दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट

Dipika Kakar On New Cysts: टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ इन दिनों काफी बुरे समय से गुजर रही हैं। करीब एक साल से लिवर कैंसर के इलाज के बाद भी वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई हैं और अब नई हेल्थ समस्या सामने आई है। उनके पति शोएब इब्राहिम के हालिया व्लॉग में बताया गया कि एमआरआई (MRI) के दौरान दो नए सिस्ट पाए गए हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने बताया कि दोनों सिस्ट अभी काफी छोटे हैं इसलिए ऑपरेशन मुमकिन नहीं है। डॉक्टर्स की सलाह से इस हफ्ते से दीपिका की इम्यूनोथेरेपी भी शुरू कर दी जाएगी।

Dipika Kakar Cysts

दीपिका के MRI स्कैन में दिखे दो नए सिस्ट

शोएब इब्राहिम ने अपने यूट्यूब व्लॉग में दीपिका कक्कड़ की सेहत को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालिया एमआरआई में 'डॉट साइज' के दो छोटे सिस्ट नजर आए हैं, जिन पर फिलहाल इलाज की जरूरत नहीं है। लेकिन डॉक्टरों ने नियमित जांच के साथ निगरानी रखने को कहा है। वहीं, दीपिका ने भी बताया कि स्कैन के दौरान वह घबरा गई थीं और रो पड़ीं। हालांकि, इससे उन्हें अपनी घबराहट कम करने में मदद मिली।

दीपिका की शुरू होगी इम्यूनोथेरेपी

शोएब इब्राहिम ने बताया कि दीपिका कक्कड़ का इलाज अब अगले चरण में पहुंच गया है और इसी हफ्ते उनकी इम्यूनोथेरेपी शुरू होने वाली है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार यह ट्रीटमेंट अस्पताल में किया जाएगा, जहां हर सेशन करीब 3 से 4 घंटे तक चल सकता है। दीपिका ने भी कहा कि वह इस दौरान खुद को सामान्य रखने की कोशिश कर रही हैं और परिवार, खासकर अपने बेटे के साथ समय बिताकर सकारात्मक बने रहने की कोशिश कर रही हैं। शोएब के मुताबिक, सही डाइट फॉलो करने की वजह से उनका वजन भी थोड़ा कम हुआ है।

इम्यूनोथेरेपी क्या है?

इम्यूनोथेरेपी एक ऐसा इलाज है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद की जाती है। इसमें दवाएं सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट नहीं करतीं, बल्कि शरीर को इस तरह तैयार करती हैं कि वह खुद कैंसर सेल्स को पहचानकर उनसे मुकाबला कर सके और धीरे-धीरे उन्हें खत्म कर सके।

इम्यूनोथेरेपी के फायदे

इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज का एक आधुनिक तरीका है, जिसके कई फायदे माने जाते हैं।
कीमोथेरेपी की तुलना में इसके साइड इफेक्ट कम हो सकते हैं।
इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
मरीज की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) बेहतर रहने में मदद मिलती है।
कुछ मामलों में यह कैंसर को लंबे समय तक कंट्रोल में रखने में सहायक साबित होती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Wednesday, April 22, 2026, 12:38 [IST]
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