Menstrual Hygiene Day 2023: पीरियड ब्लड को गंदा मानने से पहले जान लें इसकी सच्चाई

एक समय के बाद हर लड़की के पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। यह एक महिला की प्रजनन प्रणाली में एक प्रक्रिया है जहां योनि के माध्यम रक्त और म्यूकोसल टिश्यू डिस्चार्ज हो जाते हैं। यह एक नेचुरल प्रोसेस है, लेकिन लोगों ने पीरियड्स को कई तरह की सांस्कृतिक मान्यताओं से जोड़ा है। जिसके कारण पीरियड्स को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां लोगों के मन में फैली हुई हैं।

इन्हीं मिथकों को दूर करने और लोगों को मासिक धर्म के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 28 मई को मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे अर्थात् मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इस खास दिन का उद्देश्य मासिक धर्म के साथ जुड़े मिथकों व समाज की सोच को बदलना है। ऐसी ही एक धारणा है कि पीरियड्स के दौरा महिला के शरीर से निकलने वाला ब्लड गंदा होता है। हालांकि, इस बात की सच्चाई आज हम इस लेख के जरिए जानने का प्रयास करेंगे-

Menstrual Hygiene

पीरियड ब्लड को मानते हैं गंदा
भले ही पिछले कुछ दशकों में पीरियड्स या माहवारी को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आया हो, लेकिन आज भी बहुत से लोग पीरियड ब्लड को गंदा ही मानते हैं। उनकी धारणा यह होती है कि पीरियड का खून गंदा और अशुद्ध होता है। अपनी इसी सोच के चलते पीरियड्स के दौरान महिलाओं को काफी कुछ झेलना पड़ता है।

उन्हें ना केवल अलग सोने के लिए कहा जाता है, बल्कि किसी अछूत की तरह व्यवहार किया जाता है। उन्हें मंदिर जाने से लेकर किसी भी सोशल इवेंट आदि में भाग लेने की मनाही होती है। ऐसे में महिला को सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर भी पीड़ा झेलनी पड़ती है।

क्या पीरियड ब्लड में बैक्टीरिया या वायरस होते हैं?
अमूमन पीरियड ब्लड को गंदा इसलिए माना जाता है, क्योंकि लोगों की यह सोच होती है कि इसमें बैक्टीरिया व वायरस हो सकते हैं। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। पीरियड्स के दौरान महिला की योनि से निकलने वाला रक्त गंदा या अशुद्ध नहीं होता है। इसमें कोई बैक्टीरिया या वायरस नहीं होता है। आसान शब्दों में अगर कहा जाए तो पीरियड के दौरान शरीर से निकलने वाला रक्त किसी अन्य प्रकार के रक्त के समान होता है।

पीरियड ब्लड भी सामान्य रक्त की ही भांति टिश्यू, पानी और थोड़ी मात्रा में हार्मोन से बना होता है। चूंकि इसमें किसी तरह का बैक्टीरिया या वायरस नहीं होता है, इसलिए इसे अशुद्ध या गंदा कहना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है।

पीरियड ब्लड का रंग अलग क्यों होता है?
अधिकतर लोग पीरियड ब्लड को गंदा इसलिए भी मानते हैं, क्योंकि उसका कलर सामान्य रक्त की तुलना में थोड़ा सा अलग होता है। इतना ही नहीं, पीरियड के दौरान जब महिला को ब्लीडिंग होती है तो उसके रक्त के थक्के बनते हैं। जबकि सामान्य रक्त के साथ ऐसा नहीं होता है। यहां यह समझना आवश्यक है कि एक महिला का पीरियड ब्लड भी वही रक्त होता है जो उसके पूरे शरीर में घूमता है। उसके मासिक धर्म के खून के थक्के बनना और रंग के अलग होने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है।

रक्त के थक्के शरीर के हार्मोन के कारण बनते हैं। वहीं, ब्लड का कलर निर्धारित करता है कि यह कितनी देर तक ऑक्सीजन के संपर्क में रहा है। ब्लड जितना अधिक समय तक ऑक्सीजन के संपर्क में रहता है, उतना ही गहरा हो जाता है। इसलिए, कलर में बदलाव और रक्त के थक्कों के कारण उसे अशुद्ध समझना सही नहीं है।

अब वक्त आ गया है कि हम पीरियड्स और उससे जुड़ी गलत धारणाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने की जगह पहले उसे साइंटिफिक कारणों को समझें। साथ ही साथ, पुरूष व महिलाओं दोनों को जागरूक करें। जिससे आने वाली पीढ़ी अधिक सेहतमंद बने।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Sunday, May 28, 2023, 14:00 [IST]
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