Navratri 2022: अष्टमी/नवमी पर क्यों लगाया जाता है पूरी, हलवा और चने का भोग? जानें कंजक प्रसाद से जुड़ा साइंस

नवरात्रियों में महाअष्टमी और नवमी पूजा का बहुत महत्‍व है। नवरात्री के अष्‍टमी में , मां दुर्गा के आठवे स्वरूप महागौरी को और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन दोनों तिथियों पर मां के उपासक छोटी बच्चियों की सेवा कर उन्‍हें प्रसाद खिलाते हैं, जिसे कंजक कहा जाता है।

इसकी के साथ वो नवरात्रि की समाप्ति करते हैं। नवरात्रि के प्रसाद में कंजक का प्रसाद निर्धारित ही होता है। इस द‍िन पूरी, हलवा और सूखे चने की सब्‍जी भोग पर चढ़ती हैं। कभी आपने सोचा है क‍ि नवरात्रियों में ये ही प्रसाद क्‍यों चढ़ाया जाता हैं? इसके पीछे भी धार्मिक आस्‍था के साथ साइंस जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं।

navratri 2023: significance of puri kala chana and halwa on ashtami and navami prasad khane ke fayde

कैसे की जाती है कंजक पूजा?

परंपरा के अनुसार, कंजक पूजा नवजात शिशु से लेकर 10 साल की उम्र की छोटी लड़कियों के पैर धोने से शुरू होती है। इसके बाद, उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत (चावल) का तिलक लगाया जाता है और उनके हाथों में एक कलावा बांधा जाता है। उसके बाद, उन्हें नारियल से बना प्रसाद दिया जाता है, उसके बाद पूरी, हलवा और सुखा काला चना दिया जाता है। पूजा के अंत में, उन्हें धन, आभूषण, कपड़े, खिलौने आदि के रूप में उपहार भी दिए जाते हैं। अंत में, भक्त उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद मांगते हैं, और उनके जाने के बाद, भक्त बचे हुए भोजन से उपवास तोड़ते हैं।

कंजक प्रसाद के फायदे

पौराणिक कथाओं के विशेषज्ञों के अनुसार, सभी प्रसाद (पूरी, चना और हलवा) देसी घी में बनाए जाते हैं और स्वस्थ माने जाते हैं। पोषण के दृष्टिकोण से, चना और सूजी आहार फाइबर से भरपूर होते हैं और जिससे रक्त शर्करा का स्तर बेहतर होता है। वे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने और संतुलित करने में भी मदद करते हैं और इस तरह हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
अध्ययनों से पता चलता है कि काले चने में सैपोनिन भी होता है, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और फैलने से रोकता है। इसमें सैलेनियम भी होता है, जो कैंसर पैदा करने वाले यौगिकों को डिटॉक्सीफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूसरी तरफ, सूजी दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है और वज़न कम करने में मददगार होता है। वहीं न्यूट्रीशनिस्ट का भी मानना है क‍ि 8-9 दिनों तक सात्विक खाने का पालन करने के बाद पूरी, हलवा और चना शरीर को ज़रूरी पोषण देते हैं, जिससे पाचनक्रिया में संतुलन बना रहता है।

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बृहस्‍पति से भी जुड़ा है कारण

ज्योतिष के अनुसार गुरू बृहस्पति सबसे अधिक वयोवृद्ध एवं सभी नक्षत्रों द्वारा पूजनीय हैं। इस ग्रह के उच्‍च होने से व्यवसाय, संबंधी, स्वास्थ्य संबंधी, लाभ होने की प्रबल योग होते हैं। इनकी शांति से गृह क्‍लेश भी नहीं होते हैं। और घर में सभी को सद्बुद्धि प्राप्त होते हुए सफलता के क्षेत्र प्रशस्त हो जाते हैं और जितने भी वक्री और पीड़ादायक ग्रह हैं वह सब बृहस्पति की दुष्टि पड़ने से शांत हो जाते हैं और अपनी जरूर दृष्टि के कारण पीड़ा नहीं दे पाते इसलिए भी चने का प्रसाद अनिवार्य किया गया है। हर दृष्टि हर प्रकार की सोच के अनुसार ऋषियों ने उचित रूप से ऐसे भोग की व्यवस्था ही। जब तक चने के साथ हलुआ न हो भोग अधूरा है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Saturday, October 21, 2023, 12:34 [IST]
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