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जानें कौन हैं हरीश राणा के सिरहाने बैठी वो महिला? जिनके ममतामयी शब्दों ने आखिरी सफर को बनाया अमर
Harish Rana Viral Video: मृत्यु का सन्नाटा अक्सर डरावना होता है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 32 वर्षीय हरीश राणा के आखिरी पलों के वीडियो ने इस धारणा को बदल दिया है। 13 साल तक बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद, जब हरीश 'इच्छामृत्यु' (Euthanasia) के जरिए शांति की ओर बढ़ रहे थे, तब उनके सिरहाने बैठी एक महिला ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। माथे पर चंदन का तिलक, आंखों में ममता और जुबान पर "सबको माफ करते हुए जाओ..." जैसे शब्द।
इस वीडियो ने न केवल लोगों की आंखों में आंसू ला दिए, बल्कि उस रूहानी विदाई को अमर कर दिया जिसे देखकर हर कोई पूछ रहा है आखिर कौन हैं ये महिला, जिन्होंने मौत के मुहाने पर खड़े हरीश राणा को मुक्ति का पाठ पढ़ाया?

कौन हैं हरीश के सिरहाने बैठी 'सिस्टर लवली'?
वायरल वीडियो में दिख रही सफेद लिबास वाली यह महिला कोई साधारण परिचित नहीं, बल्कि ब्रह्माकुमारीज (Brahma Kumaris) आध्यात्मिक केंद्र की स्पिरिचुअल लीडर सिस्टर लवली दीदी हैं। जब चिकित्सा विज्ञान हार गया और हरीश ने गरिमापूर्ण मृत्यु का चुनाव किया, तब सिस्टर लवली ने एक बड़ी बहन और आध्यात्मिक गुरु की भूमिका निभाते हुए उन्हें उस अंतिम सफर के लिए तैयार किया।
"सबको माफ कर देना...": इन 22 सेकंड्स में छिपा है जीवन का सार
अंतिम विदाई के समय सिस्टर लवली के शब्द, "सबको माफ करते हुए जाना और सबसे माफी मांगते हुए जाना," इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गए हैं। इन शब्दों के पीछे का मकसद हरीश की आत्मा को सांसारिक बोझ, नफरत और शिकायतों से आजाद करना था। यह मौत का मातम नहीं, बल्कि एक रूह को पवित्रता के साथ परमात्मा में विलीन करने की प्रक्रिया थी।
13 साल का दर्द और आंखों की वो आखिरी चमक
हरीश राणा की कहानी संघर्ष की पराकाष्ठा है। 13 साल तक शारीरिक कष्ट झेलने के बाद, जब वह बोल पाने में असमर्थ थे, तब भी सिस्टर लवली की बातों पर उनकी आंखों में आई चमक ने यह साबित कर दिया कि संवाद केवल शब्दों से नहीं, रूह से भी होता है। 22 सेकंड के इस वीडियो ने देश को सिखाया कि विदाई भी कितनी गरिमामयी और शांत हो सकती है।
ऐतिहासिक फैसला जो हो गया अमर
हरीश राणा की खबरें और रील इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। रुला देने वाली इन रील्स को देख कोई ही होगा जो अपने आंसू रोक पा रहा हो। एक माता-पिता का दर्द किया होता है जब वो अपने आप अपनी औलाद के लिए मौत मांगे। लेकिन हरीश के केस में ऐसा ही हुआ है। जी हां, 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने हरीश राणा को 'पैसिव इच्छामृत्यु' की अनुमति दी थी, जो भारत में अपनी तरह का पहला व्यावहारिक आदेश माना जा रहा है।
13 साल पहले चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में बी.टेक के छात्र रहे हरीश के साथ एक ऐसा हादसा हुआ जिसने न सिर्फ उन्हें जिंदा लाश बना दिया बल्कि पूरे परिवार को ही तोड़ दिया। अब 13 साल बाद पिता की गुहार और माता के दर्द को देख सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छा मृत्यु दे दी है।



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