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Monkey Fever : कर्नाटक में मंकी फीवर का कहर, जानें कितना खतरनाक है ये बुखार, ये है लक्षण और बचाव
Monkey Fever: कोरोना के बाद अब मंकी फीवर का खतरा बढ़ रहा है। कई राज्यों में इस बुखार के मामले बढ़ने की खबरें आ रही हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में मंकी फीवरके केस तेजी से बढ़ रहे हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कर्नाटक में जहां एक तरफ मंकी फीवर के चलते दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। वहीं अब तक इस वायरस के कुल 49 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है।

इस वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इससे निपटने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। आइए जानते हैं आखिर यह फीवर क्या है और यह कितना खतरनाक है...
मंकी फीवर क्या है (What is Monkey Fever)
मंकी फीवर यानी क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) जानवरों से इंसानों में फैल सकता है. बंदरों के शरीर में पाए जाने वाले टिक्स (किलनी) के काटने से यह बीमारी इंसानों में आ सकती है। देश के कुछ राज्यों में इसके केस देखने को मिले हैं। इनें कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा शामिल है।

मंकी फीवर के लक्षण ( Monkey Fever Symptoms)
अचानक से बुखार, गंभीर सिरदर्द, उल्टी-दस्त मांसपेशियों में दर्द, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, और थकान मंकी फीवर के कुछ बड़े लक्षण हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मंकी फीवर के गंभीर मामलों में नाक और मसूड़ों से खून भी आ सकता है। ये कई तरह की न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स का कारण भी बन सकता है। ऐसे में इसके खिलाफ जल्द से जल्द कदम उठाना जरूरी है।

मंकी फीवर से कैसे बचें ( Monkey Fever Treatment )
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, मंकी फीवर यानी केएफडी के लिए किसी तरह का विशेष इलाज नहीं है। सिर्फ लक्षणों का पता लगाकर इसके जोखिमों को कम करने का इलाज किया जाता है। खून आने वाली समस्याओं में मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और लगातार पानी पीने की सलाह दी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मंकी फीवर से बचने के सभी उपाय करते रहने चाहिए। इसकी वैक्सीन भी मौजूद है। जिसे लगवाने से संक्रमण से बचाव और बीमारी के गंभीर रूप लेने का जोखिम कम हो सकता है। टिक्स के काटने से भी बचना चाहिए। इसके लिए सुरक्षित कपड़े पहन सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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