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Kidney Function Test: खराब होने से पहले ही किडनी की सेहत का हाल बता देगा ये 'टेस्ट', साल में 1 बार जरूर कराए
Kidney Function Test : किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो बिना किसी के आसानी से जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसे शरीर की पावरफुल केमिकल फैक्ट्री कहा जाता है, क्योंकि यह हानिकारक केमिकल को शरीर से बाहर निकालकर खून में अच्छे तत्वों को वापस भेज देती है। किडनी शरीर की तरलता को संतुलित रखती है, जिससे शरीर का तापमान स्थिर रहता है और किडनी हार्मोन का उत्पादन भी करती है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है और विटामिन डी को सक्रिय कर हड्डियों को मजबूत बनाती है। इसके अलावा, किडनी रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) का उत्पादन नियंत्रित करती है।
हालांकि, जब किडनी पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, तो इसे समस्याएं होने लगती हैं। आजकल के बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसलिए किडनी फंक्शन टेस्ट कराना जरूरी है, ताकि हम गंभीर बीमारियों से बच सकें और किडनी के स्वास्थ्य को बनाए रख सकें।

क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, किडनी का काम हार्मोन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना है, साथ ही यह लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण और विटामिन डी को बनाए रखने में भी मदद करती है। आजकल हर चार में से एक व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, जो किडनी के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। गलत खानपान और केमिकल युक्त आहार किडनी पर अतिरिक्त लोड डालते हैं, क्योंकि किडनी को शरीर से हानिकारक केमिकल्स निकालने का कार्य करना पड़ता है।
इसलिए, 30 साल के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए, ताकि किडनी की कार्यक्षमता को सही से समझा जा सके। विशेष रूप से जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज या फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें किडनी फंक्शन टेस्ट अनिवार्य रूप से कराना चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का जल्दी पता चल सके।
टेस्ट में पता कर सकते हैं आप ये सब कुछ पता
किडनी टेस्ट से कई महत्वपूर्ण चीजें पता चलती हैं:
ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR): यह किडनी की कार्यक्षमता को मापता है। अगर GFR 90 से ज्यादा है, तो किडनी सही काम कर रही है।
क्रिएटिनिन लेवल: यह किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। उच्च स्तर किडनी की खराब कार्यक्षमता का संकेत देता है।
बाइल और यूरिया लेवल: इनसे किडनी की अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की क्षमता का पता चलता है।
यूरिन जांच: इसमें किडनी स्टोन, संक्रमण, प्रोटीन, क्रिएटिनिन क्लीयरेंस, शुगर, ब्लड, पस, बैक्टीरिया आदि की जानकारी मिलती है।
एसीआर: एल्ब्यूमिन प्रोटीन का पता लगाया जाता है, और इसका नॉर्मल रेंज 30 से कम होना चाहिए।
यह टेस्ट किडनी की सही स्थिति को समझने में मदद करता है।
टेस्ट कराते हुए इन बातों का रखें ध्यान
किडनी फंक्शन टेस्ट करवाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि आपको सही परिणाम मिल सकें।
पहली यूरिन का इस्तेमाल: किडनी फंक्शन टेस्ट के लिए सुबह का पहला यूरिन सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अधिक सटीक परिणाम देता है।
एल्कोहल और नशीले पदार्थों का सेवन: टेस्ट से कम से कम 24 घंटे पहले एल्कोहल और नशीले पदार्थों का सेवन बंद कर दें, क्योंकि ये किडनी पर असर डाल सकते हैं।
उपवास (फास्टिंग): कई बार डॉक्टर टेस्ट से 10-12 घंटे पहले उपवास रखने की सलाह देते हैं। इस दौरान आप केवल पानी पी सकते हैं।
खून की जांच: किडनी फंक्शन टेस्ट के लिए डॉक्टर खून का सैंपल निकालकर उसकी जांच करते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप सही तरीके से तैयार हों।
इन बातों का पालन करने से टेस्ट के परिणाम सही और सटीक मिलेंगे, जिससे आपको बेहतर जानकारी मिलेगी।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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