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Myths vs Facts: सिर्फ इन 5 गलतफहमियों की वजह से पुरुष नसबंदी कराने से कतराते हैं, जानें क्या है सच और झूठ
Male Vasectomy Myths and facts : नसबंदी का नाम सुनते है हमारे दिमाग में ख्याल आता है कि ये तो सिर्फ महिलाओं का काम है, क्योंकि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की होती है। नसबंदी को लेकर ऐसी ही कुछ गलतफहमियां हमारे आसपास फैली हुई है, जिसकी वजह से पुरुष हमेशा नसबंदी के नाम पर कन्नी काट जाते हैं। और फैमिली प्लानिंग के नाम पर नसबंदी महिलाओं के हिस्से आती है।
ज्यादात्तर पुरुष अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए आज भी सिर्फ कंडोम का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। कभी आपने सोचा है कि पुरुष नसबंदी करवाने से क्यों कतरातेहैं?
दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि ज्यादात्तर पुरुषों में यह गलत धारणा है कि नसबंदी करवाने से उनकी मर्दाना शक्ति यानी सेक्स पॉवर पर असर पड़ता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। आइए जानते है ऐसे ही 5 मिथक जिनकी वजह से पुरुष नसबंदी करवाने से कतराते हैं।

मिथक : नसबंदी के बाद सेक्स पॉवर घट जाती है?
फैक्ट: कई पुरुषों के बीच यह धारणा है कि नसबंदी कराने से सेक्स के प्रति रुचि घट जाती है और चरमसुख तक नहीं पहुंच पाते हैं। लेकिन सब गलत और झूठा ज्ञान है। नसबंदी करवाने के बाद किसी प्रकार की नपुसंकता या नामर्दी नहीं आती है बल्कि इससे शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती हे। अनचाहें गर्भ की चिंता दूर हो जाती है तो यौन संबंध बनाने में पहले से ज्यादा आनंद मिलता है।
मिथक : नसबंदी की प्रक्रिया जोखिम से भरी और तकलीफदेह होती है?
फैक्ट : लोकल एनिस्थीसिया देकर पुरुष नसबंदी का ऑपरेशन किया जाता है और इसमें सिर्फ 30 मिनट का समय लगता है। इस प्रक्रिया में जोखिम ना के बराबर होता और इसमें ज्यादातर मरीजों को टेस्टिकल्स में बेहद हल्का दर्द और सूजन महसूस होता है और 1-3 हफ्ते के अंदर ये सूजन और दर्द की समस्या अपने आप ही ठीक हो जाती है। वैसे तो महज कुछ दिनों के अंदर ही मरीज पूरी तरह से रिकवर हो जाते हैं।

मिथक: नसबंदी के बाद पुरुष शारीरिक रुप से कमजोर हो जाते हैं?
फैक्ट: नसबंदी के बाद पुरुषों में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। वो नसबंदी करवाने से पहले की तरह ही बाद में भी फिट रहते हैं। हां, नसबंदी के बाद एक दो दिन का आराम बहुत जरुरी होता है। ज्यादातर पुरुष 2-3 दिन बाद काम पर जा सकते हैं। लेकिन अगले 10-15 दिनों तक उन्हें भारी चीजें उठाने या कठोर परिश्रम वाला काम न करने की सलाह दी जाती है।
मिथक: पुरुषों की नसबंदी करवाते ही प्रभावी हो जाती है?
फैक्ट: पुरुष नसबंदी करवाते ही एक तुरंत प्रभावी नहीं हो जाती है। यह तरीका प्रभावी होने में कई महीनों ले सकता है। क्योंकि ट्यूब्स में स्पर्म्स रह सकते हैं जो वीर्य के साथ निकलते हैं। इस समय के दौरान, कोई और प्रोटेक्शन की जानी चाहिए नहीं तो महिला गर्भवती हो सकती है। इसलिए पुरुषों को कम से कम 3 महीनें तक असुरक्षित संबंध बनाने की मनाही होती है। तीन महीने के बाद स्पर्म काउंट के लिए किये जाने वाले टेस्ट से पता किया जा सकता हैं की स्पर्म, सीमेन में मौजूद है या नहीं।
मिथक : नसबंदी, यौन रोग के खतरे से भी बचाती है
फैक्ट : एचआईवी-एड्स या सिफलिस जैसी सेक्शुअली ट्रांसमिटड होने वाली बीमारियां (यौन रोग) सीमन के जरिए फैलती हैं। सीमन के सिर्फ 2-5 प्रतिशत हिस्से में स्पर्म होता है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि स्पर्म की गैर मौजूदगी में भी सीमन, असुरक्षित सेक्स करने पर यौन रोग का कारण बन सकता है। अगर आप एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) से बचाव करना चाहते हैं, तो आपको फिर भी कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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