बेहद शांत दिखता है ये समुद्री जीव लेक‍िन कोबरा सांप से भी ज्‍यादा है जहरीला, इसके एक डंक में छ‍िपी है मौत

कुछ दिन पहले तिरुवनंतपुरम से एक खबर सामने आई थी। जहां एक 57 वर्षीय मछुआरे की आंख में मछली पकड़ने के दौरान जेलीफिश फंस गई थी। जिस वजह से उस मछुआरे के आंखों में सूजन आ गई। बढ़ते हुए सूजन की वजह से उस मछुआरे को दो दिन तक अस्‍पताल से इलाज भी चला। समस्‍या बढ़ने की वजह से जब उसे उसे मेडिकल कॉलेज ले जाने का फैसला किया। उसकी रास्‍ते में ही मौत हो गई।

केरल के समुद्री तटों में बढ़ती जेलीफ‍िश की संख्‍या के वजह से वहां के स्‍थानीय मछुआरे की चिंता बढ़ती जा रही है। आपको शायद पता नहीं होगा लेक‍िन बता दें क‍ि जेलीफिश एक समुद्री जीव है जिसके एक डंक से इंसान की मौत हो जाती है।

How Dangerous are jellyfish stings to Human

इसके काटने से इतना दर्द होता है जिसकी वजह से व्‍यक्ति को सांस लेना मुश्किल हो जाता है। आइए जानते हैं इस फ‍िश से जुड़े फैक्‍ट और जेलीफ‍िश क‍ितने खतरनाक होते हैं।

क‍ितना खतरनाक होते हैं जेलीफ‍िश?

वैसे तो जेलीफ‍िश दो प्रकार की होती है एक सामान्‍य और दूसरी जहरीली। बताया जाता है क‍ि जहरीली जेलीफ‍िश का जहर कोबरा सांप से भी जहरीला होता है। जेलीफ‍िश का जहर शरीर की मुख्‍य प्रणालियों को प्रभावित करती है। इसके डंक मारने से दर्द का अहसास होता है साथ ही घाव भी हो सकता है।
दरअसल जेल‍ीफ‍िश के रेशेनुमा पैरों में बेहद घातक जहर होता है। यह जहर इतना खतरनाक होता है जब यह फ‍िश क‍िसी व्‍यक्ति को डंक मारता है तो इससे इंसान को कार्डियक अरेस्‍ट या लकवा मार सकता है।

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जेलीफ‍िश के डंक से कैसे बचे

- बारिश के दिनों में समुद्री तटों पर रेनबूट का इस्‍तेमाल करें जो आपके पांवों को पूरा कवर कर सकें।
- पानी में या समुद्र तट पर किसी भी जेलीफ़िश को न छुएं।
- पूरे शरीर को ढकने वाला लाइक्रा वेटसूट और वाटरप्रूफ जूते पहनें।
- जेलीफ‍िश के डंक के घाव पर कम से कम 30 सेकेंड तक लगातार सिरका डालें, जिससे राहत म‍िलेगी।
- घाव पर पानी न लगाएं और घाव पर रेत न रगड़ें।
- जेलीफ‍िश ज्‍यादात्तर गर्म जलस्‍त्रोत पर पाई जाती है, तो ऐसी जगह जाने से बचें।
- जेल‍ीफ‍िश के काटने पर स्थिर रहे और इसे रगड़े नहीं।
- ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं।

जेलीफ‍िश के घाव पर पेशाब करने से म‍िलता है आराम?

लोगों के बीच एक म‍िथक है क‍ि अगर जेलीफिश का डंक लग जाए तो उस पर पेशाब करने से तुरंत आराम मिलता है। मेयो क्लीनिक के अनुसार अगर आपको जेलीफिश काट जाए तो सबसे पहले डंक को संभलकर न‍िकाले और मरीज को अस्‍पताल ले जाएं।

मछली नहीं होती जेलीफ‍िश

जेलीफिश के नाम के साथ फिश जरूर लगा है लेकिन ये मछली नहीं होती। मछलियों के शरीर में हड्डियां होती हैं। वो पानी में रहने के लिए गिल्‍स का इस्‍तेमाल करती हैं जबक‍ि जेलीफ‍िश में कोई हड्डी नहीं होती है। ये अपने मेंब्रेन यानी त्‍वचा के जरिए सांस लेते हैं।

जेलीफिश खाते भी है लोग

दुनियाभर में जेलीफिश की 25 ऐसी प्रजातियां है जिनका खाने में क‍िया जाता है। इन्‍हें सलाद, अचार और नूडल्स में इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।

जेलीफ‍िश की ये प्रजाति है अमर

जेलीफिश की एक प्रजाति ऐसी है जो कभी नहीं मरती है। इसका नाम टूरिटोपसिस डॉर्नी है। इस प्रजाति की जेलीफिश जब बुजुर्ग हो जाती है तो समुद्र की सतह से चिपक जाती है और कुछ सालों बाद खुद को जेनेटिकली जीवित कर लेती हैं। फ‍िर से ये जेलीफिश अपने युवावस्‍था में पहुंच जाती है। इनकी खासियत यह है क‍ि ये अपने शरीर से अपने जैसा क्‍लोन पैदा कर सकती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Friday, July 5, 2024, 20:39 [IST]
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