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Liver Tumor से जूझ रही हैं दीपिका कक्कड़, करानी होगी सर्जरी, क्या है इस बीमारी की वजह और लक्षण?
dipika kakar diagnosed with liver tumor: टेलीविजन की दुनिया की सबसे चहेती जोड़ियों में शामिल दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। दोनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और अपने फैमिली व्लॉग्स के जरिए अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी अपडेट फैंस के साथ साझा करते हैं। अब हाल ही में शोएब ने एक ब्लॉग के जरिए जानकारी दी कि दीपिका के लिवर के बाएं हिस्से में टेनिस बॉल के आकार का एक ट्यूमर पाया गया।
शोएब ने बताया कि दीपिका को पेट में लंबे समय से दर्द की शिकायत थी। पहले तो उन्हें लगा कि ये साधारण एसिडिटी है, इसलिए उन्होंने खुद ही घरेलू उपचार और दवाएं लीं। जब राहत नहीं मिली तो उन्होंने अपने फैमिली डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने कुछ एंटीबायोटिक्स दीं और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी।
5 मई तक दीपिका ने एंटीबायोटिक्स लीं और कुछ हद तक आराम भी मिला, लेकिन फिर अचानक दोबारा पेट में तेज़ दर्द शुरू हो गया। तब डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने को कहा और शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह ट्यूमर कैंसरस नहीं है, लेकिन फिर भी यह स्थिति गंभीर है और तत्काल सर्जरी की जाएगी। आइए जानते हैं कि आखिर लिवर में ट्यूमर कब बनता है और ये कितना खतरनाक है?

लिवर में ट्यूमर क्या है?
लिवर में ट्यूमर बनना एक गंभीर स्थिति हो सकती है, ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं: सौम्य (benign) जो फैलते नहीं हैं, और कैंसरस (malignant) जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकते हैं। सही समय पर जांच और इलाज बेहद ज़रूरी होता।
लिवर में ट्यूमर बनने की वजह
हैपेटाइटिस बी और सी संक्रमण
हैपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के वजह से लंबे समय तक इन वायरल इंफेक्शन के कारण लिवर में सूजन और स्कारिंग (fibrosis) होती है, जिससे ट्यूमर बनने का खतरा बढ़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, 2023 के एक शोध के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी और सी दुनिया भर में लिवर कैंसर के मुख्य वजहों में से एक हैं।
लिवर सिरोसिस
जब लिवर लंबे समय तक डैमेज होकर स्कार टिशू में बदल जाता है, तो सिरोसिस होता है। यह प्रक्रिया लीवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है और समय के साथ ट्यूमर बनने का खतरा बढ़ा देती है। खासकर हेपाटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC) नामक कैंसर सिरोसिस के मामलों में आम तौर पर देखा जाता है।
फैटी लिवर डिज़ीज
मोटापा, डायबिटीज़ और हाई कोलेस्ट्रॉल भी लीवर ट्यूमर की वजह में शामिल हैं।
अल्कोहल का अत्यधिक सेवन
लम्बे समय तक शराब पीने से लीवर में सूजन और सिरोसिस हो सकता है, जिससे ट्यूमर बन सकता है।
आनुवांशिक बीमारियां
कुछ जेनेटिक या इनहेरिटेड बीमारियाँ, जैसे कि Wilson's disease और Hemochromatosis, लीवर में टॉक्सिक पदार्थों के जमाव का कारण बनती हैं। ये दुर्लभ स्थितियाँ लीवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे टिशू डैमेज होता है और ट्यूमर बनने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे रोगों का समय रहते पता लगना और इलाज होना बेहद ज़रूरी होता है
हार्मोनल इम्बैलेंस या दवाइयाँ
कुछ महिलाएं जो लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव लेती हैं, उनमें भी hepatic adenoma नाम का benign tumor (लीवर में सौम्य ट्यूमर) विकसित हो सकता है।
ट्यूमर के लक्षण
- पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द (खासकर दाईं ओर)
- थकान और कमजोरी
- वजन का अचानक घटना
- भूख न लगना
- त्वचा और आंखों में पीलापन (jaundice)
लिवर में ट्यूमर का इलाज
लैंसेट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी (2021) की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ट्यूमर का साइज 5 सेंटीमीटर से बड़ा होता है (जैसे टेनिस बॉल जितना), तो अकसर तकलीफ देने वाले लक्षण दिखने लगते हैं और ऐसे मामलों में तुरंत स्कैन और बायोप्सी कराना ज़रूरी होता है ताकि सही से पता लगाया जा सके कि मामला क्या है? आइए जानते हैं इस मामले में इलाज कैसे होता है?
सर्जरी : अगर ट्यूमर को ऑपरेशन के ज़रिए हटाया जा सकता है और मरीज की हालत उपयुक्त हो, तो सर्जरी की जाती है। इसमें या तो ट्यूमर वाला हिस्सा हटाया जाता है (लीवर रिसेक्शन) या ज़रूरत पड़ने पर लीवर ट्रांसप्लांट किया जाता है।
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन : छोटे और शुरुआती स्टेज के ट्यूमर के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) और माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) तकनीकें इस्तेमाल होती हैं, जिनमें ट्यूमर को गर्मी से जलाकर नष्ट किया जाता है।
कीमोथेरेपी या टार्गेटेड दवाएं: यदि ट्यूमर कैंसरस है और सर्जरी संभव नहीं, तो कीमोथेरेपी या टार्गेटेड दवाएं जैसे Sorafenib व Lenvatinib दी जाती हैं। इम्यूनोथेरेपी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है।
TACE (Transarterial Chemoembolization) : इस तकनीक में दवा सीधे ट्यूमर को खून देने वाली नस में दी जाती है, जिससे ट्यूमर तक खून पहुंचना बंद हो जाता है। इसके अलावा, लक्षणों से राहत और बेहतर रिकवरी के लिए सपोर्टिव केयर और फॉलोअप थेरेपी भी ज़रूरी होती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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