इजरायल के PM नेतन्याहू ने पोस्ट कर दी कैंसर की जानकारी, जानें पुरुषों के लिए कितनी घातक है यह बीमारी

Benjamin Netanyahu Prostate Cancer: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के स्वास्थ्य को लेकर आई खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। 76 साल के नेतन्याहू ने खुद सोशल मीडिया के जरिए ये बताया है कि वो प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) के शुरुआती चरण से जूझ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी शारीरिक स्थिति बहुत अच्छी है। नेतन्याहू की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उनके प्रोस्टेट में 1 सेंटीमीटर से भी छोटा एक घातक ट्यूमर पाया गया था, जिसका सफल इलाज किया जा चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, कैंसर का पता शुरुआती चरण में ही चल गया था और यह शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैला है। जैसे ही ये खबर सामने आई उसके बाद से इस बीमारी के बारे में जानने के लिए लोग सर्च कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि पुरुषों के लिए 'प्रोस्टेट कैंसर' कितना खतरनाक है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं। आइए इस बीमारी के बारे में अब विस्तार से जान लेते हैं।

क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर जिससे जूझ रहे हैं PM नेतन्याहू?

सबसे पहले ये जान लेते हैं कि आखिर क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर जिसके दर्द से पीएम नेतन्याहू जूझ चुके हैं। दरअसल, प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक गंभीर रोग है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) में विकसित होता है। यह ग्रंथि अखरोट के आकार की होती है और केवल पुरुषों में पाई जाती है। इसका मुख्य कार्य वीर्य (Seminal Fluid) का निर्माण करना है जो शुक्राणुओं को पोषण और सुरक्षा प्रदान करता है। आमतौर पर यह कैंसर बहुत धीमी गति से बढ़ता है और शुरुआत में ग्रंथि तक ही सीमित रहता है। अगर इसका पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है, जैसे नेतन्याहू के मामले में हुआ है।

क्या होते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण?

प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH) जैसे ही लगते हैं, इसलिए पुरुष इसे नजरअंदाज कर देते हैं। आपको इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:

पेशाब संबंधी समस्याएं: बार-बार पेशाब आना, खासकर रात के समय।

प्रवाह में कमी: पेशाब की धार का कमजोर होना या रुक-रुक कर आना।

खून आना: पेशाब या वीर्य में खून के अंश दिखाई देना।

दर्द: पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना।

हड्डियों में दर्द: यदि कैंसर फैलने लगे, तो पीठ, कूल्हे या पेल्विक एरिया की हड्डियों में लगातार दर्द रह सकता है।

वजन गिरना: बिना किसी कारण के अचानक वजन कम होना और अत्यधिक थकान।

इलाज और बचाव के तरीके

PM नेतन्याहू के मामले में डॉक्टरों ने रेडिएशन थेरेपी का सहारा लिया, जो हाल ही में पूरी हुई है। प्रोस्टेट कैंसर का इलाज इसकी स्टेज पर निर्भर करता है:

सक्रिय निगरानी: यदि कैंसर बहुत छोटा और शुरुआती है, तो डॉक्टर तुरंत इलाज के बजाय नियमित जांच और निगरानी की सलाह देते हैं।

सर्जरी: ग्रंथि के उस हिस्से या पूरी ग्रंथि को हटा दिया जाता है जहां ट्यूमर होता है।

रेडिएशन थेरेपी: उच्च ऊर्जा वाली किरणों के जरिए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

हार्मोन थेरेपी: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करता है, इस थेरेपी से हार्मोन के स्तर को कम किया जाता है।

बचाव के उपाय:

नियमित जांच: 50 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित रूप से PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE) करवाना चाहिए।

स्वस्थ आहार: फल, सब्जियां और कम वसा वाला भोजन लें।

व्यायाम: सक्रिय जीवनशैली अपनाएं और वजन को नियंत्रित रखें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Saturday, April 25, 2026, 10:36 [IST]
Desktop Bottom Promotion