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सेहत के लिए जहर से कम नहीं है नॉन-स्टिक कुकवेयर, ICMR ने बताए इसके नुकसान
अपनी किचन में हम सभी अपनी कुकिंग को अधिक आसान बनाना चाहते हैं और इसलिए कई तरह के अप्लाइंसेस और कुकवेयर का इस्तेमाल करने का चलन काफी बढ़ गया है। हेल्थ कॉन्शियस लोग नॉन-स्टिक कुकवेयर का इस्तेमाल करना अधिक पसंद करते हैं। दरअसल, इस तरह के कुकवेयर में नॉन-स्टिक कोटिंग होती है और इसलिए जब इनका इस्तेमाल किया जाता है तो ऑयल की बहुत कम जरूरत पड़ती है।
लेकिन वास्तव में नॉन-स्टिक कोटिंग का इस्तेमाल करना सेहत के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी इनके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है। आईसीएमआर ने बीते दिनों एक रिवाइज्ड डाइटरी गाइडलाइन्स जारी की और इस गाइडलाइन में उन्होंने नॉन-स्टिक कुकवेयर से होने वाले नुकसान और उसके बेहतरीन विकल्प के बारे में बताया-

हाल ही में आईसीएमआर ने रिवाइज्ड डाइटरी गाइडलाइन्स जारी की और इसमें उन्होंने नॉन-स्टिक बर्तनों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। आईसीएमआर के अनुसार, नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करने से हार्मोनल असंतुलन और कैंसर जैसे कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसमें टेफ्लॉन की कोटिंग होती है। दरअसल, पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन, जिसे आमतौर पर टेफ्लॉन के नाम से जाना जाता है, एक सिंथेटिक रसायन है जिसमें कार्बन और फ्लोरीन परमाणु होते हैं।
1930 में बना टेफ्लॉन
टेफ्लॉन को पहली बार 1930 के दशक में बनाया गया था। यह बर्तनों को एक नॉन-स्टिक कोटिंग प्रदान करता है। इसमें खाना पकाना और साफ करना अधिक सुविधाजनक होता है। इतना ही नहीं, इसे बनाते समय इसमें खाना बनाते समय भी तेल का कम इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में हुए शोध के अनुसार नॉन-स्टिक कुकवेयर का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।
टेफ्लॉन कुकवेयर का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए?
नॉन-स्टिक कुकवेयर को लेकर चिंता का विषय पेरफ्लूरूक्टेनोइक एसिड (पीएफओए) और पेरफ्लूरूक्टेनसल्फोनिक एसिड (पीएफओएस) है, जो टेफ्लॉन जैसे नॉन-स्टिक कोटिंग्स को बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल है। आईसीएमआर का कहना है कि टेफ्लॉन कुकवेयर को जब 170 डिग्री सेल्सियस से अधिक के अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह भोजन में बड़ी मात्रा में जहरीले धुएं और हानिकारक रसायनों को छोड़ सकते हैं। इस धुएं के कारण व्यक्ति को लेने से रेस्पिरेटरी समस्याएं, थायरॉयड डिसऑर्डर और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर भी हो सकते हैं। लगातार इस धुएं के संपर्क में आने से फेफड़ों में जलन पैदा होती है। इससे फ्लू जैसे लक्षण पैदा भी हो सकते हैं, जिन्हें पॉलिमर फ्यूम फीवर कहा जाता है।
नॉन-स्टिक कुकवेयर के विकल्प क्या हैं?
नॉन-स्टिक कुकवेयर के हेल्दी विकल्प के रूप में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनमें खाना पकाने के लिए न केवल कम तेल की आवश्यकता होती है, बल्कि वे हर तरफ से एकसमान रूप से गर्म होते है, जिससे वे भोजन के पोषण तत्वों के संतुलन को बनाया रखा जा सकता है।
इसके अलावा, आईसीएमआर ग्रेनाइट पत्थर के बर्तनों को इस्तेमाल करना भी सुरक्षित मानते हैं, बशर्ते कि वे पीएफओए, पेरफ्लूरूक्टेन सल्फोनिक एसिड (पीएफओएस) और पीटीएफई की केमिकल कोटिंग से मुक्त हों। ग्रेनाइट के बर्तन एनर्जी एफिशिएंट माने जाते हैं, क्योंकि उनमें गर्मी लंबे समय तक बरकरार रहती है।
आईसीएमआर के अनुसार, फूड-ग्रेड स्टेनलेस स्टील में पकाया गया भोजन भी एक सुरक्षित विकल्प है क्योंकि ऐसे बर्तन लीक नहीं करते हैं, टिकाऊ होते हैं, साफ करने में आसान होते हैं और एक हाइजीनिक विकल्प माने जाते हैं। इसके अलावा, सिरेमिक कुकवेयर भी सुरक्षित हैं यदि उन्हें साफ किया जाए और अच्छी तरह से मेंटेन रखा जाए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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