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कैसे होती है लंग्स कैंसर की शुरुआत ? जानें फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण
कैंसर कई तरह का होता है, लेकिन फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) दुनिया में सबसे ज्यादा मौतों का कारण बनने वाला कैंसर है। फेफड़ों का कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों में कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित और बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर बनती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। समय पर इलाज ना मिलने से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: नॉन-स्मॉल सेल (NSCLC) और स्मॉल सेल (SCLC)। 85% से अधिक मामलों में नॉन-स्मॉल सेल प्रकार पाया जाता है, जबकि 15% में स्मॉल सेल कैंसर देखा जाता है। नॉन-स्मॉल सेल धीरे-धीरे और स्मॉल सेल बहुत तेज़ी से फैलता है। फेफड़ों का कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं, जिससे लोग इसे सामान्य खांसी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल चुकी होती है। ऐसे में, अगर आपको लगातार खांसी या सांस लेने में दिक्क्त जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें। आज इस लेख में डॉ. राहुल केंद्रे, लंग्स ट्रांसप्लांट फिजिशियन, डीपीयू सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, पिंपरी, पुणे से जानेंगे लंग्स कैंसर के शुरुआती लक्षणों के बारे में।

फेफड़ों के कैंसर के कारण - Causes Of Lungs Cancer In Hindi
फेफड़ों के कैंसर के ज्यादातर मामलों में धूम्रपान ही प्रमुख कारण देखने को मिलता है। हालांकि, इसके कई और कारण भी हो सकते हैं, जैसे -
पैसिव स्मोकिंग
वायु प्रदूषण
रेडॉन गैस
जेनेटिक कारण
फेफड़ों में कैंसर होने के शुरुआती लक्षण - Early Symptoms Of Lungs Cancer In Hindi
लगातार खांसी, जो समय के साथ ठीक न हो
आवाज में भारीपन या बदलाव
सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ
खांसी के साथ बलगम या खून आना
सांस लेने में घरघराहट
सीने में दर्द या जकड़न
अचानक वजन कम होना
कमजोरी और थकावट
भूख कम लगना
समय रहते जांच है जरूरी
फेफड़ों के कैंसर का सबसे प्रभावी इलाज तभी संभव है, जब इसे शुरुआती स्टेज में पहचाना जाए। जो लोग स्मोकिंग करते हैं या पहले करते थे, उन्हें हर साल एक बार लो डोज़ सीटी स्कैन (LDCT) से फेफड़ों की जांच करवानी चाहिए। यह जांच बहुत कम रेडिएशन के साथ कैंसर को शुरुआती स्तर पर पहचान लेती है, जिससे इलाज आसान और असरदार होता है।
नॉन-स्मोकर्स भी रहें सतर्क
अधिकतर लोगों को लगता है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ स्मोकर्स को होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, धूल-धुआं, वायु गुणवत्ता में गिरावट और पैसिव स्मोकिंग के कारण धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ गया है। इसलिए धूम्रपान न करने वाले भी फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। जैसे -
वायु प्रदूषण से खुद का बचाव करें।
दूसरे लोगों के धूम्रपान से बचाव करें।
घर और कार्यस्थल में अच्छी वेंटिलेशन रखें।
प्रदूषित क्षेत्रों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें तथा मास्क पहनें।
लकड़ी या कोयला जलाने से बचें या साफ ईंधन का इस्तेमाल करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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