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जानिये खाने पीने और पोषक तत्वों से जुड़े 5 मिथक और उनकी सच्चाई
आज के समय में हर कोई यही चाहता है कि वो कभी बीमार ना पड़े और लम्बी ज़िन्दगी जिए। इसके लिए ही लोग रोजाना एक्सरसाइज करते हैं डाइट में हेल्दी चीजों को शामिल करते हैं और अपनी लाइफस्टाइल में जितना हो सके उतना बदलाव लाते हैं।
स्वस्थ रहने के लिए डाइट में बदलाव लाना बहुत ज़रूरी है और इसके लिए उन चीजों का सेवन ज्यादा करें जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा हो।

हालांकि आपको बता दें कि अभी भी हमारे समाज में खाने पीने को लेकर कई तरह के मिथक हैं जिनपर लोग आँख मूंदकर विश्वास करते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में बता रहे हैं।

मिथक 1 : सोया, मीट से ज्यादा हेल्दी होता है:
शाकाहारी लोग रोजाना के लिए ज़रूरी प्रोटीन की मात्रा हासिल करने के लिए सोया प्रोडक्ट का ज्यादा सेवन करते हैं क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इन लोगों का ये भी कहना है कि सोया में मीट से भी ज्यादा प्रोटीन होता है और इसलिए इसे सबको खाना चाहिये। यह बात पूरी तरह गलत है। आपको बता दें कि सोया में ग्लाईफोसेट और सायटोएस्ट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है और इनका मिश्रण शरीर के हार्मोन साइकिल को प्रभावित करता है।

मिथक 2 : केल, हरी सब्जियों से ज्यादा फायदेमंद है।
हाल के कुछ सालों में पूरी दुनिया में केल का सेवन करने वाले लोगों की तादात बढ़ गयी है और इन लोगों का मानना है कि इस सब्जी में हरी सब्जियों से ज्यादा मात्रा में पोषक तत्व और मिनरल्स हैं। आपको बता दें कि यह बात पूरी तरह सच नहीं है। हाँ ये ज़रूर है कि केल में पोषक तत्व और मिनरल्स पाए जाते हैं लेकिन अगर हम इसकी तुलना पालक, मेथी या अन्य हरी सब्जियों से करें तो उनमें पोषक तत्वों की मात्रा केल से कई गुना ज्यादा होती है।

मिथक 3 : नमक हमेशा शरीर के लिए नुकसानदायक है :
आपने कई लोगों के मुंह से यह सुना होगा कि टेबल साल्ट का सेवन नहीं करना चाहिये इससे तमाम तरह की बीमारियां होती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। आपको बता दें कि यह बात पूरी तरह सच नहीं है बल्कि नमक का ज़रूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है। इसी वजह से कई लोग टेबल साल्ट की बजाय सी साल्ट खाने की सलाह देते हैं। सी साल्ट में मैग्नीशियम और सोडियम की उतनी मात्रा नहीं होती है जितनी टेबल साल्ट में होती है और ये दोनों यौगिक हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन ज़रूर करें।

मिथक 4: वजन कम करने के लिए लो फैट फूड्स ही खाना चाहिये:
वजन कम करने वाले और जिम जाने वाले कई लोगों को आपने देखा होगा कि वे हमेशा लो फैट वाली चीजें खाते रहते हैं। आपको बता दें कि यह बात पूरी तरह गलत है कि लो फैट चीजें खाने से वजन कम होता है। बाज़ार में मिलने वाली कई चीजें जो लो फैट होने का दावा करती हैं उनमें मैल्टोडेक्सट्रिन नामक यौगिक मिलाया जाता है। यह यौगिक कार्बोहाइड्रेट और सिंथेटिक शुगर का मिश्रण होता है जो उल्टा आपका वजन बढ़ाने लगता है। इसलिए बाज़ार में बिकने वाली लो फैट चीजों को फायदेमंद समझकर उनका सेवन न करें।

मिथक 5 - फ़ूड इनसेंसिटिविटी के कारण वजन बढ़ता है:
ऐसे लोग जो ग्लूटेन या लैक्टोज सेंसिटिव होते हैं उनका मानना है कि ये चीजें शरीर में ठीक से विघटित नहीं हो पाती हैं और इसी वजह से उनका वजन बढ़ने लगता है। आपको बता दें कि यह बात पूरी तरह गलत है। हाँ इतना ज़रूर है कि आपका शरीर अगर इस तरह के खाद्य पदार्थों को विघटित नहीं कर पाता है तो आपको अपच या पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं लेकिन वजन बढ़ने से इसका कोई लेना देना नहीं है।



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