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प्रेग्नेंसी में करें ये खास आसन, डिलीवरी में होगी आसानी
प्रेग्नेंसी पीरियड एक ऐसा समय होता है, जब महिला को अपना अतिरिक्त ध्यान रखने की जरूरत होती है। उसे सिर्फ अपने खान-पान का ही ख्याल नहीं रखना होता है, बल्कि फिजिकली रूप से अधिक एक्टिव भी रहना चहिए। ऐसा करने से महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों ही स्वस्थ रहते हैं। इतना ही नहीं, महिला के लिए लेबर पेन को सहन कर पाना भी अधिक आसान हो जाता है। यूं तो आपको अधिक एक्टिव रहना चाहिए,
लेकिन इसके लिए आप किन तरीकों का सहारा ले रही हैं, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। मसलन, वर्कआउट या योगासन करना आपके लिए अच्छा है, लेकिन सही योगा पोज ही करना चाहिए। इन्हीं में से एक है मार्जरी आसन। इसे प्री-नैटल योगा पोज के रूप में भी जाना जाता है। जब महिला इसका अभ्यास करती है तो इससे उसे कई लाभ होते हैं। यहां तक कि डिलीवरी के दौरान भी महिला को बहुत अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी पीरियड में मार्जरी आसन क्यों करना चाहिए-

रिप्रोडक्टिव अंगों को मिलती है मजबूती
मार्जरी आसन को एक प्रसवपूर्व योग माना जाता है। ऐसा इसिलए है, क्योंकि यह आसन मुख्य रूप से रीढ़, पेट और पेल्विस की मसल्स को स्ट्रेच करने के साथ-साथ उसे स्ट्रेन्थ भी देता है। जिसके कारण महिला के लिए डिलीवरी के समय काफी आसानी होती है।यह देखने में आता है कि जो महिलाएं मार्जरी आसन का अभ्यास करती हैं, उन्हें डिलीवरी के समय अपेक्षाकृत कम दर्द होता है।
प्रेग्नेंसी में भी मिलता है लाभ
जब प्रेग्नेंसी में आप मार्जरी आसन का अभ्यास करते हैं तो इससे एक लाभ यह भी होता है कि शिशु मूत्राशय से दूर चला जाता है क्योंकि आप उन्हें अपनी सांसों के साथ आगे-पीछे हिलाते हैं। इससे महिलाओं को प्रेग्नेंसी में होने वाले बार-बार बाथरूम ब्रेक को कम करने में मदद मिलती है।
बच्चे की पोजिशन में बदलाव
जब आप नियमित रूप से मार्जरी आसन का अभ्यास करती हैं तो इससे गर्भस्थ शिशु को जन्म देने के लिए अधिक अनुकूल स्थिति में ले जाने में मदद मिलती है। अक्सर बच्चे की पोजिशन के कारण ही डिलीवरी में परेशानी होती है और महिला को बहुत अधिक दर्द होता है। लेकिन मार्जरी आसन के अभ्यास से यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।
इस पोजिशन में दें जन्म
कई केसेज में यह भी देखा गया है कि महिलाएं मार्जरी आसन अर्थात् कैट-काउ पोज में ही बच्चे को जन्म देती हैं। अगर वह पहले से ही इसका अभ्यास करती हैं तो इससे उनके लिए बच्चे को जन्म देना आसान हो जाता है और वह अधिक कॉन्फिडेंट फील करती हैं। इस पोजिशन में बच्चा पेल्विस के जरिए आसानी से मूव कर पाता है। हालांकि, अगर आप इस तरह बेबी को जन्म देना चाहती हैं तो ऐसे में आपको पहले एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। आसान डिलीवरी के लिए आपको प्री-नैटल योगा के रूप में कैट-काउ पोज के कई वैरिएशन जैसे स्क्वेटिंग, साइड लाइंग, बर्थिंग बॉल का उपयोग करना, लंजिंग आदि का अभ्यास करना होगा।
नोट- हर महिला की प्रेग्नेंसी में अलग कॉम्पलीकेशन हो सकती हैं। इसलिए कभी भी किसी वर्कआउट या योगा पोज का अभ्यास खुद से शुरू ना करें। हमेशा पहले डॉक्टर से इस विषय में पूछें और योगा विशेषज्ञ की देख-रेख में ही इसे करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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