No Tobacco Day 2024 : हुक्का या ई-सिगरेट के हैं शौकीन, तो जान लीजिए सिगरेट की ही तरह कितनी है नुकसानदायक

Hookah vs Vape vs Cigarette On No Tobacco Day 2024 : स्मोकिंग करना आज के समय में फैशन बन गया है, इसलिए अधिकतर लोग सिगरेट पीना काफी पसंद करते हैं। हालांकि, स्मोकिंग सिर्फ सिगरेट पीने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आजकल हुक्का व वैपिंग का चलन भी काफी बढ़ गया है। इसे लोग फैशन स्टेटमेंट मानने लगे हैं। चूंकि सिगरेट को हेल्थ के लिए काफी नुकसानदायक माना जाता है, इसलिए लोगां का रुझान हुक्का और वैपिंग की तरफ काफी बढ़ने लगा है। यहां तक कि कम उम्र के लड़के-लड़कियां भी हुक्का और वैपिंग से स्मोक करते हैं। जबकि इससे भी सेहत को उतना ही नुकसान होता है।

राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में हुक्का पीढ़ी दर पीढ़ी से पिया जाता रहा है तो अब भी लोगों को इसका सेवन करने में कोई बुराई नहीं लगती। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन एक घंटे का हुक्का सेशन 100-400 सिगरेट पीने के बराबर हो सकता है।

Hookah vs Vape vs Cigarette On No Tobacco Day 2024

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी बार कश लेते हैं और आप कितनी गहरी साँस लेते हैं और यह सेशन कितने समय तक चलता है। तो चलिए आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर हम आपको बता रहे हैं कि सिगरेट, हुक्का या वैपिंग का सेवन करने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं-

सिगरेट पीने के नुकसान

सिगरेट पीना आज के समय में फैशन स्टेटमेंट माना जाता है, जबकि यह सेहत के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक है। सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक केमिकल्स होते हैं, जिनमें कम से कम 70 ज्ञात कार्सिनोजेन्स शामिल हैं। सिगरेट के सेवन से सिर्फ फेफड़ों का कैंसर होने का रिस्क ही नहीं बढ़ जाता है, बल्कि इसके साथ-साथ मुंह, गले, ग्रासनली, अग्न्याशय, मूत्राशय और अन्य तरह के कैंसर भी हो सकते हैं। यह श्वसन रोग जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस का प्रमुख कारण है। सिगरेट दिल के दौरे और स्ट्रोक आदि के जोखिम को बढ़ाता है। सिगरेट पीते समय उसाक धुआं आसपास के लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जो सांस के जरिए उस धुएं को इनहेल करते हैं।

वैपिंग के नुकसान

वैपिंग एक तरह से ई-सिगरेट है और यंगस्टर्स में यह काफी पॉपुलर है। अमूमन इसे वहां पर ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जहां पर स्मोकिंग करना निषेध होता है। ऐसा माना जाता है कि इसमें सिगरेट के धुएं की तुलना में कम विषैले रसायन होते हैं, लेकिन वास्तव में इसमें निकोटीन और फ्लेवरिंग केमिकल्स होते हैं, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक है। यह फ्लेवरिंग केमिकल्स आपको एडिक्ट भी बनाते हैं। चूंकि इसमें बैटरी भी होती है तो उससे जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं। वैपिंग से सांस से जुड़ी बीमारियां, फेफड़ों में जलन और डायसिटाइल एक्सपोज़र से “पॉपकॉर्न लंग“ जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, निकोटीन हृदय संबंधी समस्याओं के लिए एक जोखिम कारक है।

हुक्का के नुकसान

चूंकि हुक्के का सेवन सालों से किया जाता रहा है, इसलिए लोग इसे कम नुकसानदायक मानते हैं। जबकि एक घंटे का हुक्का सेशन 100-400 सिगरेट पीने के बराबर हो सकता है। यह आपके कश लेने पर निभर्र करता है। एक सामान्य हुक्का सेशन में 20-200 कश लगते हैं, जबकि एक सिगरेट में 8-12 कश लगते हैं। हुक्का पीने से होने वाले नुकसान को देखते हुए ही कर्नाटक, मध्यप्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु आदि कई राज्यों में इस पर बैन लगा दिया गया है। हुक्का के धुएं में निकोटीन, टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, हैवी मेटलऔर कैंसर पैदा करने वाले केमिकल्स होते हैं। वाटर फिल्टरेशन के बावजूद, हुक्का के धुएं में सिगरेट के धुएं जैसे ही कई जहरीले रसायन होते हैं। इससे हृदय रोग और सांस से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाताहै। चूंकि इसमें माउथपीस शेयर किया जाता है तो इससे तपेदिक, हेपेटाइटिस और हर्पीज जैसी संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अंत में, यही कहा जा सकता है कि चाहे सिगरेट हो, वैपिंग हो या फिर हुक्का, आपको किसी भी तरह की स्मोकिंग से दूरी ही बनानी चाहिए। स्मोकिंग सिर्फ आपके फेफड़ों ही नहीं, बल्कि कई ऑर्गन को नुकसान पहुंचाती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Thursday, May 30, 2024, 7:00 [IST]
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