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हरीश राणा का आखिरी 22 सेकेंड का वीडियो वायरल, अंतिम विदाई देख रो पड़े लोग
Harish Rana Last Words Video Viral: दुनिया में सबसे भारी बोझ उस पिता का कंधा होता है, जिस पर जवान बेटे की अर्थी हो, लेकिन उससे भी कहीं ज्यादा दर्दनाक वो पल है जब माता-पिता अपने ही जिगर के टुकड़े के लिए मौत मांग लें। गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में आज भारत ने एक ऐसी विदाई देखी, जो इतिहास में पहली बार हुई है। 13 साल के असहनीय दर्द और बेड पर पत्थर बन चुके शरीर को आखिरकार 'इच्छामृत्यु' (Passive Euthanasia) की मंजूरी मिल गई।
लेकिन एम्स (AIIMS) शिफ्ट होने से पहले हरीश की अपने घर से विदाई का 22 सेकंड का जो वीडियो सामने आया है, वह कलेजा चीर देने वाला है। उस वीडियो में मौत का खौफ नहीं, बल्कि 13 साल के वनवास से मुक्ति का सुकून और अपनों की सिसकियों के बीच एक ममतामयी विदाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया है।

22 सेकंड का वो वीडियो हुआ वायरल (First case of passive euthanasia in India Harish Rana)
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस मार्मिक वीडियो में हरीश बिस्तर पर लेटे हुए हैं। उनके माथे पर एक महिला चंदन का टीका लगा रही हैं। उनके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान है जो बता रही है कि अब वे इस कैद से आजाद होने वाले हैं। महिला रुंधे गले से उनके सिर पर हाथ फेरती हैं और कहती हैं "सबको माफ करते हुए... सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ।" इन शब्दों ने इंटरनेट पर भावनाओं का सैलाब ला दिया है। हरीश, जो 13 साल से बोल नहीं सके, हिल नहीं सके, वे बस अपनी पलकें झपकाकर उस आखिरी विदाई को स्वीकार कर रहे थे।
13 साल का संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
हरीश राणा कभी पंजाब यूनिवर्सिटी के एक होनहार बीटेक छात्र थे। साल 2013 में पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में ऐसी गंभीर चोट आई कि वे 100% लकवे (क्वाड्रिप्लेजिया) का शिकार हो गए। 13 सालों तक मां-बाप ने अपना सबकुछ झोंक दिया, इस उम्मीद में कि बेटा कभी मां कहकर पुकारेगा। लेकिन जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तब मजबूर माता-पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब एम्स में 'पैसिव यूथेनेशिया' की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जहां धीरे-धीरे उनके लाइफ सपोर्ट हटाए जाएंगे ताकि उन्हें एक प्राकृतिक और सम्मानजनक मृत्यु मिल सके।
एक तड़पती मां का दर्द: "जा बेटा, अब तू सुकून से सो जा"
हरीश की मां निर्मला देवी की एक तस्वीर भी वायरल हो रही है, जिसमें वे बेटे के सिरहाने बैठी हैं। उनकी आंखें उस बेबसी को बयां कर रही हैं जिसे कोई भी मां कभी महसूस नहीं करना चाहती। उन्होंने भारी मन से कहा था कि बेटे के लिए मौत मांगना आसान नहीं था, लेकिन उसे हर पल घुट-घुट कर मरते देखना उससे भी कहीं ज्यादा मुश्किल था। यह तस्वीर और वीडियो एक संदेश है कि कभी-कभी 'विदाई' ही सबसे बड़ा प्यार बन जाती है।
क्या है पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु)? (passive euthanasia case)
भारत के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है। कोर्ट की अनुमति के बाद अब एम्स के डॉक्टर हरीश को कोई नया लाइफ सपोर्ट नहीं देंगे। पेन मैनेजमेंट (दर्द निवारण) के जरिए उन्हें तकलीफ से बचाया जाएगा और धीरे-धीरे फीडिंग ट्यूब और अन्य मशीनी सपोर्ट हटा लिए जाएंगे। यह प्रक्रिया हरीश को उस अंधकारमय जीवन से मुक्ति दिलाएगी जो पिछले एक दशक से उनके लिए बोझ बन गया था।
वीडियो देख रो पड़े लोग
जैसे ही ये 22 सेकेंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उसे देख लोगों की आंखें नम हो गई। एक यूजर ने लिखा- कितनी निर्मोही दुनिया है कैसे एक जीते जागते अपने घर के सदस्य को इस प्रकार से मारने के लिए भेज सकते , भले ही शरीर न चल रहा है आंखे चेहरा तो चल रहा कम से कम उस की ही सेवा कर लेते। दूसरे यूजर ने लिखा- मुझे ऐसा लगता है कि ये पलकें चला रहा है और शायद मुंह भी। क्या यह कोमा की स्थिति है? मुझे बड़ी पीड़ा हो रही है उसे देखकर।
एक अन्य यूजर ने लिखा- कभी कभी हम कहते है कि पता होता तो कुछ करते कभी कभी मनुष्य बहुत लाचार होता है सब पता होते हुए भी कुछ नहीं कर पाता है इतने साल मां बाप ने उसकी सेवा की है आज उसको मुक्ति मिल जाएगी भगवान उसको नया जीवन प्रदान करे यही प्रार्थना करते है। इसी तरह के और भी बहुत से कमेंट हैं जिन्हें पढ़ आप भी रो पड़ेंगे।



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