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हरीश राणा केस: बिना खाना खाए और पानी पिए कितने दिन तक जिंदा रह सकता है इंसान
Harish Rana Case Latest Update: देश की राजधानी दिल्ली स्थित AIIMS (एम्स) में भर्ती हरीश राणा की पल-पल की हेल्थ अपडेट पर लोगों की नजरें टिकी हैं। 13 साल से बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे 32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 'शांतिपूर्ण मौत' (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है। पिछले 168 घंटों यानी एक हफ्ते से अधिक समय से हरीश को न तो खाना दिया गया है और न ही पानी। लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटने के बाद अब हरीश का शरीर अपनी अंतिम ऊर्जा के सहारे टिका है।
मेडिकल टीम की निगरानी में चल रही यह प्रक्रिया जितनी शांत है, डॉक्टरों के लिए उतनी ही बेचैनी भरी भी है, क्योंकि भारत में अपनी तरह का यह पहला और सबसे संवेदनशील मामला है। इसी बीच लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि एक व्यक्ति बिना कुछ खाए और पिए कितने दिन तक जिंदा रह सकता है। आइए आज के आर्टिकल में इस बारे में विस्तार से जानते हैं और हरीश राणा के लेटेस्ट हेल्थ अपडेट पर भी एक नजर डालते हैं।

1 हफ्ते से हरीश राणा का खाना-पानी बंद
सुप्रीम कोर्ट से हरीश के माता-पिता को मिली अनुमति के बाद, 14 मार्च को उन्हें गाजियाबाद से दिल्ली AIIMS शिफ्ट किया गया था। पेलिएटिव केयर यूनिट में डॉ. सीमा मिश्रा के नेतृत्व में 10 डॉक्टरों के बोर्ड ने हरीश की PEG ट्यूब (फीडिंग पाइप) और वेंटिलेटर हटा दिए हैं। अब हरीश एक सामान्य बेड पर हैं और उन्हें कोई बाहरी पोषण नहीं दिया जा रहा है।
डॉक्टरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी मृत्यु पूरी तरह से प्राकृतिक और 'दर्द रहित' हो।चिकित्सीय मानकों के अनुसार, हरीश का शरीर अब 'मेटाबॉलिक शटडाउन' की स्थिति में है। डॉक्टरों ने ब्लड सैंपल लेना और पोषण देना पूरी तरह बंद कर दिया है।
हरीश को दी जा रही कौन सी दवाएं?
वार्ड के बाहर पसरा सन्नाटा डॉक्टरों की बढ़ती बेचैनी को साफ बयां कर रहा है। पेलिएटिव मेडिसिन विभाग की टीम हर पल इस बात की निगरानी कर रही है कि हरीश को किसी भी प्रकार की शारीरिक तकलीफ न हो। उन्हें ऐसी दवाएं दी जा रही हैं जिससे मस्तिष्क और शरीर शांत रहे। परिवार का मिलना भी अब बेहद सीमित कर दिया गया है ताकि अंतिम क्षणों की गरिमा और शांति बनी रहे।
बिना खाए-पिए कितने दिन जिंदा रह सकता है इंसान?
विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना अन्न-जल के जीवित रहने की क्षमता व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है, लेकिन इस अवस्था में शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। चिकित्सा विज्ञान के 'रूल ऑफ थ्री' (Rule of Threes) के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति बिना हवा के 3 मिनट, बिना पानी के 3 दिन और बिना भोजन के लगभग 3 हफ्ते तक संघर्ष कर सकता है।
हालांकि, जल का त्याग करने पर शरीर बहुत तेजी से टूटने लगता है, क्योंकि पानी के अभाव में किडनी फेलियर और डिहाइड्रेशन के कारण रक्त गाढ़ा हो जाता है, जिससे अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है। हरीश राणा जैसे मामलों में, जहां मेटाबॉलिज्म (पाचन दर) पहले से ही बहुत धीमा है, शरीर बिना किसी बाहरी पोषण के 7 से 14 दिन तक खिंच सकता है, जिसके बाद अंग धीरे-धीरे 'मेटाबॉलिक शटडाउन' की स्थिति में चले जाते हैं और अंततः जीवन लीला समाप्त हो जाती है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल चिकित्सा विज्ञान के सामान्य तथ्यों पर आधारित है। इच्छामृत्यु एक गंभीर कानूनी और चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसे केवल माननीय न्यायालय के आदेश पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किया जा सकता है।
जब शरीर को बाहर से ऊर्जा (भोजन/पानी) मिलना बंद हो जाती है, तो शरीर के अंग (किडनी, लीवर, हृदय) धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। इसे ही मेडिकल भाषा में मेटाबॉलिक शटडाउन कहते हैं।



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