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क्यों किसी को अचानक आने लगते हैं मिर्गी के दौरे, एक्सपर्ट से जानें वजह, लक्षण और बचाव
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस (International Epilepsy Day) हर साल फरवरी के दूसरे सोमवार को मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। 2025 में यह दिवस 10 फरवरी को मनाया जाएगा। मिर्गी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ बिगड़ सकती है। यदि इसके लक्षणों का सही तरीके से इलाज न किया जाए, तो यह मरीज के लिए गंभीर परेशानी बन सकती है।
मिर्गी (एपिलेप्सी) एक क्रोनिक ब्रेन डिजीज है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं, जिससे व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है। यह दुनियाभर में 5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित करती है। WHO के अनुसार, मिर्गी के अधिकतर मामले निम्न आय वाले देशों में पाए जाते हैं। भारत में भी लाखों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। मिर्गी के कारण दिमागी तरंगों में असामान्य बदलाव होते हैं, जिससे बेहोशी, झटके या असामान्य हरकतें हो सकती हैं। सही इलाज और जागरूकता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन सामाजिक कलंक के कारण मरीजों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मिर्गी के दौरे की वजह
मिर्गी के दौरे कई कारणों से हो सकते हैं। फिजियोलॉजिस्ट डॉक्टर पूजा चौधरी के अनुसार, 70% मरीज सही इलाज से ठीक हो सकते हैं। जन्म के समय जटिल डिलीवरी, दिमागी संक्रमण, सिर पर चोट, तेज बुखार और शरीर में ग्लूकोज की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। इनसे दिमागी तरंगों में असामान्य बदलाव होते हैं, जिससे दौरे पड़ सकते हैं। सही समय पर चिकित्सा और जागरूकता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
जेनेटिक भी हो सकती है वजह
एक्सपर्ट के अनुसार, मिर्गी जेनेटिक भी हो सकती है। यदि परिवार में किसी को दौरे पड़ते हैं, तो जीन के कारण बच्चों में भी इसकी संभावना बढ़ जाती है। इसे नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। बीमारी का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन और ईईजी जैसे टेस्ट किए जाते हैं। सही समय पर जांच और इलाज से मिर्गी को नियंत्रित किया जा सकता है।
मिर्गी का इलाज
मिर्गी के इलाज में सबसे जरूरी है समय पर दवा लेना। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा लंबे समय तक चलती है। यदि मरीज को आखिरी दौरा आज पड़ा हो, तो भी दवा कम से कम तीन साल तक लगातार लेनी पड़ती है। नियमित इलाज से दौरे नियंत्रित किए जा सकते हैं, इसलिए मरीज को डॉक्टर की सलाह का पालन करना आवश्यक है।
मिर्गी का दौरा पड़ने की वजह
मिर्गी का दौरा पड़ने पर घबराने की बजाय मरीज को सुरक्षित रखना जरूरी है। उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं, लेकिन दौरे के दौरान टाइट पकड़ना गलत है, क्योंकि इससे शरीर की अकड़न बढ़ सकती है और हड्डी टूटने का खतरा रहता है। इसके अलावा, मरीज को दौरे के दौरान पानी नहीं देना चाहिए, क्योंकि यह सांस रुकने का कारण बन सकता है। सही देखभाल से मरीज को सुरक्षित रखा जा सकता है।
दौरा पड़ने के समय करें ये 3 काम
- एक्सपर्ट के अनुसार, मिर्गी का दौरा पड़ने पर घबराने की बजाय सावधानी बरतनी चाहिए। मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं और उसे टाइट पकड़ने से बचें, क्योंकि इससे शरीर की अकड़न बढ़ सकती है और हड्डी टूटने का खतरा रहता है।
- दौरे के दौरान मरीज को पानी नहीं देना चाहिए। उसे तुरंत एक तकिए के सहारे लिटा दें, जिससे उसे आराम मिले।
- आमतौर पर दौरा 1 से 2 मिनट तक रहता है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, यदि सावधानियां नहीं बरती गईं, तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। सही देखभाल से स्थिति नियंत्रित की जा सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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