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मकर संक्रांति, लोहड़ी, बिहू जैसे त्योहारों पर खाए जाते हैं स्पेशल फूड्स, डायटीशियन से जानें इसे खाने के फायदे
नए साल की शुरुआत के बाद देशभर में कई प्रमुख त्योहारों की शुरुआत होती है, जिनमें लोहड़ी, मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल प्रमुख हैं। इन त्योहारों के दौरान खासतौर पर तिल और गुड़ से बनी मिठाइयां, खिचड़ी, पोंगल, और चिउड़े-सौंफ जैसी पारंपरिक डिशेज बनती हैं। इन व्यंजनों में शरीर को गर्मी प्रदान करने वाली तत्त्व होते हैं, जो सर्दी में राहत देते हैं।
तिल, गुड़ और मूंग दाल जैसे तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और पाचन को सुधारते हैं। डायटीशियन अंजली पाठक के अनुसार, इन डिशेज में मौजूद विटामिन और खनिज शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, और ये सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते हैं।

तिल के लड्डू
मकर संक्रांति पर उत्तर भारत में देशभर में तिल और गुड़ का सेवन ठंड में शरीर के लिए फायदेमंद होता है। तिल में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाचन तंत्र को सुधारती है और कब्ज व एसिडिटी से राहत देती है। तिल का तेल डाइजेस्टिव एंजाइम्स के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। यह सर्दियों में सेहत के लिए बेहद लाभकारी है।
सरसो का साग और मक्के की रोटियां
सरसों, पालक और बथुए से तैयार साग सर्दियों का खास व्यंजन है, जो विटामिन ए, के, फाइबर, लोहा और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है। इसके ऊपर एक चम्मच घी साग का स्वाद और पोषण बढ़ा देता है। घर का बना सफेद मक्खन भी इसमें फायदेमंद होता है, क्योंकि यह विटामिन के अवशोषण में मदद करता है। मक्के की गर्म रोटियों के साथ सरसों का साग खाने का अनुभव बेहद स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होता है। साथ ही, भोजन में गुड़ का छोटा टुकड़ा शामिल करना पाचन शक्ति को बढ़ाता है। सर्दियों में यह पौष्टिक और पारंपरिक थाली न केवल स्वादिष्ट बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होती है।
बिहार और झारखंड में दही-चिड़वा खाने की है परापंरा
मकर संक्रांति पर बिहार और झारखंड में दही-चिड़वा का विशेष महत्व है। इसे न केवल त्योहार के दिन, बल्कि रोज़मर्रा के नाश्ते में भी पसंद किया जाता है। यह पौष्टिक और सेहतमंद आहार है, जो पाचन तंत्र को सुधारने और एसिडिटी की समस्या दूर करने में मदद करता है। चिड़वा को पानी में हल्का भिगोकर दही और गुड़ के साथ खाया जाता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लिए कभी-कभी अचार का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह पित्त की समस्याओं को कम करने और पेट की बीमारियों से राहत दिलाने में असरदार है। दही-चिड़वा का सरल और स्वास्थ्यवर्धक संयोजन इसे बिहार की खास पहचान बनाता है।
असम का तेल पीठा
बिहू, असम का प्रमुख त्योहार, तेल पीठा के बिना अधूरा है। यह चावल के आटे, गुड़, सौंफ और संतरे के छिलके से बना डीप फ्राइड डोनट है, जिसमें खनिज तत्व भरपूर होते हैं। गुड़ का मैग्नीशियम पाचन में सहायक होता है। फ्राई न करने पर इसे उबालकर भी बनाया जा सकता है। सर्दियों में यह पौष्टिक और आसानी से पचने वाली डिश आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन विकल्प है।
गुजरात में उधियु
गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है, जिसे पतंग उत्सव भी कहा जाता है। इस अवसर पर मूंगफली की चिक्की, जलेबी, ढोकला जैसी स्वादिष्ट डिशेज का आनंद लिया जाता है। खासतौर पर "उधियु" नामक डिश बनाई जाती है, जिसमें रत्तालू (पर्पल यम) और नारियल शामिल होते हैं। इसे पूरी और श्रीखंड के साथ परोसा जाता है। यह डिश सर्दियों में स्वाद और सेहत दोनों के लिए लाभकारी है। उत्तरायण पर इस अनोखी डिश को घर में जरूर आज़माएं।
पोंगल और पौष्टिक व्यंजन
पोंगल पर चावल और दाल से बने पौष्टिक व्यंजन परोसे जाते हैं, जो प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर होते हैं। मीठे और नमकीन व्यंजनों में इमली चावल, दही चावल, बिसी बेले भात, सांभर, चुंकर पचड़ी, पोरियल और अप्पम शामिल हैं। यह व्यंजन केले की थाली में परोसे जाते हैं, जो भोजन के एंटीऑक्सीडेंट गुणों को बढ़ाते हैं और आंखों के लिए लाभकारी होते हैं। पोंगल की थाली स्वाद और सेहत का अनोखा संगम है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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