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Secondary Infertility : दूसरी बार नहीं बन पा रही हैं मां, कहीं यह सेकेंडरी इनफर्टिलिटी तो नहीं
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी एक ऐसा शब्द है, जिसके बारे में अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता है। अमूमन लोग अपनी फैमिली को सही समय पर प्लॉन करना चाहते हैं। एक बार कंसीव करने के बाद दूसरे बच्चे के बीच गैप रखने की उनकी इच्छा होती है। लेकिन अगर आपको दूसरी बार कंसीव करने में समस्या हो रही हो तो। ऐसे में समझ में नहीं आता है कि क्या गड़बड़ हो रही है। यही स्थिति सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहलाती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के बारे में अधिकतर लोगों को इसलिए भी पता नहीं चल पाता है, क्योंकि महिला पहली बार आसानी से कंसीव कर लेती है। उसके बाद दोबारा कंसीव करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी क्या है?
इनफर्टिलिटी आमतौर पर दो तरह की होती है- प्राइमरी और सेंकेडरी। जहां प्राइमरी इनफर्टिलिटी में महिला पहली बार ही कंसीव करने में परेशानी का अनुभव करती है। जबकि सेकेंडरी इनफर्टिलिटी में महिला ने पहले एक बार आसानी से कंसीव कर लिया होता है। उसके बाद, उसकी डिलीवरी भी हो सकती है या फिर किन्हीं कारणों से मिसकैरिज भी हो जाता है। लेकिन जब महिला दूसरी बार कंसीव करना चाहती है तो उसे परेशानी का सामना करना पड़ता है। सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक बच्चे के जन्म के बाद आपकी फर्टिलिटी में बदलाव आता है। इतना ही नहीं, समय के साथ पार्टनर की फर्टिलिटी में भी बदलाव हो सकता है।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के क्या कारण हैं?
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी अमूमन पुरुष या महिला के फर्टिलिटी इश्यूज से संबंधित होते हैं। हालांकि, पुरुषों और महिलाओं में सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कारण अलग-अलग होते हैं। मसलन-
महिलाओं में सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कारण-
• महिला की अधिक उम्र इसके पीछे एक मुख्य वजह हो सकती है। 30 वर्ष की आयु के बाद एक महिला की प्रजनन क्षमता कम होने लगती है।
• एंडोमेट्रियोसिस भी एक ऐसी स्थिति है, जो फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। इसका अर्थ है कि गर्भाशय की लाइनिंग जैसा ऊतक गर्भ के बाहर शरीर के कुछ हिस्सों में बढ़ता है। यह गर्भवती होने में समस्याएं पैदा कर सकता है।
• ब्लॉक्ड फैलोपियन ट्यूब के कारण भी महिला दूसरी बार मां नहीं बन पाती है। अंडाशय से गर्भाशय तक अंडे ले जाने वाली ट्यूब क्लैमाइडिया या गोनोरिया जैसे पैल्विक संक्रमण के कारण ब्लॉक हो सकती है।
• पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम अर्थात् पीसीओएस एक हार्मोनल विकार है, नियमित ओव्यूलेशन और पीरियड्स को रोकता है। ऐसे में महिला के लिए कंसीव करना काफी कठिन हो जाता है।
• अत्यधिक वजन भी कंसीव करना मुश्किल बनाता है। कुछ महिलाओं में वजन बढ़ने से ओवेरियन डिसफंक्शन हो सकता है।
पुरुषों में सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कारण-
• पुरुषों में मैच्योर एज मतलब 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र होने पर उनके सीमेन अर्थात् वीर्य की गुणवत्ता कम हो जाती है।
• शुक्राणु उत्पादन के लिए टेस्टोस्टेरोन महत्वपूर्ण है लेकिन उम्र बढ़ने या जननांग चोटों के कारण टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। इससे महिला के लिए कंसीव करना मुश्किल हो जाता है।
• पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट भी शुक्राणुओं की संख्या को कम कर सकता है। यह भी सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है।
• कई बार कैंसर होने या फिर किसी अन्य हेल्थ इश्यूज के उपचार के रूप में प्रोस्टेट को हटाने से शुक्राणु विपरीत दिशा में प्रवाहित हो सकते हैं। इससे भी इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।
• महिलाओं की तरह ही पुरुषों का अत्यधिक वजन भी फर्टिलिटी की राह में रोड़ा बन सकता है। प्रत्येक 20 अतिरिक्त पाउंड के लिए एक आदमी में इनफर्टिलिटी की संभावना 10 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का इलाज क्या है?
अगर आपको सेकेंडरी इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इसके लिए कभी भी अपने पार्टनर को ब्लेम करें। बल्कि पॉजिटिव रहें और एक बार डॉक्टर से अवश्य मिलें। वे कुछ टेस्ट व दवाइयों के माध्यम से आपकी इस समस्या का हल अवश्य ढूंढ लेंगे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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