Latest Updates
-
Google Birthday 2026: क्या आप जानते हैं 27 सितंबर को ही क्यों बर्थडे मनाता है गूगल? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप -
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष का पहला दिन आज या कल? जानें किस दिन किस पितर का करें श्राद्ध -
World Contraception Day 2026: गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं? जानें इसके फायदे और नुकसान -
Pitru Paksha 2026: बेटा न हो तो क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान? अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दिया जवाब -
World Lung Day 2026: शरीर में दिखें ये 7 लक्षण तो समझ जानें आपके फेफड़े हो रहे हैं खराब -
Anant Chaturdashi 2026: अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों बांधी जाती हैं? जानें इसका धार्मिक महत्व -
Mushtaq Khan Family: 'वेलकम' फेम मुश्ताक खान ने दुनिया को कहा अलविदा, जानिए एक्टर के परिवार में कौन-कौन? -
डायबिटीज में चावल और रोटी खाने का सही समय क्या है? जानें कब खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
Anant Chaturdashi Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट -
Anant Chaturdashi 2026 Wishes: श्री हरि का आशीष...इन संदेशों के साथ अपनों को दें अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं
Myth vs Fact : घुटने के ऑपरेशन के बाद सीढ़िया चढ़ना मुश्किल होता है, जानें ऐसे ही 5 मिथक और उनके सच
आज के समय में अधिकतर लोगों को घुटने से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अमूमन जोड़ों के दर्द व समस्या को दूर करने के लिए दवाइयों व खानपान पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन जब ज्वाइंट सरफेस डैमेज हो जाता है तो ऐसे में ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जाती है।
इसमें डैमेज्ड ज्वॉइंट की सरफेस को आर्टिफिशियल ज्वाइंट जिन्हें प्रोस्थेसिस कहा जाता है, से रिप्लेस कर दिया जाता है। इससे ना केवल दर्द से आराम मिलता है, बल्कि मोबिलिटी भी पहले से अधिक बेहतर होती है। यह सर्जरी बेहद आम हो चुकी है। लेकिन फिर भी अधिकतर लोग इसे लेकर तरह-तरह की धारणाओं को सच मानते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी से जुड़े मिथ्स और उनके फैक्ट्स के बारे में बता रहे हैं-

Myth : ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद घुटने मोड़ना या सीढ़ियां चढ़ना संभव नहीं है।
Fact : आजकल उपयोग किए जाने वाले अधिकतर प्रोस्थेसिस सामान्य घुटने की तरह आपको मूवमेंट प्रदान करते हैं। इससे बाद में रोगियों के लिए घुटनों को मोड़ने, सीढ़ियां चढ़ने और क्रॉस-लेग्ड में बैठना भी संभव हो पाता है। यह मुख्य रूप से की गई सर्जरी की क्वालिटी पर निर्भर करता है।
Myth : ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी केवल बूढ़े व्यक्ति की होती है।
Fact : यह सच है कि ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत अधिकतर बूढ़े व्यक्तियों को होती है। लेकिन सिर्फ वृद्धावस्था में ही यह सर्जरी करवाई जाती है, यह एक मिथ है। कई बार चोट लगने, जेनेटिक्स या फिर लाइफस्टाइल प्रॉब्लम के कारण भी इस सर्जरी को करवाने की जरूरत पड़ जाती है। हालांकि, सर्जरी कराने का निर्णय उम्र के बजाय दर्द की गंभीरता, फंक्शन प्रॉब्लम्स और व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य पर आधारित होता है।
Myth : सर्जरी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले मेटल्स एलर्जिक रिएक्शन का कारण बनते हैं।
Fact : ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान जिन मेटल्स का इस्तेमाल किया जाता है, वे बॉडी टिश्यूज के साथ प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। इसके अलावा इन दिनों टाइटेनियम एलॉय मेटल्स की कोटिंग वाले इम्प्लांट भी हैं, जिन्हें आम तौर पर गोल्ड नी के नाम से जाना जाता है। ये वास्तव में नॉन-एलर्जिक और लंबे समय तक चलने वाले साबित हुए हैं।
Myth : सर्जरी के बाद ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।
Fact : यह ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी से जुड़ा एक कॉमन मिथ है। लोगों को लगता है कि उनके ज्वॉइंट्स की सर्जरी हुई है तो उन्हें रिकवर होने में कई दिन लग जाएंगे। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। वास्तव में, मरीज़ सर्जरी के उसी दिन चलने में सक्षम होते हैं और अधिकतर लोग सर्जरी के कुछ हफ्तों के भीतर अपनी नियमित गतिविधियों में वापस आ जाते हैं।
Myth : जोड़ों के दर्द के लिए ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ही बेस्ट ऑप्शन है।
Fact : जिन लोगों को अर्थराइटिस की समस्या है या फिर अक्सर घुटनों में दर्द रहता है, उन्हें लगता है कि उनके लिए दर्द से निजात पाने के लिए सर्जरी ही बेस्ट ऑप्शन है। जबकि ऐसा नहीं है। आज के समय में कई नॉन-सर्जिकल ऑप्शन जैसे फिजिकल थेरेपी, मेडिकेशन, लाइफस्टाइल में बदलाव व इंजेक्शन आदि की भी मदद ली जाती है। सर्जरी का सहारा अक्सर तब लिया जाता है, जब ये नॉन-सर्जिकल उपाय रोगी को आराम नहीं दिलवा पाते हैं। साथ ही, दर्द या घुटनों की समस्या के कारण व्यक्ति को सामान्य जीवन जीने में परेशानी होती है।
Myth : सर्जरी के बाद ताउम्र फिजियोथेरेपी की जरूरत होती है।
Fact : ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत नहीं पड़ती है। अस्पताल में सिखाई गई एक्सरसाइज घर पर भी की जा सकती हैं। वास्तव में, सर्जरी के बाद रिकवरी जल्द होती है और कुछ व्यायाम के जरिए व्यक्ति अपना ख्याल आसानी से रख सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
