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आपकी रसोई में छिपा जहर! क्या आपके खाने में भी मिल रहा है प्लास्टिक? जानें कैसे बनाएं प्लास्टिक-फ्री किचन?
How To Reduce Microplastic In Food: क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजाना की रसोई, जहां से आपके परिवार के लिए खाना तैयार होता है, वहीं सबसे बड़ा खतरा भी छिपा हुआ है? जी हां, वैज्ञानिकों की रिपोर्ट बताती हैं कि हमारी रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तन, पैकिंग मटेरियल, प्लास्टिक कंटेनर और यहां तक कि नमक और मसालों में भी माइक्रोप्लास्टिक मौजूद है। माइक्रोप्लास्टिक यानी बेहद छोटे-छोटे प्लास्टिक के कण, जो हमारी आंखों से दिखाई नहीं देते लेकिन धीरे-धीरे शरीर के अंदर पहुंचकर गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकते हैं।
यह कण हार्मोनल असंतुलन से लेकर पाचन तंत्र की गड़बड़ी और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतों और स्मार्ट किचन चॉइसेज से हम माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि आपकी रसोई में ये खतरनाक प्लास्टिक कहां-कहां छिपा है और इसे कम करने के क्या उपाय हैं।

नाश्ते से लेकर डिनर तक हम कैसे खाते हैं प्लास्टिक?
आप सोच रहे होंगे कि हम आखिर कैसे प्लास्टिक खाते हैं? क्या प्लास्टिक कोई खाने की चीज है? लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनजाने में ही सही लेकिन आप सुबह के नाश्ते से लेकर डिनर तक हर चीज में कहीं न कहीं प्लास्टिक खाते हैं। जी हां, ये नाश्ता बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्पैचुला से निकलते हैं, आपके बच्चे के बैग में रखी प्लास्टिक की पानी की बोतल से रिसते हैं और आपकी मेज पर रखे चाय के कप में तैरते हैं । ये हमारे द्वारा खाए जाने वाले खाने में भी गहराई तक समाए रहते हैं, हैमबर्गर से लेकर शहद तक। जी हां, जिस कंटेनर में शहद रखा होता है उसमें भी और हैमबर्गर जिसमें रैप किया जाता है उसमें भी। इसके अलावा आपके नल से जो पानी आ रहा है उसमें भी प्लास्टिक के कण होते हैं। जैसे कि प्लास्टिक के पाइप के द्वारा पानी आता और आप जिस नल का इस्तेमाल कर रहे हैं वो भी प्लास्टिक का है।
स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला सच
109 देशों में किए गए एक अध्ययन में हैरान करने वाला सच सामने आया है कि कि 2018 में लोगों द्वारा आमतौर पर खपत किए गए प्लास्टिक की मात्रा 1990 की तुलना में छह गुना से भी ज्यादा हुई है। बता दें कि माइक्रोप्लास्टिक फल और सब्जियों , शहद , ब्रेड , डेयरी उत्पादों , मछली और मांस में पाए जाते हैं। चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये अंडे की जर्दी में भी पाए जाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक हमारे भोजन में तब पहुंच सकते हैं जब पौधे जड़ों के माध्यम से इन्हें ग्रहण करते हैं , या जानवर इन्हें चारे के रूप में खाते हैं। जैसे कि गाय या भैस प्लास्टिक खाएंगे तो उनसे मिलने वाले दूध में माइक्रोप्लास्टिक के कण होंगे ही जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। वहीं अगर आप किसी ऐसी जमीन पर खेती करते हैं जो पहले औद्योगिक थी और उसकी मिट्टी दूषित है, तो उन पौधों के मिट्टी में प्रदूषक जमा होने की संभावना है।
नमक से लेकर चावल तक कैसे खा रहे हैं प्लास्टिक
आपको जानकर हैरानी होगी कि आप नमक से लेकर चावल तक के रूप में माइक्रोप्लास्टिक का सेवन कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि प्लास्टिक बैग में पैक चावल से लेकर चिकन तक में प्लास्टिक के कण होते हैं लेकिन उन्हें धोकर कम किया जा सकता है। मगर कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें धोया नहीं जा सकता है, जैसे नमक, चीनी, आटा, तेल, घी, शहद ये सब प्लास्टिक के बैग या जार में पैक होते हैं जिस वजह से इनमें माइक्रोप्लास्टिक के कण विद्यमान होते हैं।
कैसे बनाएं प्लास्टिक फ्री किचन?
1. प्लास्टिक कंटेनर की जगह ग्लास और स्टील इस्तेमाल करें। यह हेल्दी और लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं।
2. गरम खाना कभी भी प्लास्टिक डिब्बों में न रखें, बता दें कि ऐसा करने से प्लास्टिक से केमिकल और माइक्रोप्लास्टिक रिलीज करता है। इसके लिए स्टेनलेस स्टील या ग्लास कंटेनर चुनें।
3. आप फिल्टर्ड और स्टील बोतल में पानी पिएं या कॉपर बोतल का उपयोग करें। यह हेल्दी भी है और माइक्रोप्लास्टिक फ्री भी।
4. किचन में प्लास्टिक पैकिंग वाले फूड्स कम करें जैसे चिप्स, स्नैक्स और रेडी-टू-ईट फूड्स प्लास्टिक पैकिंग में आते हैं। कोशिश करें ताजे फल-सब्जी और खुला अनाज खरीदें।
5. लकड़ी या स्टील के कुकिंग टूल्स का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक के चम्मच, स्पैचुला और बोर्ड को बाय कहकर लकड़ी या स्टील के विकल्प चुनें।
6. जितना हो सके पुराने प्लास्टिक को रीसायकल करें और नए प्लास्टिक सामान की खरीदारी से बचें।
7. आजकल मार्केट में बांस (Bamboo) और मिट्टी से बने कई प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं। ये किफायती और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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