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PresVu Eye Drop क्या है, जिसकी दो बूंद से मिल जाएगा चश्मे से छुटकारा, बस इतनी है कीमत
PresVu Eye Drop: चश्मा लगाने वाले लोगों के लिए एक खुशखबरी है। मुंबई की एक फार्मा कंपनी ने ऐसी आई डॉप बनाई है, जो चश्मा हटाने में मददगार साबित होगी। इस नए आई ड्रॉप्स को भारत की दवा नियामक एजेंसी (DCGI) ने भी हरी झंडी दे दी है।
इस आई ड्रॉप कंपनी के निर्माताओं का दावा है कि प्रेसबायोपिया की समस्या से पीडित लोगों के लिए यह दवा काफी फायदेमंद साबित होगी। इस आई ड्रॉप की खासियत एक बूंद सिर्फ 15 मिनट में असर दिखाती है और इसका असर 6 घंटे तक रहता है। इसकी कीमत मात्र 350 रुपए बताई जा रही है।

इस दवा के और भी कई फायदे
प्रेस्वू (PresVu) को भारत में पहली आई ड्रॉप है, जिसे प्रेसबायोपिया से पीड़ित लोगों में पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत को कम करने करने के लिए तैयार किया गया है। ये आई ड्रॉप न केवल पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत को खत्म करता है बल्कि आंखों को ड्राई होने से भी बचाता है। हालांकि ये दवा ओवर द काउंटर नहीं मिलेगी। सिर्फ डॉक्टर के प्रिस्किब्शनपर ही दी जाएगी। दावे के अनुसार यह दवा 40 से 55 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए, जो हल्के से मध्यम Presbyopia से पीड़ित हैं, उनके लिए काफी लाभदायक साबित होगी।
कैसे करेगा काम?
आमतौर पर प्रेसबायोपिया की बीमारी 40 साल के बाद होती है। जिससे पास की वस्तुओं को देखने की क्षमता कम होने लगती है। 60 के अंत तक तो आंखें बिल्कुल खराब हो जाती हैं। एन्टोड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) निखिल के मसुरकर का दावा है कि इन ड्रॉप्स को डालने के बाद 15 मिनट में असर दिखना शुरू हो जाता है। अगले छह घंटों तक असर रहता है। अगर पहली बूंद के तीन घंटे के भीतर दूसरी बूंद डाली जाए तो असर लंबे समय तक रहेगा।
250 लोगों पर की गई टेस्टिंग
अब तक प्रेसबायोपिया से जूझ रहे लोगों को सिर्फ चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस से काम चलाना पड़ता था। एन्टोड फार्मास्यूटिकल्स अभी तक ENT और स्किन की ही दवाएं बनाती है। यह पहली ऐसी दवा है जिसकी टेस्टिंग भारतीयों पर की गई है। कंपनी ने दवा के लिए 2022 की शुरुआत में DCGI से मंजूरी मांगी थी। जिसके बाद कंपनी को चरण-3 क्लीनिकल परीक्षण के लिए कहा गया था। देशभर में 250 रोगियों पर इसकी टेस्टिंग की गई थी।
क्या है प्रेसबायोपिया?
प्रेसबायोपिया एक आम उम्र से संबंधित आँखों से समस्या है, जो ज्यादातर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। इस स्थिति में आँखों की नज़दीक की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे पढ़ने में कठिनाई होती है। इसके लिए फिलहाल मुख्य रूप से चश्मे का उपयोग किया जाता रहा है, जैसे पढ़ने (रीडिंग) आदि के लिए। प्रेसबायोपिया एक ऐसी स्थिति है जो दुनिया भर में 1.09 से 1.80 बिलियन लोगों को प्रभावित करती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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