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बाथरूम में हार्ट अटैक आने से डायरेक्टर राजकुमार कोहली का निधन, क्यों बाथरूम में ही आते हैं ज्यादातर हार्ट
Rajkumar Kohli passes away: बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर राजकुमार कोहली का हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया है। उन्होंने शुक्रवार को 95 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह आज सुबह बहुत देर तक जब बाथरूम से बाहर नहीं निकले, तो फिर उन्हें बाथरूम का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला गया।
अस्पताल लेकर पहुंचने पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लेकिन कभी आपने सोचा है कि ज्यादात्तर लोगों को बाथरुम में ही क्यों हार्ट अटैक आता है?

क्यों आता है बाथरुम में हार्ट अटैक
डॉक्टर के अनुसार, सिम्पेथेटिक और पैरासिम्पेथेटिक औटोनोमिक नर्वस सिस्टम के बीच असंतुलन के कारण तनाव के दौरान रक्तचाप में कमी होती है। इससे दिमाग में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और चेतना का नुकसान होता है। इससे शौचालय में अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार अधिकांश लोग प्रतिदिन औसतन 30 मिनट या 2 प्रतिशत समय शौचालय में बिताते हैं। यह वह जगह है, जहां 8 से 11 प्रतिशत तक हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट आने का खतरा होता है। चूंकि बाथरूम निजी स्थान हैं, इसलिए इसका देर से पता चलता है और परिणाम खराब होते हैं।
बाथरूम में अटैक आने का दूसरा कारण
आपने अक्सर देखा होगा कि बाथरूम का तापमान हमारे घर के अन्य कमरों के मुकाबले अधिक ठंडा रहता है। ऐसी स्थिति में शरीर के तापमान को संतुलित करने और खून के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अधिक कार्य करना पड़ता है। यह भी दिल का दौरा पड़ने का एक कारण हो सकता है।

ठंड में बढ़ जाती है हार्ट अटैक की शिकायत
ठंड में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ सकती है। सर्दियों में कोरोनरी धमनी का संकुचन एनजाइना, या कोरोनरी हृदय रोग से होने वाले सीने के दर्द को बदतर बना सकता है वहीं मस्तिष्क की नसें ठंड और हाई ब्लड प्रेशर के कारण और सख्त और कठोर हो जाती हैं। जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। जब बाहर ठंड होती है तो शरीर के सामान्य तापमान को बनाए रखने के लिए हार्ट को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ठंड में शरीर अधिक तेजी से गर्मी खोता है, इसलिए वे स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। यदि आपके शरीर का तापमान 95 डिग्री से नीचे चला जाता है तो हाइपोथर्मिया होने का खतरा होता है और इससे नसों के फटने और इंटर्नल ब्लीडिंग का खतरा भी बढ़ता हे।
बाथरुम में दिल के मरीज इन बातों का ध्यान रखें
शौच या पेशाब करते समय ज्यादा जोर नहीं लगाना चाहिए। राहत महसूस करते हुए अपना समय लें। ज्यादा गर्म या ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचें। सीधे सिर पर पानी डालना शुरू न करें। पैर या कंधा धोना शुरू करें और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ें। बाथरूम में ठंडे वातावरण के संपर्क में आने से बचें, खासकर सर्दियों में, क्योंकि इससे दिल का दौरा पड़ सकता है। यदि आपको पहले दिल का दौरा पड़ चुका है, बुढ़ापा है, हृदय पंप करने की शक्ति कमजोर है, तो शौचालय का उपयोग करते समय दरवाजे को बंद न करें।
कमजोर लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले शौचालयों/स्नानघरों में अलार्म होना चाहिए, ताकि समय पर मदद मिल सके।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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