बना रहेगा तथा आप इस बीमारी की जटिलता से भी बचे रहेंगे।

4 मिथक: मधुमेह से परेशान बच्चों को मिठा कभी नहीं खाना चाहिए
तथ्य: मधुमेह से परेशान बच्चे संतुलित रुप से अपने आहार में मीठे का सेवन कर सकते हैं लेकिन उन्हें कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा को भी नियंत्रित करने की जरूरत है। क्योंकि मिठाई में कैलोरी के अलावा अन्य कोई पोषण तत्व नहीं होता, इस डर से इसका सेवन ना करने के बजाय नियंत्रित रुप से करें।

5 मिथक: थोड़ा सा कंट्रोल करने पर आपको चेकअप की जरुरत नहीं पडेगी
तथ्य: मधुमेह एक गंभीर बीमारी है। इसे काबू में करने के लिए आपको नियमित आहार व कसरत के साथ-साथ दवा लेने की भी जरूरत है। आप भले ही शर्करा के स्तर को बनाए रखने में सफल हो जाएं लेकिन यह चेक अप से बचने का कोई कारण नहीं है।

6 मिथक: रोगियों को अपने रक्त शर्करा का स्तर बढता या घटता महसूस हो सकता है
तथ्य: चेक अप, रक्त शर्करा के स्तर को मापने का एक मात्र विकल्प है। रक्त शर्करा के स्तर के बढने या घटने से रोगी को थकान, कमजोरी एवं प्यास लगती है। लेकिन कुछ रोगियों में ये लक्षण भी दिखाई नहीं देते। चूंकि, बढते व घटते शर्करा के स्तर से सामने आने वाले शारीरिक लक्षण एक दूसरे से मेल खाते हैं। इसलिए रक्त शर्करा के स्तर को जांचने के बाद ही आप बीमारी को जन पाएंगे।

7 मिथक: रक्त शर्करा का बढ़ता स्तर एक सामान्य बात है तथा ये मधुमेह के संकेत नहीं हैं
तथ्य: कभी भी रक्त शर्करा का बढ़ता स्तर सामान्य नहीं होता। कुछ दवाइयों से मधुमेह रहित लोगों का रक्त शर्करा स्तर बढ़ सकता है। लेकिन जिन लोगों का रक्त शर्करा का स्तर सामान्य स्तर से अधिक है, उन्हें तुरंत अपने डॉक्टर के पास जा कर मधुमेह की जांच करनी चाहिए।

8 मिथक: मधुमेह की बीमारी 'मामूली' रुप से भी हो सकती है
तथ्य: मधुमेह कभी भी 'मामूली' रुप से नहीं होता। शरीर में इसके कुछ लक्षण इस बात के संकेतक हैं कि आप मधुमेह की चपेट में आ चुके हैं। टाइप 1 तथा टाइप 2 मधुमेह चिकित्सा एवं संतुलित जीवन शैली की मांग करते हैं।

9 मिथक: यदि वंश में किसी को भी मधुमेह की बीमारी नहीं हुई तो आपको भी नहीं होगी
तथ्य: कुछ परिवारों को मधुमेह की बीमारी विरासत में मिलती है, अतः उनमें इस बीमारी के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन आज कल कई लोग आनुवंशिक कारणों से नहीं बल्कि बढते वजन एवं बदलती जीवन शैली के कारण मधुमेह के शिकार हो रहे हैं।

10 मिथक: मधुमेह को नियंत्रित करना आसान नहीं है
तथ्य: चयापचय का विकार मधुमेह की बीमारी का कारण है तथा इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। लेकिन रोगी करसत, सही आहार तथा दवा खा कर इस बीमारी को नियंत्रित कर सकता है। सही मार्गदर्शन एवं शिक्षा के साथ, रोगी मधुमेह के रोग से जन्म लेने वाली कई गंभीर समस्याओं को रोक सकता है।

11 मिथक: इंसुलिन से मधुमेह का इलाज हो सकता है
तथ्य: इंसुलिन से मधुमेह का उपचार नहीं होता बल्कि यह बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करता है। ऊर्जा के उत्पादन के लिए इंसुलिन शरीर में मौजूद ग्लूकोज का उपयोग करता है। इस तरह इंसुलिन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखता है, परंतु यह बीमारी के पीछे छुपे कारणों को मिटा नहीं सकता।

12 मिथक: मधुमेह के रोगियों को हर रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पडता है
तथ्य: टाइप 1 मधुमेह के रोगियों को हर रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पडता है क्योंकि उनका अग्न्याशय इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है। लेकिन टाइप 2 मधुमेह के रोगियों को रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए गोलियों के साथ या गोलियों के बिना इंसुलिन के इंजेक्शन को लेना की जरुरत पडती है।

13 मिथक: मधुमेह के उपचार में गोलियाँ भी इंसुलिन का एक रूप हैं
तथ्य: मौखिक रूप से ली जाने वाली दवा इंसुलिन का कोई रूप नहीं होती। इंसुलिन एक प्रोटीन है जोकि पेट एवं आंतों में मौजूद पाचन एंजाइम व एसिड द्वारा पेट में घुल जाता है। इसलिए, इंसुलिन को कवल इंजेक्शन, इनहेलर या पैच के माध्यम से दिया जा सकता है।

14 मिथक: इंसुलिन के अधिक इंजेक्शन अर्थात मधुमेह का बदतर होना
तथ्य: आहार, व्यायाम व दिन का पहर भी शर्करा के स्तर को प्रभावित करने वाले कारक बन सकते हैं। इसलिए, रोगी के रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने हेतु उसे दिन में कई बार इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने पडते हैं। आपका डॉक्टर आपको इससे संबंधित पूरी जानकारी देगा।

15 मिथक: बच्चों में मधुमेह विकट रुप धारण कर सकता है
तथ्य: बच्चों में मधुमेह विकट रुप धारण नहीं करता। टाइप 1 मधुमेह में इंसुलिन का उत्पादन करने वाली अग्न्याशय की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं तथा नष्ट होने के बाद वे फिर कभी इंसुलिन का उत्पादन नहीं करती। टाइप 1 मधुमेह से पीडित बच्चों को हमेशा इंसुलिन की जरुरत होती है।



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