International Epilepsy Day 2025: मिर्गी और दौरे में होता है अंतर, एक्‍सपर्ट से जानें किससे है ज्‍यादा खतरा?

International Epilepsy Day 2025: आज अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस है। मिरगी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें बार-बार मस्तिष्‍क पर दौरे पड़ते हैं। पर आपको यह जानना जरूरी है कि मिर्गी और दौरा एक ही चीज नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण होती है और इसके लिए जीवनभर इलाज की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, दौरा कई कारणों की वजह से आ सकता है, जैसे तेज बुखार, सिर में चोट या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।

मिर्गी को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सही दवाओं और इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन हर दौरा मिर्गी नहीं होता, इसका निदान आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी और दौरा दो अलग बीमारियां हैं। मिर्गी में बार-बार दौरे पड़ते हैं, जबकि हर दौरा मिर्गी नहीं होता। मिर्गी का इलाज लंबा चलता है, जबकि दौरे का उपचार कारण पर निर्भर करता है।

International Epilepsy Day 2025

मिर्गी क्‍या है?

मिर्गी एक क्रॉनिक बीमारी है, जैसे अस्थमा, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर। इसमें दो या अधिक बार दौरे पड़ सकते हैं, जो मस्तिष्क में पूर्व की किसी चोट, जन्मगत समस्या या अन्य कारणों से होते हैं। यह एपिसोडिक रूप में प्रकट होती है। मिरगी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सिर की पुरानी चोट, ब्रेन डिसऑर्डर या आनुवंशिक कारक शामिल हैं।

दौरे और मिरगी में क्या है अंतर?

न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर के अनुसार, दौरे दो प्रकार के होते हैं। एक होता है एक्यूट सिंपटोमैटिक सीजर, जिसे प्रोवोक सीजर भी कहा जाता है। यह मस्तिष्क में किसी बीमारी या असंतुलन के कारण 24 घंटे के भीतर हो सकता है।

सिर में चोट, स्ट्रोक, शरीर में सोडियम, कैल्शियम या शुगर की कमी, या अत्यधिक शराब सेवन से भी ऐसे दौरे आ सकते हैं। यह मिरगी नहीं होती, बल्कि अस्थायी समस्या होती है।

प्रोवोक सीजर का इलाज लंबे समय तक नहीं चलता। आमतौर पर 1-2 हफ्ते की दवा के बाद यह ठीक हो जाता है, क्योंकि इसमें असली कारण का इलाज किया जाता है, न कि मिरगी का।

मिर्गी और दौरे के इलाज में अंतर

मिर्गी और दौरे में अंतर करना जरूरी है, जिसे न्यूरोलॉजिस्ट या आपातकालीन डॉक्टर तय करते हैं। एक्यूट सिंपटोमैटिक सीजर (दौरे) आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते की दवा से ठीक हो जाते हैं, क्योंकि यह मूल बीमारी से जुड़े होते हैं।

वहीं, मिर्गी का इलाज लंबा चलता है, कम से कम 2 साल या कई मामलों में जीवनभर। मिर्गी जन्मजात भी हो सकती है या किसी अन्य कारण से विकसित हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ मामलों में एमआरआई रिपोर्ट सामान्य होती है, फिर भी व्यक्ति को मिरगी होती है। इसका इलाज मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और लक्षणों पर निर्भर करता है।

मिर्गी और दौरे के लक्षणों में अंतर

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें बार-बार दौरे आते हैं। इसके लक्षणों में शरीर अकड़ना, अचानक गिरना, आंखों के सामने अंधेरा छाना, मुंह से झाग आना, हाथ-पैर पटकना, पेशाब निकल जाना और आंखों की पुतलियों का ऊपर चढ़ जाना शामिल हैं।

वहीं, दौरा (सीजर) अस्थायी होता है और इसके लक्षण अलग हो सकते हैं, जैसे अस्थायी भ्रम, गोल-गोल घूमना, हाथ-पैर का अनियंत्रित हिलना, चेतना खोना, डर या चिंता जैसी भावनाएं और बेहोशी। मिर्गी में लक्षण बार-बार आते हैं, जबकि दौरे का कारण ठीक होने पर समस्या खत्म हो सकती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Monday, February 10, 2025, 9:40 [IST]
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