चांदीपुरा वायरस के बाद अब गुजरात में मंडराया माल्टा फीवर का खतरा, क्या है ये बीमारी और इसके लक्षण?

गुजरात में चांदीपुरा वायरस के मामलों के बीच हुई एक स्‍टडी में पता चला हैं क‍ि गुजरात में इस तरह की जलवायु और परिस्थिति बन रही है कि अन्य राज्यों के मुकाबले यहां के लोगों को माल्टा फीवर जैसी बीमारियों का जोखिम अधिक है।

सेंटर फॉर वन हेल्थ एजुकेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट की तरफ से हुई रिसर्च में य‍ह बात सामने आई है क‍ि गुजरात में माल्टा फीवर, रैबिज का संदिग्ध खतरा मंडरा रहा है हालांकि राज्य में फिलहाल माल्टा बुखार के कोई मामले नहीं आए हैं। लेक‍िन इस स्‍टडी के मुताब‍िक राज्य में पक्षियों और जानवरों के जरिए मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों के लिए अन्‍य राज्‍यों की तुलना में गुजरात का जलवायु इन संक्रमणों के फैलने के अनुकूल हैं। चल‍िए इसी बीच जानते हैं क‍ि क्‍या हैं माल्‍टा फीवर और इसके लक्षण-

Gujarat susceptible to Malta fever Or Brucellosis

माल्‍टा फीवर क्‍या है?

माल्‍टा फीवर के सालभर में दुनि‍याभर से 5 लाख से अध‍िक मामले सामने आते हैं। यह एक जूनोटिक बीमारी है। इसका मतलब है कि यह जानवरों के जरिए इंसानों में फैलती है। इसे ब्रुसेलोसिस, अनड्यूलेंट फीवर, माल्टा फीवर और मेडिटेरेनियन फीवर जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह बीमारी आमतौर पर पॉश्चराइज किए बिना मिल्क प्रोडक्ट्स खाने से फैलती है।

माल्टा फीवर के लक्षण क्या हैं?

माल्टा फीवर के लक्षण दिखने में दो से चार सप्ताह या अधिक समय लग सकता है। इसके लक्षण कई महीनों या वर्षों तक बने रह सकते हैं। इसके लक्षण एक बार ठीक होने के बाद फिर से लौट भी सकते हैं।
- बुखार
- सिरदर्द
- पेट दर्द
- डिप्रेशन
- अचानक वजन घटना
- थकान महसूस होना
- लिम्‍फ नोड्स में सूजन और दर्द
- पसीने की गंदी बदबू आना
- घुटने में दर्द

माल्टा फीवर फैलने के क्या कारण हैं

क्‍वीलैंड क्लिनिक के मुताब‍िक माल्टा फीवर के पीछे कई तरह के ब्रुसेला बैक्टीरिया जिम्‍मेदार होते हैं। जिनमें बी. एबॉर्टस, बी. कैनिस , बी. मेलिएन्सिस और बी. सुइस प्रमुख हैं। इनके वाहक आमतौर पर जानवर होते हैं। इस संक्रमण के वाहक गाय, भैंस, बकरी, सूअर, ह‍िरण, कुत्ता और ऊंट जैसे जानवर होते हैं।

माल्टा फीवर इंसानों को कैसे प्रभावित करता है?

माल्टा फीवर ब्रूसेला नाम के बैक्टीरिया की वजह से फैलता है। यह हमारे मुंह, नाक, आंख और त्वचा में कट या खुली चोट के जरिए शरीर में प्रवेश कर संक्रम‍ित करता है। यह हमारे लिम्फ नोड्स या टिश्यूज में पहुंच जाता है, जहां से यह धीरे-धीरे हृदय, लिवर, मस्तिष्क और हड्डियों सहित शरीर के लगभग हर हिस्से तक पहुंचकर संक्रमित कर सकता है। फिर यह इंफ्लेमेशन और डैमेज का कारण बनता है।

कैसे फैलता है माल्‍टा फीवर?

विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा तब रहता है, जब इंसान जानवर का कच्चा दूध इस्तेमाल करता है या दूध की बनी चीज खाता है। इसके अलावा किसी जानवर के संक्रमित टिश्यूज या शरीर से निकले तरल पदार्थ को छूने से भी माल्टा फीवर हो सकता है। इसके अलावा संक्रम‍ित जानवर के मांस से बैक्‍टीर‍िया हवा के संपर्क में भी आने से भी अन्‍य इंसानों और जानवरों को संक्रमित कर सकता है।

खतरा

माल्‍टा फीवर की वजह से ये समस्‍याएं हो सकती है?

- गठिया
- हेप्‍टोमेगली
- स्‍प्‍लेनोमेगली
- दिल में बैक्‍टीरिया का संक्रमण
- एन्‍सेफलाइट‍िस (दिमागी सूजन)
- ऑस्टियोमाइलाइटिस (हड्डियों की सूजन)
- पीठ के निचले ह‍िससे में संक्रमण और सूजन
- पुरुषों में शुक्राणु ले जानी वाली ट्यूब सूजन
- गर्भपात भी हो सकता है

इलाज

माल्टा फीवर के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं। इसलिए इसके इलाज में कम-से-कम 6 से 8 सप्ताह तक दवाएं लेनी होती हैं। यह भी हो सकता है कि डॉक्टर पेशेंट की उम्र और हेल्थ कंडीशन के आधार पर हर शख्स का अलग इलाज करें।

माल्टा फीवर से बचने के क्या उपाय हैं?

माल्टा फीवर के लिए जिम्मेदार ब्रुसेला बैक्टीरिया इंसानों तक जानवरों के जरिए फैलता है। इसलिए जानवरों के आसपास काम करते समय सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर रहें। अगर संभावित रूप से संक्रमित जानवरों के आसपास हैं तो उस दौरान कुछ खाने-पीने से बचें। चेहरे पर मास्क लगाकर रखें।

- कच्चा दूध न पिएं और पाश्चराइज किए बिना कोई भी मिल्क प्रोडक्ट न खाएं।
- बूचड़खाने में काम करने वाले लोगों को PPE किट पहननी चाहिए।
सुरक्षा के लिए दस्ताने, एप्रन और चश्मा पहन सकते हैं।
- नॉनवेज खाने वाले लोग मीट को सही तापमान पर पकाकर खाएं।
- सभी बर्तनों को अच्छे से धोएं।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Wednesday, August 14, 2024, 18:42 [IST]
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