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#ALERT: यदि है दिल की बीमारी तो योग करते समय ना करें ये गल्तियां
अधिकतर लोग केवल इतना जानते हैं कि योगासन करने से दिल स्वस्थ रहता है। दुर्भाग्य से योग सभी चीज का इलाज नहीं है, इसकी भी कुछ सीमाएं होती हैं। दरअसल योग से जुड़े ऐसे कई सवाल हैं, जो आजकल कार्डियोलॉजिस्ट से बड़े स्तर पर पूछे जा रहे हैं।
अगर आप दिल के मरीज हैं और योग करते हैं, तो आपको इन सवालों के जवाब जानना बहुत जरूरी है।
# मैं हार्ट डिजीज से पीड़ित हूं। मुझे कौन-से योगासन नहीं करने चाहिए?
आपको ऐसे किसी भी योगासन से बचना चाहिए, जिससे आपके दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

चक्रासन- इस पोजीशन में आपको पीछे की तरफ झुकना होता है और इसमें बहुत अधिक ताकत और उचित सांस की जरूरत होती है। इससे आपके दिल पर दबाव बनता है ताकि वो रक्त को तेजी से पंप कर सके। यही कारण है आपको इस आसन से बचना चाहिए।
हलासन- इस आसन को करते समय आपको अपनी पीठ के बल लेटना पड़ता है, पैर उठाने होते हैं और सिर को पीछे रखना पड़ता है। इस पोजीशन में आपके दिल को दबाव के साथ शरीर के निचले हिस्से में रक्त को प्रसारित करने की आवश्यकता होती है।
कर्नापीड़ासन- यह पोजीशन भी हलासन की तरह ही है लेकिन इसमें ज्यादा एफर्ट की जरूरत होती है। इसमें आपको अपने पैरों को कान के बगल में घुटनों के साथ जमीन के करीब ले जाना होता है। इस आसन से भी दिल पर दबाव बनता है।
सर्वांगासन- आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए। इसमें आपको कंधों के बल खड़ा होना पड़ता है। जिससे शरीर के ऊपरी हिस्से पर दबाव बनता है। दिल को ब्लड सर्कुलेशन के लिए गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करना पड़ता है।

शीर्षासन- इसमें भी आपको उल्टा होना पड़ता है। आपका सिर नीचे होता है और आपके शरीर का वजन भुजाओं पर होता है। इसलिए शरीर के निचले हिस्से में रक्त पंप करने के लिए दिल पर अधिक दबाव बनता है।
विपरीत करनी- इस मुद्रा में आपको पीठ के बल लेटकर पैर उठाने होते हैं और हाथों के समर्थन के साथ हिप्स उठाने पड़ते हैं। इस मुद्रा से भी शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन के लिए दिल पर अधिक दबाव पड़ता है।
# प्राणायाम करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
-अगर आप किसी पुराने रोग से पीड़ित हैं, तो प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
-इसे करते समय हमेशा नाक से सांस लें।

-प्राणायाम करते समय कोई तनाव नहीं होना चाहिए। फेफड़े नाजुक अंग होते हैं इसलिए ध्यान रहे कि जबरदस्ती सांस ना लें।
-सांस लेते समय आवाज ना करें। लयबद्ध और स्थिर रखें।

-भोजन के तुरंत बाद प्राणायाम का अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए। भोजन के बाद कम से कम तीन घंटे के बाद आप प्राणायाम कर सकते हैं। उदहारण के लिए अगर आप शाम को प्राणायाम करते हैं, तो लंच में कुछ हेल्दी और लाइट चीज ही खाएं ताकि वो शाम तक आसानी से पच सके।

-शुरुआती लोगों को सांस नहीं लेनी चाहिए। प्राणायाम की बुनियादी बातों को समझने के बाद ही और किसी विशेषज्ञ शिक्षक के मार्गदर्शन में सांस लेना सीखें।
-अगर आप थके हुए हैं, तो आपको प्राणायाम से बचना चाहिए। प्राणायाम करने से पहले 10-15 मिनट के लिए आराम करें।
-अगर आप योगासन और प्राणायम करते हैं, तो आपको पहले योगासन करना चाहिए। आसन करने के बाद शवासन में आराम करें और फिर प्राणायाम करें।
-फेफड़ों के परेशानी होने पर प्राणायाम ना करें। हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और हर्निया से पीड़ित लोगों के लिए कपालभाटी और भस्त्रिका प्राणायाम बेहतर है।

-लो ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए शितकारी प्राणायाम बेहतर है। सर्दियों में इस प्राणायाम का अभ्यास न करें।
-हाई ब्लड प्रेशर और हर्निया से पीड़ित लोगों को अग्निसार प्राणायाम करने से बचना चाहिए। इसके अलावा पेट के सर्जरी के बाद भी इसे ना करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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