Latest Updates
-
सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से दूर होंगी ये 5 समस्याएं, जानें इसे बनाने का तरीका -
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
फैटी लिवर में कौन सा योग करें? जानें लिवर को साफ और मजबूत रखने के लिए योगासन -
May 2026 Vrat Tyohar: वट सावित्री, शनि जयंती सहित मई माह में पड़ रहे हैं कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट -
Swapna Shastra: सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का क्या मतलब होता है? जानें ये शुभ होता है या अशुभ -
Bael Juice Benefits: गर्मियों में रोजाना पिएं एक गिलास बेल का जूस, सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे -
Who Is Divyanka Sirohi: कौन हैं एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही? जिनका 30 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हुआ निधन -
Kedarnath Yatra 2026: केदारनाथ यात्रा आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन से हेलीकॉप्टर बुकिंग तक जानें सभी जरूरी नियम -
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह करें केले के छिलके का इस्तेमाल, कुछ ही दिनों में घुटनों तक लंबे हो सकते हैं बाल -
दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट
आहार में लाएं विविधता, रहें सेहतमंद
(आईएएनएस)| एक शोध में कहा गया है कि आपका आहार जितना विविधतापूर्ण होगा, आपके देर तक स्वस्थ बने रहने की संभावनाएं उतनी ही बेहतर होंगी।
अमेरिका की जैव प्रौद्योगिकी कंपनी 'माइक्रोबायोम थेराप्यूटिक्स' के उपाध्यक्ष एवं मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी मार्क हीमन ने कहा कि बीते 50 वर्षो के दौरान आहार विविधता की कमी मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल तकलीफें और अन्य बीमारियां बढ़ने की मुख्य वजह हो सकती है।
READ: मॉनसून में क्यूं नहीं खानी चाहिये पत्तेदार सब्जियां?

हीमन ने कहा कि हमारे पेट के बैक्टीरिया को बेहतर तरीके से काम करने के लिए विविधतापूर्ण आहार की जरूरत होती है।
मौजूदा कृषि पद्धतियों के साथ ही जलवायु परिवर्तन ने उस आहार विविधता को नुकसान पहुंचाया है। दुनिया की करीब 75 फीसदी आबादी महज पांच पशु प्रजातियों और 12 पौध प्रजातियों या किस्मों का सेवन कर रही है।
READ: आपकी यौन छमता को दोगुना बढ़ा सकते हैं ये 20 आहार
हीमन ने शिकागो में इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी (आईएफटी) द्वारा आयोजित 'आईएफटी15 : वेयर साइंस फीड्स इनोवेशन' में एक विचार-गोष्ठी में कहा कि उन 12 प्रजातियों या किस्मों में से चावल, मक्का और गेहूं सभी कैलोरी में 60 फीसदी योगदान देते हैं।
हीमन ने कहा, "किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र की तरह प्रजातियों में सर्वाधिक अलग वह है, जो स्वास्थ्यकर है।"
उन्होंने कहा, "अब तक बीमारी की जिन भी अवस्थाओं का अध्ययन किया गया है, करीब-करीब प्रत्येक अवस्था में सूक्ष्म जैव तंत्र (माइक्रोबायोम) ने आहार विविधता खो दी। कुछ ही प्रजातियों का प्रभुत्व दिखाई पड़ता है।"
हीमन ने अपने शोध में पाया कि प्री-डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में इन रोगों से रहित लोगों की तुलना में एक अलग माइक्रोबायोम रूप है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications