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हम सभी फिट और स्वस्थ रहना चाहते हैं लेकिन बदलते मौसम में ऐसा संभव हो पाना काफी मुश्किल होता है। मौसम बदलने या गर्मी ज्यादा पड़ने पर हम बीमार पड़ जाते हैं और अपच, एसिडिटी वगैरह तो जैसे रोज़ की मुसीबत बन गई हैं।
न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर का कहना है कि हम तभी स्वस्थ रह सकते हैं जब हम पूरी तरह से अपनी संस्कृति को अपनाएं। भारत में प्राचीन समय में ऐसी कई आदतें हुआ करती थीं जो सेहत के लिए उत्तम मानी जाती थीं लेकिन अब लोगों ने इनसे काफी दूरी बना ली है। आज इस लेख के ज़रिए हम आपको भोजप के तीन नियमों के बारे में बताने जा हैं जो आपको स्वस्थ रहने में मदद करेंगे।

फर्श पर बैठकर खाना खाएं
फर्श पर पैरों (सुखासन) को क्रॉस कर के बैठना हमारे जोड़ों के लिए सबसे अच्छी चिकित्सा है। जब आप इस स्थिति में बैठते हैं तो आपकी रीढ़ खुद को संरेखित करती है, पीठ की मांसपेशियां खुद को संलग्न करना सीखती हैं, पेल्विक के जोड़ खुलना सीखते हैं और इस सबसे शरीर में स्थिरता, खिंचाव और शक्ति आती है। यही कारण है कि यह ध्यान और प्रार्थना के लिए सबसे पसंदीदा मुद्रा है। भारत में तो खाना खाने के लिए भी इसी मुद्रा में बैठा जाता है।
स्वस्थ और फुर्तीले रहने के लिए रीढ़ की हड्डी का स्थिर होना बहुत जरूरी है और इस मुद्रा में बैठने से ऐसा संभव हो सकता है। पेल्विक जोड़ों में लचीलापन होने से शरीर में किसी भी अंग या मांसपेशी में खिंचाव या टूटने की संभावना कम रहती है। बैठने पर पैर के तलवे पेट तक रक्त प्रवाह करते हैं, जिससे पाचन ठीक होता है।

गैजेट्स से दूरी बनाएं
खाना खाते समय सभी गैजेट बंद कर दें, चाहे वह फोन, आईपैड, टीवी या लैपटॉप हो। इन चीज़ों के साथ न केवल आपका मोटापा जुड़ा है बल्कि गलत खानपान का भी इससे संबंध है। टीवी देखते हुए खाना खाने के कई नुकसान हैं, जैसे कि-
- एक बच्चे के कमरे में टीवी होने से उसे एक कार्डियोमेटोबोलिक, हृदय रोग, मोटापे और शारीरिक कार्य कम करने का खतरा रहता है।
- जो बच्चे भोजन करते समय टीवी देखते हैं, वे मीठे पेय पदार्थों की मांग ज्यादा करते हैं, जिससे भविष्य में उनके स्वास्थ्य को खतरा बढ़ जाता है।
- अगर लड़कियां भोजन के दौरान टीवी देखें तो इससे उनके शरीर की छवि बिगड़ सकती है।
- अत्यधिक टीवी देखने से परिवार में दूरी बढ़ती है।
- एक दिन में 30 मिनट से अधिक टीवी या किसी भी स्क्रीन को नहीं देखना चाहिए (असाइनमेंट, होमवर्क और अन्य काम को छोड़कर)। अपने परिवार के साथ भोजन करने से भी परिवार मजबूत होता है।

हाथों से करें भोजन
जब आप भोजन करें, तो कोई और काम न करें। हाथों से भोजन करें, सुगंध को सूंघें और खाना धीरे-धीरे चबाएं एवं स्वाद का आनंद लें। भोजन करते समय सभी इंद्रियों को केंद्रित करने से भोजन आसानी से पच जाता है। इस तरह आप अपने शरीर की जरूरत के अनुसार भोजन करते हैं। शारीरिक रूप से बात करें तो लेप्टिन नामक हार्मोन पूर्ण रूप से संवेदीनशील होने पर आपके मस्तिष्क को संकेत देता है। इंसुलिन प्रतिरोध की तरह ही लेप्टिन प्रतिरोध मोटापे और अन्य गैर-संचारी रोगों का एक बड़ा कारण है। उपसइस तरह आप इन तीन बातों को ध्यान में रखकर स्वस्थ रह सकते हैं। ये कुछ आदतें हैं तो भारत में प्राचीन समय से चली आ रही हैं लेकिन अब आधुनिक समय में लोग इन्हें भूलते जा रहे हैं। हालांकि, तब भी इनके फायदे कम नहीं हुए हैं। अगर आप भी स्वस्थ रहना चाहते हैं तो इन आदतों को जरूर अपनाएं।



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