Latest Updates
-
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
13 साल कोमा में रहने वाले हरीश राणा का निधन, जानें ऐसे मरीज के अंग दान हो सकते हैं या नहीं?
Harish Rana Passes Away: 13 साल का लंबा इंतजार, बिस्तर पर कटी 4,700 से ज्यादा रातें और फिर इच्छा मृत्यु से आखिरकार हरीश राणा की रूह को शांति मिल गई। 2013 में एक हादसे के बाद कोमा में गए हरीश ने मंगलवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। इस कठिन घड़ी में उनके परिवार वालों ने हिम्मत रखी और भारी मन से बेटे को अलविदा कहा। बीते कई दिनों से हरीश राणा की चर्चा सोशल मीडिया पर तेज थी।
अब हरीश के निधन के बाद एक बड़ा सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि जिस शरीर के लिए उन्होंने कभी 'गरिमापूर्ण मौत' मांगी थी, क्या उस शरीर के अंग अब किसी दूसरे के बुझते चिराग को रौशन कर सकते हैं? क्या 13 साल तक कोमा और दवाइयों के साये में रहे हरीश का अंगदान (Organ Donation) चिकित्सा विज्ञान की नजर में संभव है? आइए जानते हैं इसके पीछे के मेडिकल नियम और कानूनी पेच। साथ ही ये भी कि इस बारे में हरीश राणा के माता-पिता ने क्या कहा था।

हरीश राणा ने दुनिया को कहा अलविदा
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के रहने वाले हरीश राणा का आज, मगंलवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। एक हादसे का शिकार हरीश करीब 13 सालों से कोमा में थे। उनके माता-पिता और परिवार वालों ने हर संभव कोशिश लेकिन बेटा 13 सालों से एक जिंदा लाश की तरह बिस्तर पर रहा। आखिरकार थक-हारकर हरीश के माता-पिता ने कानून का सहारा लिया और बेटे के लिए इच्छा मृत्यु मांगी।
बीते कई दिनों से दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हरीश का आज 24 मार्च को अस्पताल में निधन हो गया। हरीश राणा के माता-पिता ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर उनके बेटे के अंगदान हो सकते हैं तो वो करने के लिए तैयार हैं।
कौन थे हरीश राणा
हरीश राणा भारत के उन चंद नामों में से एक बन गए, जिन्होंने देश में 'इच्छा मृत्यु' (Euthanasia) और 'गरिमापूर्ण मौत' के अधिकार पर एक नई बहस छेड़ दी। 13 साल तक कोमा की अंधेरी दुनिया में रहने वाले हरीश की कहानी किसी का भी दिल दहला देने वाली है। यह दुखद घटना तब शुरू हुई जब हरीश चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। एक होनहार छात्र, जिसका भविष्य बेहद उज्ज्वल नजर आ रहा था, नियति ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था।
बताया जाता है कि हरीश अपने पीजी (PG) की चौथी मंजिल पर खड़े होकर फोन पर अपनी बहन से बात कर रहे थे। उसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे सीधे नीचे गिर पड़े। इस भीषण हादसे में उनके सिर और कमर की हड्डियों में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण वे गहरे कोमा में चले गए।
क्या कोमा में रहे मरीज के अंग काम आ सकते हैं?
मेडिकल साइंस के अनुसार, अंगदान की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि मौत कैसे हुई है। यदि मरीज वेंटिलेटर पर है और डॉक्टर उसे 'ब्रेन डेड' घोषित करते हैं, तो हृदय, लीवर, किडनी और फेफड़े जैसे प्रमुख अंग दान किए जा सकते हैं। यदि दिल धड़कना बंद कर दे (जैसा कि हरीश के मामले में हुआ), तो केवल आंखें (Cornea), हड्डियां और त्वचा (Skin) ही दान की जा सकती हैं वो भी जांच के बाद।
13 साल की लंबी बीमारी का अंगों पर असर
राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टर शशांक शर्मा का कहना है कि इतने लंबे समय तक कोमा में रहने और भारी मात्रा में दवाइयां (Antibiotics & Painkillers) लेने के कारण शरीर के मुख्य अंगों की कार्यक्षमता (Efficiency) कम हो जाती है। अंगदान से पहले एक मेडिकल बोर्ड अंगों की गुणवत्ता की जांच करता है। अक्सर लंबे समय तक बेडरेस्ट पर रहने वाले मरीजों के अंगों में 'ऑर्गन फेलियर' या 'टिश्यू डैमेज' का खतरा रहता है। डॉक्टर ने बताया कि आमतौर पर मृत्यु क 6 घंटे के अंदर अंगदान किया जा सकता है लेकिन ये व्यक्ति की स्थिति पर संभव होता कि उसकी अंदरुनी कंडीशन कैसी है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।
गदान के लिए उम्र से ज्यादा अंगों की 'कंडीशन' मायने रखती है। हालांकि, अलग-अलग अंगों के लिए डॉक्टरों के अपने मानक होते हैं।
चूंकि हरीश कोमा में थे, इसलिए उनके 'कानूनी अभिभावक' (Legal Guardians) यानी उनके माता-पिता की लिखित सहमति अनिवार्य है।



Click it and Unblock the Notifications
