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गैल गैडोट की प्रेग्नेंसी बनी मुश्किल, ब्रेन क्लॉट की वजह से करानी पड़ी सर्जरी - जानिए कारण और बचाव
Gal Gadot Pregnancy Brain Surgery: हॉलीवुड एक्ट्रेस और 'वंडर वुमन' फेम गैल गैडोट ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें ब्रेन में ब्लड क्लॉट (Brain Blood Clot) हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी। गैडोट ने कहा कि उस पल उन्हें ऐसा लगा जैसे "मैं मरने वाली हूं, सबकुछ ब्लैंक हो गया था।" यह घटना उन महिलाओं के लिए बड़ी चेतावनी है जो गर्भावस्था में स्वास्थ्य को हल्के में ले लेती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क सामान्य स्थितियों की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आखिर क्यों ऐसा होता है और किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए आइए जानते हैं।

प्रेग्नेंसी में ही हुआ था गैल गैडोट को ब्रेन क्लॉट
गैल गैडोट ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एक दिन उन्हें अचानक तेज सिरदर्द और चक्कर आने लगे। कुछ ही मिनटों में उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। जांच करवाने पर पता चला कि उनके ब्रेन में ब्लड क्लॉट बनने लगा है, जो स्ट्रोक या जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता था। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया और इमरजेंसी न्यूरो सर्जरी की गई। गैडोट ने कहा- उस समय मुझे लगा सब खत्म हो गया है वो पल डरावना और दर्दनाक था।
आखिर प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है ब्लड क्लॉट का खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर में कई बदलाव होते हैं, और इन्हीं परिवर्तनों के कारण ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम 5-6 गुना तक बढ़ जाता है। इसके प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं-
1. शरीर में खून के थक्के जमने की क्षमता बढ़ जाती है
यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है ताकि डिलीवरी के दौरान खून बहने से खतरा न हो। लेकिन यही प्रक्रिया उल्टा असर कर सकती है और खून में क्लॉट बनने लगते हैं।
2. गर्भाशय का दबाव
जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, गर्भाशय पैरों की नसों पर दबाव बनाता है, जिससे खून का प्रवाह धीमा पड़ जाता है और थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है।
3. लंबे समय तक बैठना या लेटना
गर्भावस्था में महिलाएं कम चलती-फिरती हैं। इससे पैरों की नसों में खून ठहर जाता है और क्लॉट बन सकता है।
4. हार्मोनल बदलाव
प्रेग्नेंसी में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है, जो खून को गाढ़ा करने में भूमिका निभाता है।
5. डिलीवरी के बाद भी रहता है खतरा
बच्चे के जन्म के बाद 6 सप्ताह तक क्लॉट बनने का जोखिम बना रहता है।
किन महिलाओं में ज्यादा होता है ये खतरा?
35+ उम्र वाली महिलाएं
पहली प्रेग्नेंसी
मोटापा
बहुत अधिक वजन बढ़ना
पारिवारिक हिस्ट्री में ब्लड क्लॉट
IVF प्रेग्नेंसी
लंबी यात्राएं
धूम्रपान
बहुत कम शारीरिक गतिविधि
ब्लड क्लॉट के संकेत जिन पर तुरंत डॉक्टर से दिखाएं
अचानक तेज सिरदर्द
चेहरे या हाथ-पैर पर सुन्नपन
सांसे फूलना
पैरों में सूजन और दर्द
चक्कर आना या धुंधला दिखना
बोलने में दिक्कत
बचाव कैसे करें?
रोजाना हल्की कसरत या वॉक
लंबे समय तक न बैठें
पर्याप्त पानी पिएं
वजन नियंत्रित रखें
डॉक्टर द्वारा दी गई ब्लड थिनर दवाएं (जरूरत पड़ने पर)
आराम और तनाव कम रखें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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