Latest Updates
-
Eid के मुबारक मौके पर जन्में बेटा-बेटी के लिए 100+ इस्लामिक नाम, अर्थ के साथ -
युवराज दुआ कौन हैं? PM मोदी ने जिनकी रील को अपनी इंस्टा स्टोरी पर किया शेयर -
Navratri Wishes In Sanskrit: संस्कृत के इन मंत्रों और श्लोकों से दें तीसरे नवरात्रि की शुभकामनाएं -
Gangaur Vrat Katha:गणगौर पूजा में जरूर करें इस कथा का पाठ, शिव-पार्वती की कृपा से मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान -
Eid Mubarak Wishes in Urdu: 'अल्फाजों में मोहब्बत, दुआ में असर...उर्दू शायरी के साथ कहें 'ईद मुबारक' -
Happy Gangaur 2026 Wishes: गौरा-शंकर का साथ मिले...इन संदेशों के साथ अपनों को दें गणगौर पूजा की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal, 21 March 2026: मेष से मीन तक पढ़ें 12 राशियों का राशिफल, जानें शनि दोष के उपाय -
Eid Mubarak Wishes 2026: इन संदेशों के जरिए दोस्तों और रिश्तेदारों को दें ईद की मुबारकबाद -
Gangaur Wishes For Husband: सजती हूं तेरे नाम...अपने पिया जी को इन संदेशों के साथ दें गणगौर की शुभकामनाएं -
Eid Mubarak For Husband/Wife: 'तुम ही मेरा चांद हो'... लाइफ पार्टनर को इन शब्दों में कहें 'ईद मुबारक
Harish Rana: क्या होती है 'ब्रेन सूदिंग' दवा? जो इच्छामृत्यु प्रक्रिया के दौरान हरीश को दी जा रही
Harish Rana Case Latest Update: गाजियाबाद के हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से एक जिंदा लाश बनकर कोमा (Persistent Vegetative State) में थे, जो अब अपनी अंतिम यात्रा की ओर बढ़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से 'पैसिव इच्छामृत्यु' की मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड ने जीवन रक्षक प्रणालियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटाए जाने के बाद अब हरीश को सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक शब्द बार-बार सामने आ रहा है 'ब्रेन सूदिंग' दवाएं। आखिर क्या होती हैं ये दवाएं और इच्छामृत्यु की प्रक्रिया में इनका क्या काम है? दिमाग को सुकून देने वाली ये दवाएं हरीश राणा को क्यों दी जा रही हैं? आइए इस जटिल चिकित्सा प्रक्रिया के मानवीय और तकनीकी पहलुओं को समझते हैं।

क्या है 'ब्रेन सूदिंग' दवा और हरीश के लिए क्यों है जरूरी?
चिकित्सीय भाषा में इन्हें 'पल्लियेटिव सेडेशन' (Palliative Sedation) कहा जाता है। जब किसी मरीज का लाइफ सपोर्ट जैसे ऑक्सीजन या कृत्रिम भोजन हटाया जाता है, तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। ऐसी स्थिति में मरीज को 'एयर हंगर' (सांस की तड़प) या बेचैनी महसूस हो सकती है। 'ब्रेन सूदिंग' दवाएं मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत रखती हैं ताकि मरीज को किसी भी तरह का शारीरिक दर्द, घबराहट या मानसिक तनाव महसूस न हो। इसका उद्देश्य मृत्यु को लाना नहीं, बल्कि मौत के सफर को दर्दमुक्त और शांत बनाना है।
'बेस्ट प्रिंसिपल इंटरेस्ट' क्या है?
सुप्रीम कोर्ट और एम्स का मेडिकल बोर्ड इस मामले में 'बेस्ट इंटरेस्ट' (Best Interest Principle) के सिद्धांत पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि मरीज के लिए जो सबसे बेहतर और कम कष्टकारी हो, वही किया जाए। डॉक्टरों का मानना है कि हरीश की स्थिति अपरिवर्तनीय है, इसलिए उन्हें कृत्रिम रूप से जीवित रखना उनके कष्ट को बढ़ाना है। अब उन्हें जो दवाएं दी जा रही हैं, वे यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि प्रकृति अपना काम करे, लेकिन उस दौरान हरीश की गरिमा (Dignity) बनी रहे।
वेंटिलेटर हटा, फीडिंग ट्यूब बंद: अब क्या है हरीश की स्थिति?
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, हरीश राणा को वेंटिलेटर से हटाकर अब पैलिएटिव केयर यूनिट के नॉर्मल बेड पर रखा गया है। उनकी फीडिंग ट्यूब भी हटा दी गई है। वर्तमान में उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन अब वह पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर हैं। एम्स की एनस्थीशिया विभाग की हेड डॉ. सीमा मिश्रा की अगुवाई वाली टीम उनके हर रिस्पांस को मॉनिटर कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह गहरी नींद जैसी शांतिपूर्ण स्थिति में रहें।
हो रही माता-पिता की काउंसलिंग
एक तरफ मेडिकल प्रक्रिया चल रही है, तो दूसरी तरफ मानवीय संवेदनाओं का सैलाब है। एम्स में हरीश के माता-पिता और भाइयों की रोजाना काउंसलिंग की जा रही है। 13 साल तक अपने बेटे को पल-पल मरते देखने वाले माता-पिता के लिए यह 'विदाई' जितनी राहत भरी है, उतनी ही भारी भी। डॉक्टरों की टीम उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से इस बदलाव के लिए तैयार कर रही है, ताकि वे अपने बेटे को एक 'खुशनुमा और गरिमापूर्ण' विदाई दे सकें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।
यह निर्णय डॉक्टरों का एक विशेष मेडिकल बोर्ड और कानूनी विशेषज्ञ लेते हैं, जिसमें मरीज की गरिमा और उसके कष्ट को प्राथमिकता दी जाती है।
नहीं, इन दवाओं का उद्देश्य मृत्यु की प्रक्रिया को तेज करना नहीं है। इनका काम केवल मरीज के मस्तिष्क को शांत रखना और उसे दर्द या दम घुटने (Air Hunger) के अहसास से बचाना है।



Click it and Unblock the Notifications











