World Hypertension Day 2024: क्या एक ही होता है हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन? जानें यहां

दुनियाभर में हाई बीपी के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए हर साल 17 मई के दिन वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर से होने वाले नुकसान, उसकी गंभीरता, उसे रोकने और रेग्युलेट करने के बारे में शिक्षित किया जाता है। इस दिन लोग ब्लड प्रेशर के महत्व को समझते हैं, तकि वे अपनी हार्ट हेल्थ में सुधार कर सकें। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर दुनिया भर में कई बीमारियों के लिए एक मुख्य कारण है। कभी-कभी इसके कारण व्यक्ति को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

हर साल वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे पर एक थीम तय की जाती है। इस साल की थीम है “अपने रक्तचाप को सटीक रूप से मापें, इसे नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवित रहें“।

Difference Between Hypertension And High Blood Pressure

अमूमन यह देखने में आता है कि आज भी लोग हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी कई बातों से अनजान हैं। मसलन, हाइपरटेंशन और हाई ब्लड प्रेशर को एक ही समझते हैं और अक्सर इनका इस्तेमाल अदल-बदल कर करते हैं। हालांकि, इनके बीच एक बहुत छोटा सा अंतर है, जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के बीच के अंतर के बारे में बता रहे हैं-

हाई ब्लड प्रेशर क्या है?

हाई ब्लड प्रेशर को एक जानलेवा डिसऑर्डर माना जाता है। लेकिन मेडिकली यह अपने आप में एक विकार के बजाय एक लक्षण माना जाता है। हाई ब्लड प्रेशर वह फिजिकल कंडीशन है, जब आर्टरीज की वॉल्स के खिलाफ ब्लड का प्रेशर लगातार बहुत अधिक होता है। इसे आम तौर पर दो संख्याओं का उपयोग करके मापा जाता हैः सिस्टोलिक दबाव (वह दबाव जब आपका दिल धड़कता है) और डायस्टोलिक दबाव (वह दबाव जब आपका दिल धड़कनों के बीच आराम करता है)। अगर ब्लड प्रेशर 90 डायस्टोलिक वैल्यू और 140 सिस्टोलिक वैल्यू से अधिक होता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है।

ब्लड प्रेशर कई कारकों की वजह से हो सकता है, जैसे ब्लड वेसल्स की दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल या फैट्स का जमा होना। यदि हाई ब्लड प्रेशर का इलाज न किया जाए तो यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी।

हाइपरटेंशन क्या है?

वहीं दूसरी ओर, हाइपरटेंशन विशेष रूप से हाई ब्लडप्रेशर को संदर्भित करता है, जो लगातार समय के साथ बना रहता है। इसे तब डायग्नोस किया जाता है, जब किसी व्यक्ति का ब्लडप्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहता है। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर एक क्रॉनिक मेडिकल कंडीशन माना जाता है, जिसमें कॉम्पलीकेशन को रोकने के लिए लगातार मैनेज करने की जरूरत होती है।

आमतौर पर, हाइपरटेंशन एक हेल्थ डिसऑर्डर है, जो लगातार बढ़ा रहता है। इसे प्राइमरी हाइपरटेंशन और सेकंडरी हाइपरटेंशन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। सेकंडरी हाइपरटेंशन के कारण लोगों को दिल का दौरा, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर आदि हो सकता है और उनकी जान जा सकती है।

हाइपरटेंशन और उच्च रक्तचाप के बीच अंतर

हाइपरटेंशन एक लॉन्ग टर्म मेडिकल कंडीशन है, जिसमें धमनियों में ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रहता है। वहीं दूसरी ओर, हाई ब्लड प्रेशर एक चेतावनी संकेत है, जिसे सिस्टोलिक बीपी रीडिंग और डायस्टोलिक बीपी रीडिंग क्रमशः 140 mmHg और 90 mmHg से अधिक होने के रूप में परिभाषित किया गया है।

हाई ब्लड प्रेशर एक अधिक सामान्य शब्द है जिसका उपयोग धमनियों में बढ़े हुए प्रेशर के लिए किया जाता है, जबकि हाइपरटेंशन हाई ब्लड प्रेशर का मेडिकल डायग्नोस है, जो समय के साथ बना रहता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Friday, May 17, 2024, 5:45 [IST]
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