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सुहाग की निशानी सिंदूर बना सकता है आपको बांझ और कैंसर का मरीज, ऐसे करें असली-नकली में फर्क
Real VS Fake Sindoor : हिंदू धर्म में सिंदूर का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। इसे विवाहित महिलाओं के सुहाग, सौभाग्य और पति की लंबी उम्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। माना जाता है कि सिंदूर से मांग भरने से पति की उम्र लंबी होती हैं।
मगर आजकल बाजार में मिलने वाला सिंदूर, जो पहले पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों से तैयार किया जाता था, लेकिन अब बाजार में काफी हद तक मिलावटी सिंदूर मिलने लगा है, जो सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है। परंपरागत सिंदूर में हल्दी, चूना (calcium hydroxide), और हर्बल सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता था, जो सेहत के लिए भी लाभदायक होते हैं। जबकि मिलावटी सिंदूर में हानिकारक रसायन होते हैं जो न सिर्फ महिलाओं की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं बल्कि कैंसर और इंफर्टिलिटी जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है।
आइए एक्सपर्ट से जानते हैं करवा चौथ के मौके पर घर बैठे आप कैसे नकली सिंदूर की पहचान कर सकते हैं और इसे लगाने के नुकसान।

मिलावटी सिंदूर के लगाने के खतरे
स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर पुष्पेंद्र भारद्धाज बताते हैं कि नकली सिंदूर लगाने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। कई महिलाएं को नकली सिंदुर लगाने की वजह से सिर पर मांग वाली जगह पर पैच बनने लगते है। मिलावटी सिंदूर से त्वचा पर खुजली, जलन, और रैशेज हो सकते हैं।
इसके अलावा कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी हैं कि केमिकल वाले सिंदूर के कण अगर सांस के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं तो यह श्वसन तंत्र में समस्याएं पैदा कर सकता है। सिंदूर में पाए जाने वाले खतरनाक केमिकल की वजह मानसिक तनाव, सिरदर्द, और मस्तिष्क संबंधी विकार हो सकते हैं। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और बांझपन का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर महिलाएं इस तरह के सिंदूर का रोजाना इस्तेमाल करती हैं, तो स्किन कैंसर की समस्या हो सकती हैं।
इन खतरनाक केमिकल से बनाया जाता है सिंदूर
सिंदूर बनाने में सिनेबार का पाउडर जो लाल-नारंगी रंग में मिलता है उसमें केमिकल युक्त कलर, सीसा, और अन्य सिंथेटिक सामग्री के साथ रोडामाइन बी डाई को मिलाकर नकली सिंदूर बनाकर बेचा जाता है।
असली और नकली सिंदूर का पता कैसे लगाएं
पानी में घोलने का तरीका
एक चुटकी सिंदूर लें और उसे एक गिलास पानी में डालें। असली सिंदूर पानी में पूरी तरह घुल जाएगा और पानी का रंग हल्का लाल या पीला हो सकता है। नकली सिंदूर या मिलावटी सिंदूर पानी में घुलने की बजाय तैर सकता है और तलछट में बैठ सकता है। साथ ही, पानी का रंग अधिक गहरा हो सकता है, जो हानिकारक रसायनों की उपस्थिति का संकेत हो सकता है।
सिंदूर का रंग और चमक
असली सिंदूर का रंग हल्का मैट (महीन और मुलायम) और प्राकृतिक लाल या ऑरेंज होता है। इसमें कोई अतिरिक्त चमक या चमकदार तत्व नहीं होते। नकली सिंदूर का रंग अत्यधिक चमकीला या गहरा लाल हो सकता है, और इसमें अक्सर कृत्रिम चमकदार पदार्थ मिलाए जाते हैं। और इसमें आपको चमकीला पदार्थ नजर आएगा।
रगड़कर देखें
थोड़ा सा सिंदूर अपनी हथेली या उंगली पर रखें। इसे उंगली से या हथेली से हल्के से रगड़ें। फूंक मारने पर असली सिंदूर हल्का और पाउडरी महसूस होता है और आसानी से उड़ जाएगा। इसमें चिपचिपाहट नहीं होगी और यह आपकी त्वचा पर नहीं चिपकेगा। वहीं अगर सिंदूर के कण हाथों पर चिपके रह जाते हैं, तो यह संकेत है कि उसमें रसायन या तेलीय पदार्थ मिलाए गए हैं, वजह नकली हैं।
गंध से पहचानें
डॉक्टर पुष्पेंद्र बताते हैं कि कोई भी कॉस्मेटिक का असली और नकली का पता गंध यानी उसकी खुशबू से भी पता चलता है। असली सिंदूर में हल्की सी मिट्टी या हल्दी की प्राकृतिक गंध होती है। नकली सिंदूर में रसायनों की तेज गंध हो सकती है, जैसे केमिकल्स या पेंट की गंध। अगर सिंदूर से तेज गंध आ रही है तो यह नकली हो सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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